संघ, साबिर अली को लेकर पार्टी के शीर्ष-नेतृत्व से नाराज़ था./रंजन ज़ैदी
मुख़्तार अब्बास नक़वी आत्म-सुरक्षा को लेकर आतंकित मु स्लिम राजनीति की ज़मीनी हकीकत यह है कि मुख़्तार अब्बास नक़वी के पास जन-शक्ति का आभाव है. मुस्लिम समुदाय से उनका कोई भावनात्मक जुड़ाव भी नहीं है. यदि उनका नाम 'मुकुन्दी लाल चिरैयाकोटी' रख दिया जाये तो शायद लोग उन्हें पहचान भी न पाएं कि मियां मुख़्तार अब्बास नक़वी का जन्म किसी शिया मुस्लिम घराने में हुआ था. कभी बीजेपी ने उन्हें मुस्लिम कार्ड के रूप में इस्तेमाल किया था जैसे सिकंदर बख्त और मास्टर नूरुद्दीन के बाद अनवर देहलवी का इस्तेमाल जनसंघ (बीजेपी) ने किया था. और बाद में उसने आरिफ़ मुहम्मद खान का भी इस्तेमाल किया। वह अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए ऐसा करते हुए किसी भी हद तक जा सकती है लेकिन अटल विहारी बाजपयी के बैकफुट पर जाते ही और बीजेपी के भीतर खतरनाक हदतक हो रहे उथल-पुथल से अब संघ पार्टी पर हावी हो चुका है और वह किसी भी स्थिति में अपनी इस राजनीतिक इकाई में उसी के दबाव पर वह मुसलमानों को नेतृत्व देने के पक्ष में नहीं है. इसलिए उसके दबाव पर ही साबिर अली की पार्टी-सदस्यता आनन-फ़ानन में समाप्त...