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आम आदमी पार्टी' ​का ​ उत्साह ​अब ​ जाड़े की ओस ​की तरह है/ रंजन ज़ैदी

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नमो के लक्ष्य अभेद्य, केजरीवाल के अपने  ही दुश्मन।  रा जनीति की अपनी भाषा है और व्यक्ति के अपने संस्कार। जब भाषा और संस्कार परस्पर टकराते है तो संघर्ष की ज़मीन तैयार होती है  जिसकी ज्वालामुखी से परिवर्तन का आंदोलन फूटता है.  'आम आदमी पार्टी' भी एक तरह का जनांदोलन रहा ​है​, ​जिसका अभी ​हाल में ही ​जन्म हुआ था​.         ​ दु:खद स्थिति यह रही कि  'आम आदमी पार्टी' के रग-रेशे ​किसी नवजात शिशु की तरह उसके जन्म लेते ही कई तरह के इन्फेक्शंस का शिकार हो गए थे। कहते हैं कि जन्म लेते ही बोलने वाले बच्चे ​अच्छे संस्कारवान नहीं होते हैं । उम्र से बड़े लगने वाले इस तरह के बच्चे  ​माँ-बाप, पड़ोस और जानकारों को देखकर असभ्य, अशिष्ट और अभद्र भाषा में अपमानित करते रहते हैं​। हमारी सभ्यता में इस तरह के ​बच्चे भी मासूम और अल्लाह के नेक बन्दे समझे जा ते हैं.        दुनियाभर में जब बच्चों और औरतों पर बाहरी या घरेलू ​हिंसा होती है तो सारी...

अब सारी तहज़ीबें चुप हैं/-रंजन ज़ैदी

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अब सारी तहज़ीबें चुप हैं किसके खौफ से सहमी-सहमी, किसकी याद में खोई है. भीगे वर्क से लिपटी तितली जाने कब से सोई है. क़तरा-क़तरा गलते-गलते शबनम आंसू बन बैठी,   रात की शोरिश आग जलाये लोरी सुनकर सोई है. माँ सिरहाने बैठी कबसे आँचल में इक चाँद लिए,   हर दस्तक पर वह सुबकी है, हर आहट पर रोई है. बाढ़ में सब कुछ ऐसे डूबा, जैसे नूह का तूफ़ां हो, चश्मे-ज़दन में बर्फ पिघलकर, बादल से टकराई है. सारा जंगल बहते-बहते मेरी नाव में आ बैठा,   अब सारी तहज़ीबें चुप हैं, कैसी आफ़त आई है. कोई न तितली, फूल न जूड़ा, खुशबू में भी बेकैफी, सूखे पत्तों की कब्रों पर, बस्ती कितना रोई है.     Contact: 9350934635 zaidi.ranjan20@politics1.blogger.com

पत्र, योगी आदित्यनाथ के नाम/--रंजन ज़ैदी

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Letter to MP Yogi Adityanath)                            उदहारण बहुत हैं लेकिन …?             MP Yogi Adityanath (Subject : पत्र , योगी आदित्यनाथ के   नाम)        मान्यवर !         मे री तुमसे कोई निजी दुश्मनी नहीं है . तुम क्यों भगवा - वस्त्र धारण कर चुके हो , मैं उस रहस्य में नहीं जाना   चाहता। मैं वैसे भी साधु - संतों का बहुत सम्मान करता आया हूँ और अनेक बड़े संतों के   साथ मेरे अंतरंग संबंध भी हैं. कोई भी साधु-संत व्यक्तिगत रूप से देश में घृणा की राजनीति पसंद नहीं करता है . हाँ, अपने धर्म की रक्षा , प्रशासनिक   वर्चस्व , आर्थिक मज़बूती और आज़ादी उनको भी पसंद है . वे साधु - संत मुसलमानों   के कोलोनियन - कल्चर के साथ भेदभाव नहीं करना चाहते . वे साधु - संत यह भी जान...