ज़मीं खा गयी आसमान कैसे-कैसे/रंजन ज़ैदी
ज़मीं खा गयी आसमान कैसे-कैसे https://alpst-poltics.blogspot.com/2023/02/blog-post_16.html जै सा कि यहाँ मौजूद तमाम अहले-क़लम इस बात की जानकारी रखते हैं कि अगर हज़ारी प्रसाद द्विवेदी महाकवि संत कबीर दास के काव्य-चिंतन के अनेक पहलुओं को बाक़ायदा हिंदी साहित्य जगत के सामने न लाये होते तो हम कबीर दास जैसे महान कालजयी कवि के साहित्य से निश्चय ही वंचित रह गये होते. वैश्विक साहित्य पर नज़र डालें तो हम ऐसे और भी अनेक महान साहित्यकारों के साहित्य की महत्ता पर चर्चा कर सकते हैं जिनके साहित्य को उनके मित्रों, शिष्यों या हितैषियों ने दुनिया के सामने पेश किया और वे कालांतर में महान विभूतियों के रूप में जाने गए. उर्दू अदब की तारीख़ में साहित्यकार व जंगे आज़ादी के सिपाही और विद्वान शिक्षाविद डॉ. अब्दुर रहमान बिजनौरी ( अलीग.) ने जब उर्दू के महान शायर मिर्ज़ा असदुल्लाह खां ‘गालिब’ के ग़ज़ल संग्रह 'दीवाने ग़ालिब' की भूमिका 'महासिने कलामे-ग़ालिब' तहरीर की तो उसके बाद ही ग़ालिब के चाहने वालों को मालूम हुआ कि ग़ालिब की शाइरी आम...