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अन्ना जेल मैं हैं/ रंजन जैदी

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ब्लॉग लिखे जाने तक अन्ना जेल मैं हैं. सीने में दर्द की शिकायत है. अन्ना,    अब डाक्टरों के भरोसे रहेंगे. राजनीति में ऐसा होता है.  अन्ना ने अपना  कद बढ़ा लिया है.  उन्हें कम आंकना  हर राजनीतिक नेता और पार्टी के लिए घातक सिद्ध होगा. राजनीति अपनी किताब का एक नया अध्याय लिखने जा रही है. यह अध्याय इस देश के युवक लिखेंगे. चमत्कारिक परिणाम आने वाले हैं.. आने वाला समय कपिल सिब्बल के राजनीतिक जीवन के लिए   शायद अच्छा न हो. कांग्रेस के अनुभवी नेता अन्ना  से दूर नहीं जा पाएंगे. स्थिति नियंत्रण में आजायेगी लेकिन प्रतिपक्ष को हताशा होगी. सरकार और प्रशासन को बेहद सतर्क रहने की जारूरत तो है किन्तु  हिंसक कार्यवाई करने क़ी जारूरत नहीं है. . वास्तविकता यह है क़ि यह इतिहास का एक टर्निंग-प्वाइंट है. आगे का  सफ़र लम्बा है. Type text or a website address or translate a document. Cancel Blŏga likhē jānē taka annā jēla maiṁ haiṁ. Sīnē mēṁ darda kī śikāyata hai. Annā, yuvaka likhēṅgē aba ḍākṭarōṁ kē bharōsē rahēṅgē. Rājanīti mēṁ aisā hōtā hai. A...

अन्ना हजारे का आन्दोलन....२/ रंजन जैदी

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लोकपाल बिल को लेकर अन्ना हजारे का आन्दोलन...दिल्ली में हो रहा है. महाराष्ट्र में वहां के किसान आन्दोलन कर रहे हैं. पुलिस फायरिंग में मौतें भी हुई हैं लेकिन अन्ना को इससे गरज नहीं है.  किसान आन्दोलन कर रहे हैं. वह एक निजी चैनल के माध्यम से अपने आन्दोलन के प्रमोशन के लिए लिटिल चैम्प कार्यक्रम में भाग लेने स्टूडियो पहुंचे और बच्चों को नैतिकता का पाठ पढाते रहे . केजरीवाल सभी को निमंत्रण देते रहे कि वे अनशन के समय अवश्य आकर गाने गाएँ. यह वह समय था जब महाराष्ट्र के किसानों के पीड़ित परिवारों को अन्ना की सांत्वना की ज़रुरत थी. मुझे लगता है कि अन्ना का यह एक नैतिक भ्रष्टाचार था जिसपर उन्होंने विचार ही नहीं किया. ऐसी स्थिति में गाँधी जी कभी भी घंटों स्टूडियो में समय बर्बाद नहीं करते. चैनल को अपने व्यवसायिक हित देखने होते हैं. वे बिगड़े हालात में अपनी टीआरपी और रेटिंग देखेंगे. अब मीडिया संवेदनहीन हो चुका है और वह जान चुका है कि टीआरपी कैसे बढ़ सकती है. अन्ना नहीं बता पाते कि वह भ्रष्टाचार को कैसे रोकेंगे? नेताओं के घरों से कैसे करोड़ों रूपयों का काला धन निकालेंगे जो विदेशी बैंकों में जमा धन स...

अन्ना हजारे का अभियान..../रंजन जैदी

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अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम में बीते हुए समय के दौरान दुनिया के कुछ खास मुल्कों में काफी उथल-पुथल रही. यह जानते हुए भी कि अमेरिका सख्त आर्थिक बोहरान से गुज़र रहा है और अभी उसे आगे भी गुज़रना होगा,, नाटो की सेना का कुछ मुल्कों में हस्तक्षेप अभी भी जारी है. भारत के अंदरूनी मामलों में अपने बयान का दखल देकर यह जता दिया है कि उसकी चौधराहट में फर्क नहीं आया है. इस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि अन्ना हजारे का आन्दोलन भ्रष्टाचार-विरोध की बैसाखी पर विपक्ष की लंगड़ी राजनीति के शतरंज की एक ऐसी चाल है जो मंदिर-मस्जिद विवाद के बाद अब चली गयी है और प्रतिपक्ष को लगता है कि इस बार ताज-तख़्त दूर नहीं है. ऐसा हो भी सकता है. योग-गुरू स्वामी रामदेव के आन्दोलन के माध्यम से देश ने कुछ समय पहले देखा भी था. यदि समझदार लोगों ने स्थिति को काबू में न कर लिया होता तो परिणाम भयानक होते जिसकी कल्पना करना आसान नहीं है. एक बार फिर चुनौतियाँ सामने हैं. मुझे कतई विश्वास नहीं है कि अन्ना हजारे देश की उन राजनीतिक पार्टियों के साथ है जो हर हाल में सत्ता पर काबिज़ होने के दांव पर दांव चल रही हैं. भ्रष्टाचा...