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अखरोट के जंगल / रंजन ज़ैदी

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अखरोट के जंगल / रंजन ज़ैदी   ·   पब्लिक के साथ साझा किया गया रंजन ज़ैदी उस बूँद का क्या ज़िक्र करूँ जो बेहद साफ़-शफ़्फ़ाफ़ और पाकीज़गी के साथ पहाड़ की बुलंदी पर जमी बर्फ़ का दरवाज़ा लांघकर पहाड़ के गली-गलियारों से होती हुई झरने की शक्ल में घाटी में गिरते ही दरिया बन जाती है. केवल सूद उसी बूँद का ही तो नाम है जो उसके साहित्य को समुद्र-मंथन की तरफ़ ले जाने की प्रेरणा देता है. केवल सूद की रचना सलीब 'जॉब के नाटक 'जोफ़र' की तरह है जिसमें सवाल सलीब बनकर सोच के गले में फंदा बनकर रह जाता है. केवल सूद 'सलीब' के माध्यम से उस अदृश्य बौध्दिक चिंतन, आस्था और भावना की अंतर्दृष्टि की खोज करना चाहता है जिसमें सकल पदार्थों की खोज और उनके विकास की सर्वोच्च सत्ता प्रतिबिंबित होती है. जोफ़र नाटक में पूछता है 'क्या तुम सोचकर ईश्वर का पता नहीं लगा सकते? वह स्वर्ग जितना ऊंचा है, क्या तुम कर सकते हो? उसकी गहराई को तुम जान सकते हो? 'साधना' के पृष्ठ 36 पर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने आनंद को सर्वोच्च-सत्ता से जोड़कर उसके प्रकाश में घुलमिल जाने की प्रक्रिया को सामाजिक...

महाभारत युद्ध नहीं, एक युग था./ रंजन ज़ैदी

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       भाई जनार्दन मिश्र जी        मुझे अपनी प्रशंसा कभी अच्छी नहीं लगी. अतिशियोक्ति है, कारण भी हैं.          शेरलॉक होम्स (1887) ब्रिटिश लेखक और चिकित्सक आर्थर कॉनन डॉयल का क्रिएटेड फिक्श्नाईट कैरेक्टर है। आर्थर कॉनन डॉयल के लिए शेरलॉक होम्स, उनकी जासूसी कहानियों में 'लंदन के एक गुप्तचरी करने वाले बौद्धिक व कुशल मगर काल्पनिक पात्र के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं. गूगल में भी इसे दिया गया है.         कह सकते हैं कि आर्थर कॉनन डॉयल अपनी कहानियों में इस काल्पनिक पात्र को इस ढंग से अपनी कहानियों में लाते रहे मानो वह आज भी जीवित हो, उसके सामने आर्थर कॉनन डॉयल यानि मूल लेखक दूसरी पंक्ति का कोई जासूस महसूस होने लगता है. मुझे भी इस पात्र ने शुरुआतों दिनों में काफी प्रभावित किया था.        अपने शुरुआती दिनों में ही मैं आर्थर कॉनन डॉयल के उपन्यास या कहानियां, और वरिष्ठ उर्दू  कहानीकर इब्ने सफ़ी को जितना पढ़ सकता था, पढ़ा. ये दोनों महान लेखक अपने समय के प्रतीक रहे हैं. मेरठ प्रवासकाल...

महाभारत युद्ध नहीं, एक युग था./ रंजन ज़ैदी

       भाई जनार्दन मिश्र जी !        मुझे अपनी प्रशंसा कभी अच्छी नहीं लगी. यह अतिशियोक्ति है, हज़म नहीं हुयी. कारण भी हैं.          शेरलॉक होम्स (1887) ब्रिटिश लेखक और चिकित्सक आर्थर कॉनन डॉयल का क्रिएटेड फिक्श्नाईट कैरेक्टर है। आर्थर कॉनन डॉयल के लिए शेरलॉक होम्स , उनकी जासूसी कहानियों में 'लंदन के एक गुप्तचरी करने वाले बौद्धिक व कुशल मगर काल्पनिक पात्र के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं. गूगल में भी इसे दिया गया है.          कह सकते हैं कि आर्थर कॉनन डॉयल इस काल्पनिक पात्र को इस ढंग से अपनी कहानियों में लाते रहे मानो वह आज भी जीवित हो, उसके सामने आर्थर कॉनन डॉयल यानि मूल लेखक दूसरी पंक्ति का कोई जासूस महसूस होने लगता है. मुझे भी इस पात्र ने शुरुआतों दिनों में काफी प्रभावित किया था.        अपने शुरुआती दिनों में ही मैं आर्थर कॉनन डॉयल के उपन्यास या कहानियां, और वरिष्ठ उर्दू  कहानीकर इब्ने सफ़ी को जितना पढ़ सकता था, पढ़ा. ये दोनों महान लेखक अपने समय के प्रतीक रहे हैं. मेरठ प्...

प्रकृति के रहस्यों में उलझता मानवीय दर्शन /रंजन ज़ैदी

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        जी वन  अपने आप में रहस्य है. रहस्यों से भरा तो सम्पूर्ण ब्रम्हांड भी है. कम शब्दों में पारिभाषित करूँ तो कह सकता हूँ कि जीवन जैविकीय पद्धति की एक व्यस्था है जिसका सञ्चालन फुल-चार्ज्ड बैटरी से होता है. शरीर के    मिकैनिज़्म में एक इनर-डिवाइस सक्रिय रहती है. इसे हम सोल, आत्मा या रूह कहते हैं. इस आत्मा को संचालित करने वाली एक और डिवाइस मस्तिष्क की किसी कोशिका में सक्रिय रहती है. वही हमें द्वंद्व से निकालती है कि अच्छा क्या है, बुरा क्या. ऐसा करो, ऐसा न करो. रॉय सही है या नहीं! आत्मा के भीतर की आत्मा है.        प्रकृति बहुरंगी है हैं. इसलिए उसमें भेद दिखाई देते हैं. हिरन को शेर खाता है. शेर को भेड़ियों के झुण्ड खा जाते हैं. जंगल का ईको-सिस्टम ही ऐसा है. जानवर कैसा भी हो, हम उसे जानवर ही कहते हैं. सब एक.दूसरे के पूरक हैं. सबके भीतर आत्माएं हैं. जल-चर, पक्षी-पतंगे, सबका रंग भिन्न है,   स्वाद और स्वभाव में भी भिन्नता है. मनुष्य जाति और उसके समाज में भी भिन्नता है  है, श्रेणियाँ  और स्तर भिन्न हैं. उसकी शारीरिक बन...