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सितंबर, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

समग्र विचार मंच की वेबसाईट....../RANJAN ZAIDI

प्रिय पाठको : समग्र विचार मंच की वेबसाईट www.samagravichar.in का कार्य तेज़ी से प्रगति पर है. अगले माह इसके लोकार्पण की योजना के फलीभूत होने की संभावना है. इसी दिन   मेरी नई   पुस्तक ' स्त्री कथा , कथा अनंता ' ( प्रकाशक NBT नई दिल्ली ISBN 8123 76 809 -0) का भी लोकार्पण हो सकता है.   www.samagravichar.in के माध्यम से पाठकों को देश-की राजनीति , साहित्य , समाज , इतिहास और मीडिया के विभिन्न परिसरों में विचरने का   अवसर प्राप्त होगा। साथ ही वेबसाईट में ज्योतिष विज्ञान जैसे विषयों पर भी आपको नई व खोजपरक सामग्री उपलब्ध   कराई जाती रहेगी। अप भी अपनी रचनाएँ भेजें जिन्हें विश्वभर के पाठकों को   न केवल मंच मिलेगा बल्कि पाठकों का रिश्तों से भरा संसार भी उपलब्ध हो सकेगा। बस , कुछ ही   दिनों   बाद … । 

अमित शाह का पहला पत्ता, पहली जीत/रंजन जैदी

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टोपी - बहुल   मुस्लिम   समुदाय   निशाने   पर   चु नाव करीब हैं . टोपी - बहुल   मुस्लिम समुदाय निशाने पर है . कांग्रेस का यह परम्परावादी वोट बैंक मुलायम सिंह यादव के खाते में चला गया था . मुज़फ्फर नगर फसाद के बाद अब यह   वोट - बैंक कांग्रेस के पास लौट तो आयेगा लेकिन आधा - अधूरा। मायावती इस विकल्प के लिए बाहें फैलाये नज़र आयेंगी।   इलेक्शन के और करीब आते ही बहुत सी सियासी   तस्वीरें डीफ्यूज़ होकर भी अपना एजेंडा छुपा नहीं पाएंगीं। संग्राम मामूली नहीं होगा। तालाबों की मछलियों को गिरफ्त में लेने के लिए   टोपी - बहुल   मुस्लिम समुदाय चारे के रूप में इस्तेमाल किया जायेगा। शुरुआत मुज़फ्फर नगर के गाँव मलिक पुरा और कवाल गाँव से हो चुकी है , शामली निशाने   पर है . अलीगढ़ के कई जाट बहुल गांवों की जाट   पंचायतों ने मुस्लिम बहुल गांवों से हमेशा के   लिए व्यापारिक और सामाजिक रिश्ते तोड़   लिए हैं . ...

रोम जलता रहा, अखिलेश बंसी बजाते रहे/रंजन जैदी

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हिंसाग्रस्त मुज़फ्फरनगर इलाक़ों से अब करफ़्यु           हटाया जा  चु का है लेकिन   सीआरपीएफ़ की लगभग ७८ कम्पनियां अब भी वहां   तैनात हैं. दंगे   की   बारिश के बाद खिली   बदराई   धूप   के   मौसम में   काले   झंडों के   बीच   उत्तर   प्रदेश के   मुख्य-मंत्री ने   हिंसाग्रस्त   इलाकों का   दौरा   किया।               शामली व   मुज़फ्फरनगर   में  ( रिपोर्ट   लिखे   जाने   तक) अब भी   लगभग   ४२ हज़ार   दंगापीड़ित लोग   इलाकों   में   घिरे   हुए   हैं. उनका   देर तक   घिरे   रहना   २०१४ के   चुनाव   पर   अपना   बुरा   असर   डाल   सकता   है.   इस   नाते   केंद्र-सरकार   और   कांग्रेस   की   चिंता   को   जायज़   ठहराया   ज...