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कुछ तो समझे ख़ुदा करे कोई/ज़फर नक़वी

जैसे-जैसे दिन गुज़रते जा रहे हैं वैसे-वैसे अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच का फैसला भी प्रभावहीन होता जा रहा है। सुलह और समझदारी की बातें अब सौदेबाजी, अप्रत्यक्ष धमकियों व चेतावनी के रूप में सामने आ रही हैं। यही वजह है कि सभी पक्ष न्याय की अंतिम सीढ़ी सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं, वो भी जो फैसला आने पर दिखावटी रूप से खुश हुए और वे भी जो वास्तविक रूप में निराश हुए। देर सवेर फैसले को अपनी जीत बताने वालों के कंठ में दबे हुए विचार बाहर आने लगे हैं कि हाई कोर्ट ने विवादित भूमि का जो हिस्सा बटवारा किया, वह  अनुचित और अमान्य है अर्थात फैसला आने के बाद उदारता, सहिष्णुता के साथ शांति का प्रवर्त बनने और दिखाने की जो तात्लिक होड़ शुरू हुई थी, उसकी हवा निकल चुकी है। यह बात अलग है कि सुप्रीम कोर्ट अंतिम पड़ाव होने की वजह से प्रतिक्रियाएं अभी उन्माद में परिवर्तित नहीं हुई हैं लेकिन उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव नज़दीक आते-आते इनके उन्मादी होने की प्रबल संभावनाएं नज़र आ रही हैं। भले ही राजनीति की बिसात पर यह प्रयास चारों खाने चित हो जाएं। कुल मिलाकर यही सार निकला है कि अयोध्य...

alpst-literature: दिल्ली का थीम-सांग / रंजन जैदी

alpst-literature: दिल्ली का थीम-सांग / रंजन जैदी : "दिल्ली का यह थीम-सांग दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित और उप-राज्यपाल श्री तेजेंद्र खन्ना के नाम- ..."

alpst-politics: नई तस्वीर/ranjan zaidi

alpst-politics: नई तस्वीर/ranjan zaidi : "सब तरफ विभिन्न वेबसाईट्स प़र इन दिनों बड़े ही सुनियोजित ढंग से भारतीय मुसलमानों के खिलाफ मोर्चा सा खोल दिया गया है. मेरे बेटे ने मुझसे सवाल ..."

नई तस्वीर/ranjan zaidi

सब तरफ विभिन्न वेबसाईट्स प़र इन दिनों बड़े ही सुनियोजित ढंग से भारतीय मुसलमानों के खिलाफ मोर्चा सा खोल दिया गया है. मेरे बेटे ने मुझसे सवाल किया कि पापा, मेरे अधिकतर दोस्त नान-मुस्लिम हैं और वह पूछते हैं कि इस कंट्री में हिन्दू-मुस्लिम-दुश्मनी के आलावा फंडामेंटलिस्ट कुछ और मुद्दा क्यों नहीं तलाशते, जैसे यूथ-फ्रस्ट्रेशन, बेरोज़गारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, न्युरिचक्लास की गुंडागर्दी, बाबाओं  की बढती तादाद और उनकी अकूत संपत्ति, छोटे परदे प़र गुजरात संस्कृति का थोथा प्रचार, वगैरा-वगैरा. ऐसे फंडामेंटलिस्ट लोगों को पढ़ने-लिखने का शौक़ क्यों नहीं है? इतना बेकार का टाइम यह कहाँ से ले आते है? मेरे दोस्तों को तो वक़्त ही नहीं मिलता है. न ही वे मंदिर-मस्जिद विवाद में पड़ते हैं. हमारे देश की पोलिटिक्स इतनी लिबर्टी क्यूँ दे देती है? क्या आज़ादी का मतलब यह है कि आप जिसे चाहें ज़लील करदें, गाली दे दें, उसकी कम्युनिटी के वैल्यूज़ को डेमोलिश कर दें, उससे उसका कल्चर हाईजेक कर लें? कुछ बारबेरियन मुस्लिम बादशाहों ने अगर कुछ गलत किया था तो आज हम लोग कौन सा इक्ज़ाम्प्ल पेश कर रहे हैं? आने वाली नस्लें इस दौर के ल...

