प्रोफ़ेसर बुद्धसेन शर्मा 'नीहार' नहीं रहे-2/ रंजन ज़ैदी
प्रोफ़ेसर बुद्धसेन शर्मा 'नीहार' नहीं रहे./ रंजन ज़ैदी ://alpst-poltics.blogspot.com/2022/01/blog-post_08.html ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और जब वह गुलाब बनकर नया जन्म लेने वाले हों तो मेरे गमले को ज़रूर याद रखें कि इस गमले में जो पौधा है उसकी मिट्टी में मेरा शिष्य दफ़्न है और वह भी एक नयी स्थाई क्रांति का स्वप्न देख रहा है. नीहार जी के देहावसान ने मुझे हिलाकर रख दिया है. 1977 में इस महान स्वप्न-दृष्टा से अलीगढ की एक बंद गली के आखरी छोर पर स्थित छोटे से स्कूल में मेरी भेट हुयी थी और उसे लगा था कि उसके मस्तिष्क में जन्म ले रहे भूमण्डल के ताप में मैं ही शायद किसी ज्वालामुखी का रूप लेकर उनकी स्थायी-क्रांति का विस्फोट कर सकूंगा ....और इसके बाद से ह...