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दिसंबर, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नए फीनिक्स के जन्म के लिए पुराने फीनिक्स को मरना ही होता है./ -रंजन ज़ैदी

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      जो हो रहा है उसे होने दो. तुम उसे नहीं बदल सकते. यदि बदल सकने का तुममें साहस होता या क्षमता रंजन ज़ैदी     होती तो नियति बदलाव की प्रक्रिया का नियंता तुम्हें चुनती. लेकिन उसने तुम्हें नहीं चुना. तुम मात्र एक घटना के नियंता हो. वह घटना जो रास्ते निर्मित करती है.        हर रास्ते पर हर व्यक्ति सफर नहीं कर सकता. एक ही मंज़िल के अनेक रास्ते हो सकते हैं. अनेक रास्तों की विभिन्न मंज़िलें हो सकती हैं. तुमने सुना होगा, व्यक्ति एकांत में बड़बड़ाता है, 'काश मैंने उस समय यह रास्ता न चुना होता....'        'काश मैंने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सही रास्ता चुन लिया होता,'       'काश मैंने उस समय अपने आक्रोश को रोक लिया होता..'       'काश मैंने अपने माता-पिता का कहना मान लिया होता..'        'काश मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन ली होती.'         काश मैं अपने भीतर के जानवर को पहचान गया होता,'       'काश मैंने अपने हमदर्दों की सलाहें म...

NUJ(I) appeals PM for curbing attacks on mediapersons/Ras Bihari

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Ras Bihari                                                                            NUJ(I) units present memorandums to Chief Ministers, Governors and........................................ PM through local authorities in 22 states New Delhi: December 8, 2016:- In order to draw the attention of the Government of India on growing attacks on mediapersons all over the country during the last one decade and pressing upon its demand for enactment of a Journalists Protection Act, the National Union of Journalists (India) today submitted a memorandum to the Prime Minister Shri Narendra Modi at Prime Minister Office. Apart from demanding the enactment of the Journalists Protection Act, the NUJ(I) also demanded time bound resolution of various problems faced by the j...

कश्मीर o अब्दुल्ला को अंदाजा नहीं था कि उनकी अपील हुर्रियत नेताओं पर असर नहीं छोड़ेगी / -नाज़िम नक़वी

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श्री नगर (जे एंड के) हजरतबल में हुए नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकर्ताओं के बीच अपने पिता शेख़ अब्दुल्ला की फ़ारुख अब्दुल्ला ने कहा कि हमारी पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के खिलाफ नहीं है, हम भी कश्मीरियों के मौलिक अधिकारों का समर्थन करते हैं लेकिन इसे पाने के लिए गलत रास्तों पर नहीं चल सकते'. उन्होँने कहा कि अलग राह मत अपनाओ, एक हो जाओ, हम भी तुम्हारे साथ खड़े हैं.' जेकेएलएफ के फाउंडर अमानुल्लाह ख़ान. 111वीं सालगिरह पर बोलते हुए       हुर्रियत कांफ्रेंस की जड़ों  को समझने के लिए हमें 1988-89 के बीच कश्मीर की आजादी को लेकर जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट या जेकेएलएफ की सियासी सुरंगों में झांक कर देखना होगा की किस तरह से कश्मीर की बर्फीली वादियों में तत्कालीन सियासत ने गर्माहट पैदा की कि जिसने जल्दी ही आग बनकर चिनार को झुलसाना शुरू कर दिया. नतीजतन इस आग की तपिश से जहाँ एक ओर भारत झुलसा वहीं पड़ोसी पकिस्तान ने भी अपने हाथ तापने शुरू कर दिए. दुनिया ने इसे भलीभांति महसूस भी किया.       पहले जेकेएलएफ के नौजवानों ने कश्मीर की आजादी के लिए भारतीय सुरक्षा सेना से लड़ना ...

पाक-बुद्धिजीवी तारेक फतेह पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में/ Moh.Zahid

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पाक-बुद्धिजीवी तारेक फतेह पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में     सं घ और भाजपा की यह नीति रही है कि जिस धर्म या जाति का विषय हो उस मुद्दे पर उसी धर्म या जाति वाले को बचाव या आक्रमण करने के लिए आगे करता है। टीवी पैनलों या संसद में आपको सदैव मुख्तार अब्बास नकवी , शहनवाज़ हुसैन या फिर नये-नये एम जे अकबर आपको संघ की नीति का क्रियान्वयन करते दिख जाएँगे। दलित उत्पीड़न हो या दलित मुद्दे तो उदित राज , राम विलास पासवान जैसे लोग आगे किये जाएँगे। उसी समाज का एक व्यक्ति जब सामने होता है तो विषय पर चर्चा में एक लाभ यह मिलता है कि उस पर आप यह आरोप नहीं लगा सकते कि आपको इस धर्म या जाति या वर्ग की जानकारी नहीं है। यह एक प्रभावी रणनीति है और इसी नीति के तहत एक विदेशी जिसका भारत से कभी कोई संबंध नहीं है, उसे संघ ने इम्पोर्ट कर  इस्लाम और मुसलमानों पर आक्रमण कराया जा रहा है.  वह व्यक्ति इस्लाम और मुसलमानों को गाली भी देता है और एजी भड़काता है. यह व्यक्ति है  तारेक फतेह। संयोग से वही तथाकथित पाक- बुद्धिजीवी  तारेक फतेह  पंजाब विश्वविद्या...