मनुष्य और आतंकवाद /रंजन जैदी

मैं समझता हूँ कि उन सवालों पर विचार ही न किया जाय जो सवाल उपहासास्पद हों. जो बुद्धिमान होते हैं, वे चिंतन करते है. जो अज्ञानी हैं, वे धर्म के लेबिल लगे खाली डिब्बों की तरह हैं, जिनमें कंकड़ पड़े हुए हैं. थोडा हिलाते ही वे आवाज़ करने लगते है. वास्तविकता यह है कि धर्म जीवन जीने की एक शैली है. शैलियाँ भिन्न हो सकती है. मनुष्य को अपनी शैली से मोह हो सकता है. मोह का सम्बन्ध मायावी है. मोह की आत्मा का नाम आस्था है. आस्थाएं अडिग नहीं रहती हैं,  इसलिए  उसमें विचलन पाया जाता है.  शैलियाँ  परम्पराओं को जन्म देती हैं. परम्पराएं अच्छी-बुरी हो सकती है. इनकी स्वीकारोक्ति का आर्थिक आधार होता है. दाढ़ी रखना परंपरा में शामिल है, किन्तु यह परिस्थितिजन्य स्वीकारोक्ति की एक स्थिति है. दुनिया में सभी धर्म के लोग अपनी पहचान के अंतर्गत दाढ़ी  रखते है.  सभी न तो मुसलमान होते  हैं और न ही  आतंकवादी.   आतंकवाद के जन्म के कार...

alpst-politics: अहमद बुखारी प्रकरण/रंजन जैदी

alpst-politics: अहमद बुखारी प्रकरण/रंजन जैदी : "अहमद बुखारी को ऐसा नहीं करना चाहिए था. ऐसा व्यवहार उनके नेतृत्व की अपरिपक्वता को दर्शाता है. मरहूम शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी भी उनके इस उग..."

अहमद बुखारी प्रकरण/रंजन जैदी

अहमद बुखारी को ऐसा नहीं करना चाहिए था. ऐसा व्यवहार उनके नेतृत्व की अपरिपक्वता को दर्शाता  है. मरहूम शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी भी उनके इस उग्र स्वभाव से खुश नहीं थे. इसकी स्वीकारोक्ति उन्होंने अपने एक इंटरव्यू के दौरान मुझसे कही भी थी. तब मैं पोलिटिकल जर्नल खुशबू (हिंदी) में विशेष संवाददाता था. यह वह ज़माना था जब अहमदाबाद में साम्प्रदायिक दंगे हो चुके थे और मुझे राहुल (विज्ञापन प्रबंधक खुशबू) के साथ अहमदाबाद जाना था. क्योंकि खुशबू का राजीव गाँधी विशेषांक निकलने वाला था. उन दिनों गुजरात में कांग्रेस के मुख्यमंत्री चौधरी अमर सिंह की सरकार थी और श्री  एके दुग्गल  होम सेक्रेटरी थे.  दिल्ली प्रवास के दौरान चौधरी अमर सिंह और  मंत्री विट्ठल भाई पटेल मुझे गुजरात आने का निमंत्रण दे चुके थे.यह प्रकरण मैं यहाँ इस लिये दे रहा हूँ कि मुझे ऐसे हालात में अपने कार्यक्रम को इस लिये आगे बढ़ाना पड़ा था कि जामा मस्जिद में उन दिनों ताला डाल दिया गया था. वहां नमाज़ें बंद थीं. अधीर तिवारी खुशबू के कार्यकारी संपादक थे. उन्होंने तब मुझे बताया कि स्थिति  नाज़ुक मोड़ ले चुकी है, म...

