अमित शाह का पहला पत्ता, पहली जीत/रंजन जैदी
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| टोपी-बहुल मुस्लिम समुदाय निशाने पर |
चुनाव करीब हैं. टोपी-बहुल मुस्लिम समुदाय निशाने पर है.
कांग्रेस का यह परम्परावादी वोट बैंक मुलायम सिंह यादव के खाते में चला गया था. मुज़फ्फर नगर फसाद के बाद अब यह वोट-बैंक कांग्रेस के पास लौट तो आयेगा लेकिन आधा-अधूरा। मायावती इस विकल्प के लिए बाहें फैलाये नज़र आयेंगी।
इलेक्शन के और करीब आते ही बहुत सी सियासी तस्वीरें डीफ्यूज़ होकर भी अपना एजेंडा छुपा नहीं पाएंगीं। संग्राम मामूली नहीं होगा। तालाबों की मछलियों को गिरफ्त में लेने के लिए टोपी-बहुल मुस्लिम समुदाय चारे के रूप में इस्तेमाल किया जायेगा। शुरुआत मुज़फ्फर नगर के गाँव मलिक पुरा और कवाल गाँव से हो चुकी है, शामली निशाने पर है.
अलीगढ़ के कई जाट बहुल गांवों की जाट पंचायतों ने मुस्लिम बहुल गांवों से हमेशा के लिए व्यापारिक और सामाजिक रिश्ते तोड़ लिए हैं. वहां भी जाट लड़की और मुस्लिम लड़के की लव-स्टोरी आत्मसमर्पण से होकर अदालत और जाट-पंचायत के बीच खतरनाक क्लाइमेक्स तक जा पहुंची है. लड़की को अदालत ने नारी निकेतन भेज दिया है.
उत्तर प्रदेश की सरकार अपनी भावी राजनीति को ध्यान में रखते हुए अभी तक भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष देवराज सिंह के इस अमानवीय फैसले पर किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया का प्रदर्शन नहीं किया है. अलबत्ता अपने हर नाकाम होते फैसलों की मायूसी से भरी यूपी सरकार आने वाले तूफ़ान का सामना कर भी पायेगी या टोपी-बहुल मुस्लिम समुदाय को उनकी जड़ों से उखड़ता देख एक नए महा-शरणार्थी शिविर को बसाने की सियासत करती रहेगी क्योंकि उत्तर प्रदेश की सियासत की गर्म होती लोहे की सिलाखें अब अपना रंग दिखाने लगी हैं.
अमित शाह का पहला पत्ता उसे पहली जीत दिलाने में कामियाब हो चुका है. क्रमबद्ध कार्यक्रमों के अंतर्गत बीएचपी की पञ्च-कोसी परिक्रमा शुरू हो चुकी है.
सरकार और प्रशासन इसबार चाक-चौबंद है, १० सुरक्षाबल की कम्पनियाँ तैनात हैं. अखिलेश सरकार नहीं चाहेगी कि इस बार सामाजिक ताने-बाने को क्षति पहुंचे और उसकी नीयत के दामन पर दाग लगे.-Release by News feature and press media alliance.
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