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Binayak Sen: India's war on men of peace by Kalpana Sharma

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by Hiba Rizvi on Wednesday, 29 December 2010 at 00:03.                                                                          More than 150 years ago, the British introduced a law in India designed to check rebellious natives. In 2010 this law has been used by an independent India to check activists who question government policy. Section 124A of the Indian penal code was introduced in 1870 by the British to deal with sedition. It was later used to convict Mahatma Gandhi. In his statement during the hearing on 23 March 1922, Gandhi said, "The section under which Mr Banker [a colleague in non-violence] and I are charged is one und...

विनायक सेन को उम्र कैद.../ शीतला सिंह

छत्तीसगढ़ में रायपुर की एक अदालत ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के उपाध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता विनायक सेन सहित नक्सल विचारक नारायण सान्याल और कोलकाता के कारोबारी पीयूष गुहा को भादवि की धारा 124 ए (राजद्रोह) और 120 बी (षडयंत्र) के तहत उम्रकैद की सजा सुनायी है। श्री सेन को 14 मई 2007 को विलासपुर में गिरफ्तार किया गया था। विनायक सेन को देश में समाज सेवा के लिए कई सम्मान मिले हैं। कई अन्य देशों में भी विश्व स्वास्थ्य मिशन आदि के लिए उन्हें कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनकी वैचारिक विरोधी रही भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें गंभीर सजा देने के लिए विशेष पैरोकारी की थी। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राज्य और सरकार दोनों को एक ही नहीं माना जा सकता। राज्य तो स्थायी व्यवस्था है, लेकिन सरकारें देश, काल और परिस्थितियों के अनुरूप आती-जाती रहती हैं। व्यवस्था चलाने के लिए इन सरकारों का विधायी अंग कानून भी बनाता है और जिसके अनुरक्षण का दायित्व स्थायी तत्व के रूप में कार्यरत कार्यपालिका के पास होता है। न्यायपालिका को भी राज्य का अंग ही माना जाता है, क्योंकि उसकी सत्ता अलग से नहीं है।...

प्रदेश का दुर्भाग्य / रंजन जैदी

अब उत्तर प्रदेश की जानता को आत्म-मंथन करना होगा. उत्तर प्रदेश का अपराधी माफिया राजनीति से निष्कासित किया जा चुका है (इसका अर्थ यह नहीं है कि उत्तर प्रदेश के क्राईम-रेट का पारा नीचे आ गया है). नयी पीढ़ी अपने प्रदेश का विकास चाहती है. उसके पास सुसंस्कृत भाषा, महान संस्कृति, परम्पराएँ, इतिहास, अद्भुत भूगोल और सोना उगलती धरती है. हर क्षेत्र में उसका महान योगदान रहा है लेकिन विगत वर्षों की अवसरवादी राजनीति, सांप्रदायिक और कबीलाई सोच, आयातित क्षेत्रीय चरमपंथिवाद तथा वैयक्तिक और जातीय संघर्ष तथा  राज्य के भ्रष्ट अक्षम नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश को काफ़ी पीछे धकेल दिया है. इसे  प्रदेश का दुर्भाग्य कहा जा सकता है. लेकिन इसके बावजूद उत्तर प्रदेश के विकास की मीटर गेज-ट्रेन का सफ़र जारी रहा.आज़ादी के बाद से लेकर मायावती के शासनकाल तक उत्तर प्रदेश ने बहुत कुछ देखा है, बहुत कुछ सहा भी है. अब विकास के नाम प़र पार्कवाद के विस्तार की आंधी चल रही है. राज्य की अनेक महत्वपूर्ण समस्याएं ठंडे बस्ते में दाब दी गयी हैं. अपराध और भ्रष्टाचार चरम प़र है. मायावती लगाम कसना चाहती हैं, लेकिन उनमें बिहार के मुख्...