मंदिर-मस्जिद विवाद/ज़हीर जैदी

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 Zaheer Zaidi, CP-Shia Point    अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद को देखते हुए इलाहाबाद  हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के 30 सितम्बर के  फैसले  के  खिलाफ  सुप्रीम कोर्ट  में अपील  करना  ज़रूरी  है. यह इस देश की गंगा-जमुनी संस्कृति के लिये भी ज़रूरी है. राष्ट्रीय संस्था शिया प्वाईंट से जुड़े   देश के लगभग दो करोड़ शियों की भी यही राय है. हालांकि सुन्नी वक्फ बोर्ड मस्जिद मुद्दे को सुन्नी मुसलमानों की भावनाओं के मामले से जोड़ते हुए इसे शियों से अलग रखने में ही अपनी बेहतरी मानता आया है. जबकि शियों ने इस मुद्दे को भी इस देश के अल्पसंख्यकों का मुद्दा मानकर इसे अपना पूरा समर्थन दिया. क्योंकि शिया समुदाय राष्ट्र-हित में इस मुद्दे को निबटाना चाहता है. कारण यह है कि जब दंगे होते हैं तो नुकसान खालिस सुन्नी मुसलमानों को ही नहीं होता है, शियों को भी पंक्ति में लाकर उन्हें नुकसान पहुंचाया जाता है. अवसरवादी राजनीति के ख़िलाड़ी मुहम्मद अदीब जैसे सांसद  ऐसी वैमनस्यता का भरपूर लाभ उठाते हैं. इसका एक उदाहरण ५ अगस्त, २००६ को श्रीमती सोनिया गाँधी के निवास...

युवाराज स्‍थापित करने की दिशा में..../.राखी रघुवंशी

कां ग्रेस महासचिव राहुल गांधी यूं तो राजनीति में अपने पदार्पण के समय से ही अपने विरोधियों के निशाने पर हैं। ख़ासतौर से उन विरोधी राजनैतिक दलों के निशाने पर जिनके लिए राहुल गांधी की राजनैतिक सोच व शैली घातक साबित होती प्रतीत हो रही है। पिछले दिनों अपने तीन दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे के दौरान राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व सिमी अर्थात् स्टुडेंटस इस्लामिक मूवमेंटस ऑंफ इंडिया जैसी कटटरपंथी विचारधारा रखने वाले संगठनों के लिए कांग्रेस पार्टी के दरवाज़े बंद होने जैसी स्पष्ट बात कह डाली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व उनके परिवार के सदस्यों ख़ासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को राहुल गांधी के मुंह से निकला यह ‘सदवचन’ बहुत नागवार गुज़रा। राहुल गांधी ने तो कट्टरपंथी सोच को लेकर दोनों संगठनों के नाम एक ही वाक्य में लिए थे। परंतु राहुल पर निशाना साधने वालों ने तो बस एक ही राग अलापना शुरू कर दिया कि उन्होंने आर एस एस व सिमी जैसे संगठनों की आपस में तुलना कैसे कर डाली। इस विषय को लेकर राहुल पर आक्रमण करने वालों का कहना है कि सिमी एक आतंकवादी संरक्षण प्राप्त आतंकी संगठन है तथा वह देशद्रोह के म...

तुम्हारे राम का हो ज़िक्र मेरी मस्जिद में....

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नई दिल्ली -राष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था शिया पॉइंट की आज संपन्न कोर कमिटी  की बैठक में एक मत से यह तय पाया गया कि बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्मभूमि विवाद के निपटारे के लिये मुसलिम तंजीमों को उच्चतम न्यायालय की शरण में जाना चाहिए. बैठक में शिया पॉइंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज़हीर जैदी ने कहा कि आज की परिस्थितियों के मद्देनज़र इस देश के मुसलमान इस विवाद को निपटाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मुसलमानों की नयी पीढ़ी को इस मुद्दे में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे देश के विकास में अपनी साझेदारी चाहते हैं. उन्होंने विश्वास  जताते हुए कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय अपने फैसले में विवादित भूमि मुसलमानों को दे भी देती है तो भी मुसलमान यही चाहेंगे कि विवादित भूमि राम जन्म भूमि न्यास को हिबा कर दी जाए जिससे यह प्रकरण  सदैव के लिये समाप्त किया जा सके. ज़हीर जैदी ने कहा कि यही विकल्प एक नए सेकुलर हिंदुस्तान को नयी तस्वीर दे सकेगा. उन्होंने कहा कि इस देश का बहुसंख्यक वर्ग धार्मिक तो हो सकता है, साम्प्रदायिक नहीं. उन्होंने कहा कि गेहूं में घुन, चावल में कंकण और सरसों के दानों में राई का होना एक आम बात है. ...

alpst-politics: तुम्हारे राम का हो ज़िक्र मेरी मस्जिद में....

alpst-politics: तुम्हारे राम का हो ज़िक्र मेरी मस्जिद में.... : "नई दिल्ली-राष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था शिया पॉइंट की आज संपन्न कोर कमिटी की बैठक में एक मत से यह तय पाया गया कि बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्मभूम..."

