ranjan.: "दुनिया की हर इबादतगाह की बुनियाद ज़मीन में होती है. उसी ज़मीन प़र बैठकर या खड़े होकर आम इंसान सिजदा करता है, पूजा-प्रार्थना करता है. ये प्रार्थ..."
पुराना किला Recent Book/ History Past: By Dr. Ranjan zaidi गाहे - गाहे बाज़ ख्वां ईं क़िस्स ए पारीनह रा। ( क़िस्सों को कभी - कभी दोहराते रहना चाहिए।) गतांक से आगे@&a ट र्किश गु़लाम ताजुद्दीन यल्दोज़ ने जब कुतुबुद्दीन को देखा तो वह उसे अपलक देखता रह गया। वह सोचने लगा ] यही वह शख्स है जिसकी तकदीर में उसकी बेटी की जन्नत लिखी हुई है। बस ] उसकी शादी होने की देर है। किस्मत ने साथ दिया ] बेटी की कुतुबुद्दीन ऐबक के साथ शादी हो गई। सितारे बदले तो कुतुबुद्दीन की बहन का विवाह सिंध के गवर्नर नासिरुद्दीन क़बाचा से तथा आगे जाकर ऐबक की अपनी बेटी की शादी बिहार के तत्कालीन गवर्नर शम्सुद्दीन अल्तमश के साथ हुई। बहनोई और दामाद दोनों ही मूलतः गुलाम वंश से सम्बंध रखते थे। ...
भाई जनार्दन मिश्र जी ! मुझे अपनी प्रशंसा कभी अच्छी नहीं लगी. यह अतिशियोक्ति है, हज़म नहीं हुयी. कारण भी हैं. शेरलॉक होम्स (1887) ब्रिटिश लेखक और चिकित्सक आर्थर कॉनन डॉयल का क्रिएटेड फिक्श्नाईट कैरेक्टर है। आर्थर कॉनन डॉयल के लिए शेरलॉक होम्स , उनकी जासूसी कहानियों में 'लंदन के एक गुप्तचरी करने वाले बौद्धिक व कुशल मगर काल्पनिक पात्र के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं. गूगल में भी इसे दिया गया है. कह सकते हैं कि आर्थर कॉनन डॉयल इस काल्पनिक पात्र को इस ढंग से अपनी कहानियों में लाते रहे मानो वह आज भी जीवित हो, उसके सामने आर्थर कॉनन डॉयल यानि मूल लेखक दूसरी पंक्ति का कोई जासूस महसूस होने लगता है. मुझे भी इस पात्र ने शुरुआतों दिनों में काफी प्रभावित किया था. अपने शुरुआती दिनों में ही मैं आर्थर कॉनन डॉयल के उपन्यास या कहानियां, और वरिष्ठ उर्दू कहानीकर इब्ने सफ़ी को जितना पढ़ सकता था, पढ़ा. ये दोनों महान लेखक अपने समय के प्रतीक रहे हैं. मेरठ प्...
ज़मीं खा गयी आसमान कैसे-कैसे https://alpst-poltics.blogspot.com/2023/02/blog-post_16.html जै सा कि यहाँ मौजूद तमाम अहले-क़लम इस बात की जानकारी रखते हैं कि अगर हज़ारी प्रसाद द्विवेदी महाकवि संत कबीर दास के काव्य-चिंतन के अनेक पहलुओं को बाक़ायदा हिंदी साहित्य जगत के सामने न लाये होते तो हम कबीर दास जैसे महान कालजयी कवि के साहित्य से निश्चय ही वंचित रह गये होते. वैश्विक साहित्य पर नज़र डालें तो हम ऐसे और भी अनेक महान साहित्यकारों के साहित्य की महत्ता पर चर्चा कर सकते हैं जिनके साहित्य को उनके मित्रों, शिष्यों या हितैषियों ने दुनिया के सामने पेश किया और वे कालांतर में महान विभूतियों के रूप में जाने गए. उर्दू अदब की तारीख़ में साहित्यकार व जंगे आज़ादी के सिपाही और विद्वान शिक्षाविद डॉ. अब्दुर रहमान बिजनौरी ( अलीग.) ने जब उर्दू के महान शायर मिर्ज़ा असदुल्लाह खां ‘गालिब’ के ग़ज़ल संग्रह 'दीवाने ग़ालिब' की भूमिका 'महासिने कलामे-ग़ालिब' तहरीर की तो उसके बाद ही ग़ालिब के चाहने वालों को मालूम हुआ कि ग़ालिब की शाइरी आम...
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