फुटकर अशार
कौन से देस से आई हो, एक परी सी लगती हो, बागे-वफ़ा की खुशबू हो, / बादे-सबा में खिलती हो/ दस्ते-हिना जैसी तुम हो. तुमको कौन भुलायेगा / चश्मे-बद्दूर, अदा दाद-तलब, अपने माँ-बाप की ख्वाहिश की दुआ लगती हो./ मिलता है जब कोई अपना, कितना अच्छा लगता है, कितने ख्वाब महक उठते हैं, कितना प्यार उमड़ पड़ता है.