पाक-बुद्धिजीवी तारेक फतेह पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में/ Moh.Zahid


पाक-बुद्धिजीवी तारेक फतेह पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में 
  संघ और भाजपा की यह नीति रही है कि जिस धर्म या जाति का विषय हो उस मुद्दे पर उसी धर्म या जाति वाले को बचाव या आक्रमण करने के लिए आगे करता है।
टीवी पैनलों या संसद में आपको सदैव मुख्तार अब्बास नकवी , शहनवाज़ हुसैन या फिर नये-नये एम जे अकबर आपको संघ की नीति का क्रियान्वयन करते दिख जाएँगे। दलित उत्पीड़न हो या दलित मुद्दे तो उदित राज , राम विलास पासवान जैसे लोग आगे किये जाएँगे। उसी समाज का एक व्यक्ति जब सामने होता है तो विषय पर चर्चा में एक लाभ यह मिलता है कि उस पर आप यह आरोप नहीं लगा सकते कि आपको इस धर्म या जाति या वर्ग की जानकारी नहीं है।
यह एक प्रभावी रणनीति है और इसी नीति के तहत एक विदेशी जिसका भारत से कभी कोई संबंध नहीं है, उसे संघ ने इम्पोर्ट कर  इस्लाम और मुसलमानों पर आक्रमण कराया जा रहा है.  वह व्यक्ति इस्लाम और मुसलमानों को गाली भी देता है और एजी भड़काता है. यह व्यक्ति है तारेक फतेह। संयोग से वही तथाकथित पाक- बुद्धिजीवी तारेक फतेह पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में छात्रों द्वारा पीट दिए गये।  पंजाब विश्वविद्यालय में तारेक फतेह को "बलूचिस्तान" पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था. वह शायद  भूल गये थे कि उस समय वह किसी सुरक्षित संघी समर्थित टीवी स्टूडियो में नहीं, छात्रों के बीच बैठे हैं ।
      फिज़िक्स कैन्टीन के पास बैठे छात्रों में आदतन उन्होंने सर्वप्रथम  सिख पीएचडी स्कालर गंगादीप सिंह ढिल्लन को पहले खालिस्तानी आतंकवादी कहा और फिर आगे बढ़ते हुए कारगिल (काश्मीर) के एक छात्र मुस्तफा को  पाकिस्तानी आतंकवादी कह दिया। यही नहीं, उन्होंने जब उसे 'गोरी चमड़ी वाले देशद्रोही' कहा तो वहाँ उपस्थित छात्रों ने क्रोधित होकर उन्हें पीट  दिया।  तारेक फतेह को पीटने की घटना निंदनीय ही है , देश का  मेहमान  'अतिथि देवो भवः' का हक़दार है. घटना की भर्त्सना की जा सकती है. परन्तु एक देहाती शब्द है 'पिटउर' (जो हर जगह अपनी हरकतों से पिटता है) तो पिटेगा ही.  तारेक फतेह पाकिस्तान में पिटा, सऊदी अरब में पिटा और अब भारत में भी पिटने का जोखिम उठा रहा है। ऐसी हालत में भी हमारा संस्कार हमें इसकी अनुमति नहीं देता है, मैं तारेक फतेह की पिटाई की निंदा करता हूँ।
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