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कांग्रेस की करिश्माई ताक़त पलायन की ओर\रंजन ज़ैदी

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प्रियंका : समय कभी इंतज़ार नहीं करता. रंजन ज़ैदी:गरीबी अभिशाप है, पिकनिक नहीं. समय बदल रहा है . मनुष्य को समय के साथ चलना चाहिए. समय के साथ बहुत कुछ बदलता रहता है. धरती का भूगोल बदलता है, राजनीति का इतिहास बदलता है, हुकूमते बदलती हैं और हाकिमों की तकदीरें भी समय के साथ बदल जाती हैं. ज़ालिमों का दौर आता है तो मज़लूमों का भी. गरीब अमीर बन जाता है और अमीर गरीब. धरती घूमती रहती है. वह भी अपनी कीली पर घूमते हुए भी कभी एक जगह नहीं ठहरती  है. वह अंतरिक्ष के जिस सफ़र से गुज़रती है, उसका प्रभाव भी अपने आप में  आत्मसात करती चलती है. लेकिन धरती पर रहने वाला मानस खुद को बदलने के लिए राज़ी नहीं होता है, जबकि वह जनता है कि न वह अजेय है, न अमर. एक निश्चित समय तक उसकी यात्रा विभिन्न पड़ावों से होकर गुजरेगी. फिर सब कुछ समाप्त हो जायेगा. कांग्रेस भी अपने उत्तरार्द्ध की यात्रा पर गमन कर रही है.                                  ...

महिला हिंसा...२ /डॉ. रंजन ज़ैदी

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यह सच है कि सामाजिक परिवर्तन और विकास के चलते हमारे सामाजिक मूल्यों का भी ह्रास हुआ है. ऐसा मात्र भारत में ही हुआ हो, कहना गलत होगा. दूसरे विश्व महायुद्ध  के बाद समस्त विश्व में आमूलचूल परिवर्तन हुए. महिला हिंसा का वैश्वीकरण इस बात का ज्वलंत प्रमाण है. ढाका सम्मलेन में भी गैरी के माध्यम  इसकी ध्वनि सुनाई दी. उनके अनुसार इसका कारण पारंपरिक व्यवसायों का ह्रास, खेती के संसाधनों का संकुचन और किसानों की गरीबी  भी एक कारण माना जा सकता है. बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण परिवारों के स्थायित्व का संतुलन लगातार असंतुलित होता जा रहा है.                                 बढती ज़रूरतों के पूरा न होने और आर्थिक प्रतिस्पर्धा के कारण जन्म लेती मानसिक उदद्विग्नता महिला हिंसा को बढ़ावा दे देती है.                      ...

लगातार बढ़ती महिला हिंसा की वारदातें / डॉ. रंजन जैदी

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  डॉ. रंजन ज़ैदी (लेखक)      महिला हिंसा की वारदातें लगातार बढ़ती जा रही हैं . दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश, या देश के दूसरे भाग, महिला हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. पिछले दिनों भारत के पड़ोसी देश (बांग्लादेश) की राजधानी ढाका में भी दक्षिण एशियाई देशों के प्रतिनिधियों द्वारा भी  इस ज्वलंत समस्या पर चिंता व्यक्त की गई. यह चिंता संयुक्‍त राष्‍ट्र संगठन की विभिन्‍न एजेंसियों के परस्पर सहयोग और संवाद-समन्वय से आयोजित सम्मलेन के दौरान व्यक्त की गई थी. जिसमें जेंडर समानता और महिला हिंसा को लेकर परस्पर संवाद स्थापित किया गया और विशेष रूप से महिला हिंसा परअंकुश लगाने के विकल्पों पर अधिक बल दिया गया था. इस कार्यक्रम में भारत ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई थी. इसमें महिलाओं की समस्याओं से सम्बंधित विभिन्न विषयों पर शोध करने वाली संस्था बार्कर इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन, वाशिंगटन के गैरी बार्कर जेंडर समानता पर अपने विचार रखते हुए समाज में व्याप्त आर्थिक असमानता को प्रमुख कारण मानते हैं. निश्चय ही यह एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है. आर्थिक असमानता ने ही...