नए फीनिक्स के जन्म के लिए पुराने फीनिक्स को मरना ही होता है./ -रंजन ज़ैदी
जो हो रहा है उसे होने दो. तुम उसे नहीं बदल सकते. यदि बदल सकने का तुममें साहस होता या क्षमता रंजन ज़ैदी होती तो नियति बदलाव की प्रक्रिया का नियंता तुम्हें चुनती. लेकिन उसने तुम्हें नहीं चुना. तुम मात्र एक घटना के नियंता हो. वह घटना जो रास्ते निर्मित करती है. हर रास्ते पर हर व्यक्ति सफर नहीं कर सकता. एक ही मंज़िल के अनेक रास्ते हो सकते हैं. अनेक रास्तों की विभिन्न मंज़िलें हो सकती हैं. तुमने सुना होगा, व्यक्ति एकांत में बड़बड़ाता है, 'काश मैंने उस समय यह रास्ता न चुना होता....' 'काश मैंने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सही रास्ता चुन लिया होता,' 'काश मैंने उस समय अपने आक्रोश को रोक लिया होता..' 'काश मैंने अपने माता-पिता का कहना मान लिया होता..' 'काश मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन ली होती.' काश मैं अपने भीतर के जानवर को पहचान गया होता,' 'काश मैंने अपने हमदर्दों की सलाहें म...