आग जिलाती है तो जलाती भी है/ रंजन जैदी
आग जिलाती है तो जलाती भी है / रंजन जै दी Sultan Jahan Begum of Bhopal भोपाल , एक एतिहासिक दर्पण। यानि : तस्वीर का एक पक्ष। शीर्षक में है , एक हज़ार वर्ष का इतिहास . एक पाठक के रूप में मै तलाशता रहा लेकिन समझ नहीं पाया कि इस पुस्तक में इतिहास जैसी क्या चीज़ है ? हम इसे एक हज़ार वर्ष का दस्तावेज़ भी नहीं कह सकते लेकिन लिखने की जिजीविषा ने भोपाल की स्टीरियोग्राफी को लेखक ने ऐसे पेश किया है कि हम अधजले कंडे की राख की मोटी पर्त के नीचे की दबी आग की तपन को ज़रूर महसूस करने लग जाते है . यानि , इस लेखक में लेखन की अपार संभावनाओं की आग दबी तो है लेकिन उसके पास न तो जंगल है और न ही आसपास खर - पतवार कि जो आग को पकड़कर एक ज्वालामुखी में तब्दील करा दे . बात इतिहास की है तो कंडे की आग की संस्कृति अब नहीं रही है . नई पीढ़ी तो यह भी नहीं ज...