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Octavio Paz  की दो Touch  My hands, Open the curtains of your being Clothe in a further nudity Uncover the bodies of your body My hands  lnvent another body for your body पाठकों से- ब्लॉग पर यह मेरा पहला प्रयोग है. मेरा उद्देश्य है कि मैं अपने कार्य के माध्यम से अधिक से अधिक पाठकों तक अपनी पहुँच बना सकूँ। अगले पड़ावों पर हम शीघ्र ही आपको दिल्ली के बारे में ऐसी दिलचस्प जानकारियां देने जा रहे हैं कि आप भी आश्चर्य-चकित रह जाएंगे, शर्त यही है कि इस पुस्तक की हर कड़ी को आप पढ़ना न भूलें। पाठक सीधे तौर पर भी मुझसे इस नंबर +91 9350934635 पर संपर्क कर सकते हैं -लेखक       कi   

समय की वकालत करता एक और कबीर: नीरज/-रंजन ज़ैदी

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समय की वकालत करता एक और कबीर: नीरज     एक ऐसा कवि, गीतकार, शायिर जिसे दुनिया 'नीरज' और दुनिया भर का अदब 'गोपाल दास नीरज' के नाम से जानता है, और जिसके बारे में उर्दू शायिर अहमद रईस का यह शेर तस्वीर उतारता महसूस होता है कि,'लफ्ज़ ही खुशबू, गहने ज़ेवर, सरमाया, / लफ्ज़ चमकते दिल पर लिखना, लिखते रहना......' अच्छा लगता है.        नीरज भी शायद हम जैसों को इस सोच की लकीर के उस सिरे का कवि लगता है जहाँ शून्य के सिवा और कुछ नज़र नहीं आता लेकिन ध्यान से देखने पर वही शून्य ब्रम्हांड का रूप लेता नज़र आने लगता है जिसमें जीवन भी है, दर्शन भी, दार्शनिक अंतर्दृष्टि भी है और संभावनाओं  के  पुलसरात भी.         दार्शनिक अंतर्दृष्टि जो मनुष्य को उसके होने का अहसास करा सके, अपनी भावनाओं की दुर्लभ संवेदनशीलता के तत्वों का सम्मिश्रण कर उसे अपने नज़रिए से देख और परख सके, उसे स्वर दे सके, धरती को छंदीय गेयता प्रदान कर सके, ताकि जीवन भी गतिशील बना रह सके और भावी पीढ़ियों को वह स्वयं भी गतिशील समय के हर छोर पर अपने गीतों, ग़ज़लों, दोह...