संदेश

2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

'परिवर्तन आता है तो अपने साथ चुनौतियां भी लेकर आता है-कर्नल कपूर

चित्र
 'परिवर्तन आता है तो अपने साथ चुनौतियां भी लेकर आता है-कर्नल कपूर                                                                ( दाएं   से   बाएं ) :  रंजन   ज़ैदी ,  मीडिया   के   लेजेंड - मैन   कर्नल  ( रिटायर्ड )  आर .  के .  कपूर       नो एडा  (सार्क-न्यूज़):  ग्लोबल लिटेरेरी फेस्टिवल के लगातार तीनों दिन आयोजित किए गए सेमीनारों में विषय वर्तमान संदर्भों को ध्यान में रखकर चुने गए जैसे “ साहित्य: कल, आज और कल, “ सिनेमा, टेलिविजन और साहित्य: चुनौतियाँ और सीमाएं” तथा “वर्तमान संदर्भ में लेखक और पाठक की भूमिका”       इन सत्रों में देश के जाने माने साहित्यकारों ने भाग लिया जिनमें , चित्रा मुद्गल,  दिविक रमेश, विभूतिनारायण राय, रंजन जैदी और 'फौजी' धारावाहिक का निर्माण करने वाले कर्नल कपूर   और...
पाठकों से-  मेरे इस ब्लॉग का उद्देश्य है कि मैं अधिक से अधिक पाठकों तक अपनी पहुँच बना सकूँ। पाठक सीधे तौर पर भी मुझसे इस नंबर +91 9350934635 पर संपर्क कर सकते हैं -लेखक मेरे   का       
पाठकों से- अगले पड़ावों पर हम शीघ्र ही आपको दिल्ली के बारे में ऐसी दिलचस्प जानकारियां देने जा रहे हैं कि आप भी आश्चर्य-चकित रह जाएंगे, पाठक सीधे तौर पर भी मुझसे इस नंबर +91 9350934635 पर संपर्क कर सकते हैं -लेखक

मेरा दोस्त बृजेश्वर मदान/ रंजन ज़ैदी ( 2 )

चित्र
मेरा दोस्त बृजेश्वर मदान-2/ रंजन ज़ैदी  ' व र्तमान साहित्य' में बृजेश्वर मदान पर शशिभूषण द्विवेदी का संस्मरण छपा है, जिसे प्रभात रंजन की वेब ‘जानकी पुल’ ने भी साभार प्रकाशित किया है. इस संस्मरण पर मेरी प्रतिक्रिया इसलिए ज़रूरी है क्योंकि बृजेश्वर मदान हिंदी का एक प्रतिभाशाली कथाकार है और वरिष्ठ पत्रकार भी. दुर्भाग्य यह कि वह भी शुरू से ही हिंदी साहित्य के स्वार्थी व पेशेवर गुटों तथा अवसरवादी कथित मठाधीशों के अनेक पूर्वग्रहों का शिकार रहा है.  (और अब…)   नौ वें दशक के प्रारम्भ से ही समकालीन रचनाकार बेहद ज़मीन से जुड़े हुए लोग हुआ करते थे. उससे भी पहले के लोग फक्कड़ होते हुए भी बड़े दिल के लोग हुआ करते थे. एक दिन  बहुत  भूख लगी तो प्रेस एन्क्लेव के बाहर गाड़ी पार्क कर मैं सोसायटी के अंदर चला गया. ममेरे भाई का घर था, पर वहां न जाकर वरिष्ठ पत्रकार रामसेवक श्रीवास्तव जी के घर की बेल बजा दी. श्रीमती  नीलम  श्रीवास्तव बाहर  आईं तो मैं घर के अंदर। फ्रिज खोलकर देखा, शायद कुछ हो. पीछे से नीलम ने हँसते हुए बताया, 'सब कुछ है. जितनी देर में...

मेरा दोस्त बृजेश्वर मदान/ रंजन ज़ैदी

चित्र
 प्रतिभा के धनी बृजेश्वर   मदान  मेरा दोस्त   बृजेश्वर   मदान/ रंजन ज़ैदी        ' व र्तमान साहित्य ' में बृजेश्वर मदान पर शशिभूषण द्विवेदी का संस्मरण छपा है , जिसे प्रभात रंजन की वेब ‘ जानकी पुल’ ने भी साभार प्रकाशित किया है . हो सकता है औरों ने भी ऐसा किया हो . इसलिए संस्मरण पर मेरी प्रतिक्रिया इसलिए ज़रूरी है क्योंकि   बृजेश्वर   मदान   हिंदी का एक प्रतिभाशाली कथाकार है और पत्रकार भी . दुर्भाग्य से वह भी  शुरू से ही  हिंदी साहित्य के स्वार्थी व पेशेवर गुटों तथा अवसरवादी कथित मठाधीशों के अनेक पूर्वग्रहों का शिकार रहा है जैसे कभी राही मासूम रज़ा , गुलशेर अहमद खां शानी , प्रोफ़ेसर शैलेश ज़ैदी और   देवेन्द्र सत्यार्थी जैसे अनेक बड़े साहित्यकार रह चुके हैं .           शशिभूषण द्विवेदी के   संस्मरण की ओर मैं ध्यान इसलिए दिलाना चाहता हूँ कि कुछ आरोपित भ्रम कम किये जा...

सलाम है विशाल भरद्वाज को /रंजन ज़ैदी

चित्र
सलाम है विशाल भरद्वाज को /रंजन ज़ैदी बा त श्रीनगर स्थित होटल सेतूर की है . वहां के सभी जगह टीवी स्क्रीन पर श्रेया घोषाल का गाया गीत बज रहा था जिसे मैंने लिखा था ,' अब हमको आगे बढ़ना है , अपना इतिहास बदलना है .' लाबी में एक प्रकाश्य बुकलेट पर बहस चल रही थी   कि मैंने उस नेता को हाइलाइट क्यों नहीं किया जो सोनिया गांधी की होने वाली रैली में हज़ारों की भीड़ जुटाने वाला है . खुद नेता जी भी मुझे धमका रहे थे लेकिन मैं उन्हें कन्विंस कर रहा था कि मेरा काम सोनिया जी के होने वाले भाषण को हाइलाइट करना है न कि उस नेता को .           बात बढ़ी तो मैं वहां से उठकर रेडिओ श्रीनगर के उस अधिकारी के पास चला गया जो होने वाले कार्यक्रम के सम्बन्ध में तफ्सील से जानकारी जुटाना चाहता था . वहीँ मुझे लोगों की ज़बानी   ' दरद पुरा ' गाँव की तस्वीर सामने आई जहाँ ( बताया गाया कि ) सिर्फ गुर्जर मुस्लिम विधवाएं रहती है...