आम आदमी पार्टी' का उत्साह अब जाड़े की ओस की तरह है/ रंजन ज़ैदी
नमो के लक्ष्य अभेद्य, केजरीवाल के अपने ही दुश्मन। रा जनीति की अपनी भाषा है और व्यक्ति के अपने संस्कार। जब भाषा और संस्कार परस्पर टकराते है तो संघर्ष की ज़मीन तैयार होती है जिसकी ज्वालामुखी से परिवर्तन का आंदोलन फूटता है. 'आम आदमी पार्टी' भी एक तरह का जनांदोलन रहा है, जिसका अभी हाल में ही जन्म हुआ था. दु:खद स्थिति यह रही कि 'आम आदमी पार्टी' के रग-रेशे किसी नवजात शिशु की तरह उसके जन्म लेते ही कई तरह के इन्फेक्शंस का शिकार हो गए थे। कहते हैं कि जन्म लेते ही बोलने वाले बच्चे अच्छे संस्कारवान नहीं होते हैं । उम्र से बड़े लगने वाले इस तरह के बच्चे माँ-बाप, पड़ोस और जानकारों को देखकर असभ्य, अशिष्ट और अभद्र भाषा में अपमानित करते रहते हैं। हमारी सभ्यता में इस तरह के बच्चे भी मासूम और अल्लाह के नेक बन्दे समझे जा ते हैं. दुनियाभर में जब बच्चों और औरतों पर बाहरी या घरेलू हिंसा होती है तो सारी...