मुक़द्दमे का फैसला अगया.../ रंजन जैदी

मुक़द्दमे का फैसला अगया- सदायें दो कि मुहब्बत के शंख गूंजे हैं, अजां  सुनो तो अक़ीदत से सिर झुका लेना. अयोध्या में पसरा खौफ का सन्नाटा छट गया. भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक और सुनहरी अध्याय आ जुड़ा. अयोध्या में बनवास से राम लौटे तो पूरे देश के मुसलमानों के होठो प़र मुस्कान थिरक उठी..यह अयोध्या वासियों के भाग्य के उदय का वह उजाला था जो अब अयोध्या मे फैलकर अपने नूर की चकाचौंध से सारी दुनिया को आश्चर्यचकित कर देगा. सरयू की गुनगुनाती हुई धाराएँ अब खुश है कि इसके पानियों में अब न तो खून से सनी हुई किरपाने धुलेंगीं, न बेकुसूर ज़ख़्मी मासूम लाशें बहाई जायेंगीं. कल इस पर एक पुल ज़रूर बनेगा, जो अयोध्या को दूसरे शहरो और हिमालय से जोड़ेगा और यह नगरी हिन्दुस्तानी सभ्यता और संस्कृति का इस देश के बाशिंदों के लिये खानए-काबा बन जायगा. राम के बनवास से पहले राजा दशरथ की अयोध्या में इस्लाम नहीं था,और न ही मुसलमान. लेकिन राम के बनवास से लौटते ही युग बदल गया, राजा दशरथ चल बसे, भाई भरत ने राम की खडाव उन्हें वापस लौटा दी, अबतक अयोध्या में कलयुग आगया था. राम आस्था से ऊपर उठ चुके थे और वह घट-घट में ऐस...

alpsT-Politics: मस्जिद की लड़ाई हार भी गए तो सुप्रीम कोर्ट नहीं जा...

alpsT-Politics: मस्जिद की लड़ाई हार भी गए तो सुप्रीम कोर्ट नहीं जा... : "Thursday, September 30, 2010 अयोध्या. राम जन्म भूमि/बाबरी मस्जिद विवाद के सबसे बुजुर्ग मुद्दई मोहम्मद हाशिम अंसारी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय..."

मस्जिद की लड़ाई हार भी गए तो सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे'

Thursday, September 30, 2010 अयोध्या. राम जन्म भूमि/बाबरी मस्जिद विवाद के सबसे बुजुर्ग मुद्दई मोहम्मद हाशिम अंसारी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विशेष लखनऊ पीठ के आने वाले ऐतिहासिक फैसले से कुछ घंटे पहले कहा कि इस मसले पर चाहे जो भी  निर्णय आए,  वह उच्चतम न्यायालय नहीं जाएंगे। इस मसले को लेकर हो रही राजनीति गहमागहमी से दुखी करीब ९0 वर्षीय श्री अंसारी ने कहा कि वह उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करेंगे लेकिन यदि फैसला उनके खिलाफ आता है तो भी वह उच्चतम न्यायालय नहीं जाएंगे। श्री अंसारी ने कहा कि इस विवाद से देश को काफी नुकसान हो चुका है। वह चाहते हैं कि अब इस विवाद का समापन हो और अयोध्या देश के विकास में भागीदार बने। अयोध्या के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती से वह आहत दिखे और इसके लिए उन्होंने एक हद तक मीडिया को भी जिम्मेदार ठहराया। बाबरी मस्जिद की लड़ाई के सबसे बड़े योद्धा  की बात की जाए तो उसमें सबसे ऊपर 90 साल के बुज़ुर्ग हाशिम अंसारी का नाम आता है। अंसारी पिछले साठ साल से बाबरी मस्जिद के लिए लड़ रहे हैं लेकिन उनके लिए सबसे जरूरी है देश की शां...