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हिंदी का एक और लेखक मर गया/रंजन जैदी

हिंदी साहित्य के प्रतिभाशाली लेखक , कवी और एक शानदार इन्सान   अमर गोस्वामी , अब इस दुनिया में नहीं रहे। वह जब थे , तो भी नहीं के बराबर ही   थे। किसी भी लेखक-पत्रकार के यहाँ मैंने उन्हें कभी नहीं देखा। हो सकता है , इसपर उनके परिवार के सदस्य प्रकाश डालें।  ये एक इबरत का मकाम हैं।        मैं जनता हूँ कि   आज कितने ही जाने-माने    कवि ,  लेखक , पत्रकार गंगा के दफ्तर में जब आते थे तो अमर गोस्वामी से मिले बगैर कमलेश्वर जी तक नहीं पहुँचते थे। गोस्वामी जी वहां सहायक संपादक हुआ करते थे। कितने फ्री-लान्सरों    का न केवल उन्होंने   मार्गदर्शन किया बल्कि गंगा में आलेख या रिपोर्टे प्रकाशित कर   उनकी आर्थिक सहायता भी की.         मेरी उनसे पहली मुलाकात लिंक-हॉउस में   हुई थी जब गंगा का दफ्तर वहां हुआ करता   था। कमलेश्वर जी ने भेंट कराते   हुए कहा था कि ये रंजन जैदी हैं , गंगा ने इनकी कहानियां प्रकाशित की हैं।         ...