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फुटकर अशार

कौन से देस से आई हो, एक  परी सी लगती हो, बागे-वफ़ा की खुशबू हो, / बादे-सबा में खिलती हो/  दस्ते-हिना जैसी तुम हो. तुमको कौन भुलायेगा / चश्मे-बद्दूर, अदा दाद-तलब, अपने माँ-बाप की  ख्वाहिश की दुआ लगती हो./ मिलता है जब कोई अपना, कितना अच्छा लगता है, कितने ख्वाब महक उठते हैं, कितना प्यार उमड़ पड़ता है.

सानिया मिर्ज़ा प्रकरण

सानिया मिर्ज़ा अब अपनी रियल लाइफ की बड़ी चुनौती के संजाल में फँस गयी हैं. खेल में चुनौतियों को चैलेज किया जाता है निजी जीवन में कुछ चुनौतियाँ संजाल में जकड़  लेती हैं. सानिया इस देश की बेटी है. उसे लेकर कुछ स्वार्थी लोग अपनी रोटियां सेंकने लगे हैं. आगे और भी बहुत कुछ होगा क्योंकि यह  मामला पाकिस्तान से जुड़ा है. इसमें कांग्रेस के राजीव शुक्ल की बात को गंभीरता से लेना चाहिए.  मूलत यह सानिया के अपने  निजी जीवन का मामला है..पाकिस्तान का अतिवादी मुल्लावाद सानिया के सामने कालांतर में मुसीबतें खड़ी कर सकता है. अभी से सानिया की भावी ससुराल में पाबंदियों की हदीसें शुरू हो गयी हैं. पाकिस्तानी बहू बनते ही वह कहीं भी रहे, उसे तालिबानी अपने घेरे में लेने की कोशिश करेंगे. उसकी जान को भी खतरा हो सकता है. दूसरी बात यह है कि पाकिस्तान  कभी नहीं चाहेगा कि सानिया भारत का प्रतिनिधित्व करे. इस सम्बन्ध में भारत का रुख एकदम साफ़ है. यह सानिया का निजी मामला है. यह बात और है कि इसपर अभी बहुत सी राजनीति होनि बाकी है .अभी इसके बहाने से इस देश के मुसलमानों को अतिवादियों की निन्दाएं सहनी ...