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अगस्त, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अरविन्द केजरीवाल राजनीतिक परिवर्तन की आँधी है /रंजन ज़ैदी

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हो सकता है लोग विश्वास न करें, लेकिन जो स्थाई रूप से मुझे निरंतर पढ़ते आ रहे हैं, वे विश्वास कर सकते हैं कि अब तक मैंने अन्ना-आन्दोलन, विचारधारा और योजना पर जो भी लिखा है वह अक्षरशः सत्य ही सिद्ध हुआ है। 23/4/12 और उससे भी पहले मैंने अन्ना-टीम को आगाह किया था कि इस देश के युवाओं को सामाजिक-क्रांति की ज़रुरत है जिसे राजनीती के मैदान पर उतरना होगा। मैंने कहा था, केजरीवाल को समझना चाहिए कि इस देश का पढ़ा-लिखा वर्ग (युवा वर्ग सहित) उनसे उम्मीदें लगाये हुए है. उसे   बाबा रामदेव की फैक्ट्रियों के कैप्सूल नहीं , बेहतर शैक्षिक भविष्य और स्थाई रोज़गार की गारंटी चाहिए. वह हताश और निराश है , अपने माता-पिता की मंहगाई से झुकती हुई कमर और डूबती आशाओं से दुखी है. वह अपने परिवार , समाज और देश के लिए कुछ करना चाहता है लेकिन बाबाओं की महत्वकांक्षाएं  और लूट उन्हें आगे बढ़ने नहीं दे रही   है.   मैं ने यह भी लिखा था, अरविन्द केजरीवाल और साथियों   को इस वर्ग से सीधे संवाद करना होगा. युवा वर्ग , रामदेव से अपनी शुगर का इलाज नहीं कराना चाहता और न ही उसके...

टीम अन्ना में नेतृत्व का आभाव है /रंजन ज़ैदी

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अन्ना हजारे मीडिया की चकाचौंध से अभी तक उबरे नहीं हैं। उन्हें अपने लोगों ने समझा दिया है कि   अन्ना अपने दर-देहरी तक ही रहें क्योंकि वह 75 पार   कर चुके हैं और देश ने उन्हें अपना नेता मान लिया है।       यह कोई   मामूली उपलब्धि नहीं है। बुद्धिमत्ता इसमें है कि अन्ना इस सम्मान   को सही तरीके से संभाल कर सहेजें।   वह उस प्लास्टिक डोरी की जगह न लें जिसे पकड़ कर पर्वतारोही पहाड़ों पर चढ़ जाता है। उन्हें यह जान लेना चाहिए कि दुर्भाग्य से आज अपने ही देश में   महात्मा गाँधी पोलिटिकल-प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल किये जा रहे हैं। अन्ना हजारे महात्मा गाँधी नहीं बन सकते लेकिन आज की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए वह एक पोलिटिकल-प्रोडक्ट अवश्य बन सकते हैं।     टीम अन्ना ने उन्हें यह प्रोडक्ट बनने का अवसर दे दिया है लेकिन रालेगढ़ के निवासी शायद टीम अन्ना के इरादों को भांप गई है। वह   जान गई है कि मुल्कों में   इन्कलाब ऐसे नहीं आया करते। इन्कलाब के लिए ज़मीनें और फलसफे तैयार तैयार किये जाते हैं ,   योजनाओं पर दिन...

चुनाव अभी दूर हैं लेकिन प्रचार शुरू हो चुका है /डॉ. रंजन ज़ैदी

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मायावती- अन्ना की पार्टी मुझे पीएम ज़रूर बनाएगी   भारतीय जानता पार्टी के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी   ने राजनीति के शतरंजी बिसात प़र बेहद शातिराना चाल चलकर सत्ता के गलियारे में गहमागहमी पैदा करदी है .            उनके प्रचारक इस प्रचार में व्यस्त हो गए हैं कि   बीजेपी   और कांग्रेस आगामी लोकसभा के चुनाव में सरकार नहीं बना पायेगी और न ही तीसरा फ्रंट .   बीजेपी की आतंरिक कलह   अडवानी को सत्ता के शीर्ष प़र नहीं पहुँचने दे गी और गुजरात में नरेन्द्र मोदी का सितारा डूबने के करीब है .  तब चाल यह समझ में आई कि गैर कांग्रेसी और गैर भाजपाई नेतृत्व का इशारा किसकी ओर है और उससे भविष्य के रिश्ते कैसे बन सकते हैं . इस रणनीति में राजनीतिक लड़ाई के दौरान इस्तेमाल किया   गया यह चिंतन एक ऐसा सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक ड्रोन है जो अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर सही सलामत घर लौट आयेगा...