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alpsT-Politics: दुनिया की हर इबादतगाह की बुनियाद ज़मीन में होती है/...

ranjan. : "दुनिया की हर इबादतगाह की बुनियाद ज़मीन में होती है. उसी ज़मीन प़र बैठकर या खड़े होकर आम इंसान सिजदा करता है, पूजा-प्रार्थना करता है. ये प्रार्थ..."

दुनिया की हर इबादतगाह की बुनियाद ज़मीन में होती है/ranjan zaidi

दुनिया की हर इबादतगाह की बुनियाद ज़मीन में होती है. उसी ज़मीन प़र बैठकर या खड़े होकर आम इंसान सिजदा करता है, पूजा-प्रार्थना करता है. ये प्रार्थनाएं, आराधनायें, इबादतें, आम इन्सान अपनी और इंसानियत की भलाई और सुरक्षा के लिये करता है. कुछ लोग उसी ज़मीन प़र खड़े होकर अहंकार की तलवार और हिंसा का भाला उठा लेते हैं. ज़मीन का बटवारा कर उसपर खड़े होकर गर्व करने लगते हैं. वह भूल जाते हैं कि जिस ज़मीन प़र वे खड़े हैं, उस ज़मीन के नीचे कोई ज़मीन नहीं है. जो ज़मीन बिना ज़मीन के हवा में घूम रही है और आधारहीन है, उसे  इबादत के लिये न मंदिर की ज़रूरत है, न मस्जिद की. न गिरजे जी. न कलीसाओं की. न पंडित की, न मौलवी और पादरी की. वह जानती है कि जिस संसार को उसपर बसाया गया है, उसे जिंदा रखना है. इसी लिये वह सारी दुनिया की माँ है.लेकिन  अपने स्वार्थवश  इंसान अपनी माँ को भी बाटने लग जाता है जबकि इंसान जानता है कि वह खुद आधारहीन है. ज़मीन के टुकड़ों की जंगें शताब्दियों से लड़ी जा रही हैं. अयोध्या ने भी सैकड़ों आधारहीन जंगें देखी हैं. उसने देखा कि भगवान् कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया तो चमत्कार कहलाया, बाहुबली हनुमा...

यहां अब दलितों की सरकार है/अनिल पांडेय

दलित...यह एक ऐसा शब्द है, जो सदियों से नफरत और हिकारत का पर्याय रहा है. हजारों सालों से वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से शोषित होता आ रहा है. वह अपने वोट की ताकत से लोगों को सत्ता में पहुंचाता रहा, लेकिन खुद सत्ता से बहुत दूर, सामाज के अंतिम पायदान पर खड़ा रहा. भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार दलितों के राजनीतिक दल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ है. यहां अब दलितों की सरकार है. बसपा सरकार के शासन में दलित खुद को कितना सुरक्षित महसूस करते हैं, क्या उनके जीवन में कोई बदलाव आ रहा है...इसी का जायजा लेने द संडे इंडियन के प्रमुख संवाददाता अनिल पांडेय और फोटोग्राफर मुकुंद डे निकल पड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के देशाटन पर.... मैले-कुचैले कपड़ों में लिपटी उस पच्चीस साल की दलित विधवा सुनीता की सूरत बार-बार आखों के सामने आ जाती..वह दो बच्चों की मां थी. ऐसे बच्चे, जिनके सिर से बाप का साया उठ चुका है. दिसंबर की गुलाबी ठंड में बिना गर्म कपड़ों के वे बच्चे... "जब बाप ना बाय, तो गरम कपड़ा के दिआई???" एक मां की दुख भरी आवाज बार बार ...

alpsT-Politics: इसराइली राजदूत : दरगाह की ज़ियारत/नारायण बारेठ

alpsT-Politics: इसराइली राजदूत : दरगाह की ज़ियारत/नारायण बारेठ : "बीबीसी हिंदी संवाददाता, जयपुर, इसराइली राजदूत (चित्रः दीपक शर्मा) ऐसा पहली बार हुआ है कि इसराइल के राजदूत दरगाह की ज़ियारत करने आए हों. अज..."

इसराइली राजदूत : दरगाह की ज़ियारत/नारायण बारेठ

बीबीसी हिंदी संवाददाता, जयपुर,  इसराइली राजदूत (चित्रः दीपक शर्मा) ऐसा पहली बार हुआ है कि इसराइल के राजदूत दरगाह की ज़ियारत करने आए हों. अजमेर शरीफ़ में सूफ़ी संत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर एक अलग ही नज़ारा देखने में आया जब भारत में इसराइल के राजदूत मार्क सोफ़ेर ने वहाँ जा कर अक़ीदत के फूल पेश किए और अमन के लिए दुआ की. सदियों पुरानी इस पवित्र दरगाह में ये पहला मौक़ा था जब किसी इसराइली राजदूत ने अपनी हाज़री दी हो.खुद सेफ़ोर ने कहा कि सूफ़ीवाद की तालीम और उसूलों से पूरे जहाँ को एक धागे में पिरोया जा सकता है. सोफेर अपने साथियों के साथ अचानक दरगाह पहुंचे तो ख़ादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारियों ने उनकी अगवानी की.     एक खादिम के नाते हमने उनकी अगवानी की, ज़ियारत करवाई और मुसलमान होने के नाते हमने अपने जज़्बात से उन्हें रूबरू करवाया. सरवर चिश्ती इसराली राजदूत ने मज़ार शरीफ में चादर और अकीदत के फूल पेश किए. उस वक़्त रोज़ा इफ्तार का लम्हा आया तो दरगाह परिसर के आरकाट दालान में रोज़ेदारों ने रोज़ा खोला तो इसराइली राजदूत भी इसमें शरीक हुए. एक खादिम के मु...