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आजतक पर हमला /AJTAK PAR HAMLA

आजतक  पर  हमला  लोकतंत्र प़र फासीवाद का हमला है. इसकी पुरजोर भर्त्सना की जानी चाहिए. इसतरह के हमले हमें शर्मसार करते हैं. भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में जब इस तरह के हमले होने लगें तो समझ लेना चाहिए कि सब कुछ सामान्य नहीं है. हमें गहराई से पड़ताल करना चाहिए कि फासीवाद का सहारा लेकर देश की लोकतान्त्रिक अस्मिता को कौन लोग दागदार करना चाह रहे हैं? मुस्लिम दुश्मनी से कोई हल निकलने वाला नहीं है.इस्राईल की शैली को अपनाकर भारत में मुसलामानों के विरूद्ध लगातार दुष्प्रचार करते रहना भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है. अब अतिवादियों को संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर भारतीय-लोकतंत्र को मज़बूत करने की शुरुआत करनी चाहिए. विनाशकाले विपरीत बुद्धि....

ओबामा से आशाएं?/शनिवार, २० फरवरी २०१०

मैंने २३ जनवरी , 2009 के ब्लॉग में जो कुछ लिखा था , अब वही अक्षरशः सत्य होता जा रहा है। अमेरिका के ४४ वें राष्ट्रपति। बराक हुसैन ओबामा। दुनिया ने बहुत उम्मीदें लगा रखी हैं। भारत ने भी। अच्छा है , लेकिन ओबामा चाह कर भी अमेरिका की १० वर्ष आगे की उन नीतियों की लक्ष्मण रेखा लाँघ नहीं पाएंगे , जो पहले से खींच दी गयी हैं। अमेरिका अपनी आर्थिक मंदी को दूर करने के लिए किसी भी हद को पार कर सकता है। अपने वर्चस्व को बनाये रखने के लिए वह अफगानिस्तान का कब्जा नहीं छोडेगा । वह इराक के तेल का दोहन जारी रखेगा क्योंकि अब तक उसने तेल के आधुनिक रास्ते निर्मित कर लिए हैं । साम्यवादी देशों को अब वह उभरने नहीं देगा। इस्राईल की सेना के प्रभुत्त्व को कम नहीं होने देगा।वह उसके सामरिक हितों को साधने वाला देश है और अमेरिका की ३६ % इकोनोमी जूस की ...

एक फर्लांग का सफ़रनामा/रंजन जैदी

अभी पिछले दिनों मेरा लखनऊ जाना हुआ । वहां के एक पत्रकार मित्र अनुपम पाण्डे मेरे गेस्ट हाउस मुझसे मिलने आये और माया सरकार के विकासात्मक कार्यों पर चर्चा की जिसमें नए लखनऊ के विस्तार और उन पार्कों का भी ज़िक्र आया ( जिनमें काशीराम के साथ मायावती अपना पर्स लिए गेट पर खड़ी दिखाई देती हैं ) तो मायावती के हाथियों और आधुनिक मुग़ल गार्डेन को देखने की इच्छा मेरे मन में भी जागृत हो उठी । जाकर देखा । बेहद खूबसूरत । मायावती का स्याह चेहरा अच्छा नहीं लगा . मुग़ल बादशाह संगेमरमर को पसंद करते थे । बादशाहत में भी नफासत होती है , माया यही गुर नहीं समझ पाईं . पत्थर बदले , पैसा खर्च किया पर चेहरे की कालिमा लालिमा में तब्दील नहीं हो पाई । कहते हैं कि करोंड़ों रूपये फूँक दिए माया - गार्डेन के लिए , पर मायावती जनता का दिल नहीं पाईं। पुराने लखनऊ की बोसीदा इमारते वक्त के इस इन्कलाब पर बेहद उदास है । उनकी मरम्मत और देखभाल के लिए माया के पास पैसा नहीं है ।...