मुस्लिम नेतृत्व की 'समाजवादी पार्टी' से बढ़ती दूरी/RNI news agency
दो घटनाओं ने देश में मुस्लिम नेतृत्व की समाजवादी पार्टी से दूरी बढ़ाने में ‘आग में घी’ का काम किया है। मुस्लिम नेतृत्व की सपा से नाराजगी इतना
अधिक होती जा रही है कि अल्पसंख्यक वोटों पर उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई और लोक सभा चुनाव में 22 सांसद पहुंचाने वाली समाजवादी पाटी ने यदि तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाए तो उसे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अल्पसंख्यक वर्ग के बड़े नेता और बुद्धिजीवि
सपा के भाजपा के साथ तालमेल में काम करने तक का आरोप लगा रहे हैं जो कि मुलायम सिंह यादव और उनके सहयोगियों के लिए खतरे की घंटी है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भड़के साम्प्रदायिक दंगे और उन पर काबू पाने में असक्षम रही सपा सरकार की लचर व्यवस्था ने मुस्लिम नेतृत्व को बहुत नाराज कर दिया है जिसके फलस्वरूप समाजवादी पार्टी से रिश्ता जोड़ने वाले सुन्नी मुसलमानों के उत्तर भारत में बड़े लीडर मौलाना तौकीर रजा खां ने अपनी पार्टी इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल का
सपा से संबंध विच्छेद कर लिया।
मुकर्रम का कहना है कि अखिलेश कम उम्र हैं और पार्टी के सीनियर लीडर उनसे तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। जो लोग दोषी हैं, उनके साथ सख्त कार्यवाई हो और जिन लोगों को जान-माल की हानि हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाए। यहां यह उल्लेख आवश्यक है कि आर.एन.आई. को दिए गये इस ब्यान के कुछ ही समय बाद मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने दंगे में मृत्कों के परिजनों को 10-10 लाख रूप्ये तथा गम्भीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रूप्ये तत्काल उप्लब्ध कराने का आदेश जारी कर दिया।
आल इंडिया मिल्ली कौंसिल के महासचिव डाक्टर मंजूर आलम तो सपा सरकार में हुए निरंतर दंगों से इतना नाराज हैं कि कहते हैं ,अखिलेश यादव को इन दंगों की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्य मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। डाक्टर आलम कहते हैंः ‘84 परिक्रमा इसी प्लानिंग से आयोजित की गई थी कि इसको रोका जाएगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश व प्रदेश के अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में जहां हिन्दू और मुसलमान भाईचारे के साथ रहते थे, उसे तोड़ा जाएगा।’ सपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए डाक्टर आलम कहते हैं कि ‘‘मुलायम सिंह यादव और अशोक सिंघल की खामोश कमरे में मुलाकात मुलायम को शक के दायरे में खड़ा कर देती है क्योंकि इस मुलाकात के तुरंत बाद ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दंगे भड़के। यदि यह मिलीभगत नही तो मुलायम सिंह यादव की सियासी दूरअंदेशी की कमी है।’
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भड़के दंगों को इल्यास 2014 के चुनाव से जोड़ कर देखते हैं। ‘जिस प्रकार 84 परिक्रमा हुई उससे साफ हो जाता है कि सपा और भाजपा का प्लान यह था कि तुम अपना खेल खेलो, हम अपना। 2014 के चुनाव को सामने रखकर मंसूबाबंद तरीके से यह काम किया गया। मुसलमान को भी चाहिए कि मंसूबाबंद तरीके से वोट दे।’
जमात-ए-इस्लामी द्वारा आयोजित एक मीटिंग में वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दंगों की निंदा की और इसके लिए प्रदेश की अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। इस मीटिंग में मौलाना महमूद मदनी (महासचिव, जमात-ए-इस्लामी हिंद), डाक्टर एस क्यू आर इल्यास, मौलाना नुसरत अली, डाक्टर जफरूल इस्लाम खां (अध्यक्ष आल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावेरत), डाक्टर तसलीम रहमानी (अध्यक्ष मिल्ली पालिटिकल कौंसिल आफ इंडिया), मौलाना मोहसिन तकवी (कार्यकारी सचिव, मजलिसे उलमा-ए-हिन्द), मौलाना शीस तैमी आदि वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं ने अखिलेश सरकार की तुरन्त बर्खास्तगी की मांग की। इन नेताओं ने क्हा कि अखिलेश की 2 वर्ष से कम अवधि में 105 छोटी बड़ी साम्प्रदायिक हिंसा की वार्दात हुई हैं। किसी भी सरकार में विपक्ष सरकार को कमजोर करने की कोशिश करता है। अखिलेश सरकार यदि इस मामले में विपक्ष पर जिम्मेदारी गलत है। यदि अखिलेश सरकार को तुरन्त बर्खास्त नहीं किया गया तो सपा को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, उन्होंने क्हा। इसके पश्चात जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष मौलाना जलालुद्दीन उमरी ने आर.एन.आई. से बात करते हुए क्हा कि कमाल फारूकी की बर्खास्तगी भी इन्हीं हालात की कड़ी है और हम इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने क्हा कि कमाल फारूकी ने वही क्हा था जो जमात और दूसरी मुस्लिम तंजीमें बड़े समय से कहती आ रही हैं और केवल इतने पर पार्टी से निष्कासित करना बताता है कि सपा मुस्लिम मुद्दों को लेकर जरा भी गंभीर नहीं।
ईटीवी के प्रोग्राम ‘चैलेंजेज़ बिफोर माईनोरिटी’ से संबंधित डाक्टर हफीजुर रहमान पाशा मानते हैं कि बदले हालात में अल्पसंख्यक समुदाय के चैलेंजेज बहुत बढ़ गए है। जिस प्रकार सपा सरकार चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने की निरंतर मांग करने वाले कर्मठ समाजसेवी को बाहर का रास्ता दिखाती है, उससे साफ है कि अल्पसंख्यक समुदाय के हित की बात करने वाला कम से मुलायम सिंह तो नहीं है। www.samagravichar.in, info@samagravichar.in, alpsankhyaktimes94gzb.com,Mob:+91 9350 934 635.jpg)
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