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अत्यंत दुखद समाचार /रंजन ज़ैदी

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      ए नबीटी के भाई दीपक गुप्ता के समाचार से पता चला कि कादम्बिनी और साप्ताहिक हिंदुस्तान का प्रकाशन अब लगभग बंद कर दिया गया है. एक धक्का सा लगना स्वाभाविक था.  ऐसा लगा जैसे मेरे ही घर में दो बड़े जिस्मों का अवसान हो गया हो.        इसी बिग-हॉउस से ही तो मैंने अपने जीवन के संघर्ष की शुरुआत की थी. तब के दिनों में कितना कुछ लिखा होगा मैंने. कितनी यादें जुड़ी हुयी हैं इस बिग-हॉउस से. शायद एक किताब की शक्ल में आये कभी.  आज भी जब विश्राम वाचस्पति या उस बिग-हॉउस के मित्रों से सीधे या फेसबुक पर संपर्क होता है, तो ऐसा लगता है मानो मैं विदेश में हूँ और वहां मेरा कोई देश से आया मेहमान मिल गया हो.        कितना आनंदित हो जाता हूँ मैं. उन दिनों के लोग कितना स्नेह करते थे. स्वर्गीय दुर्गा प्रसाद शुक्ल से जब भी हम मिलते, कादम्बिनी का एक नया असाइनमेंट मिल जाता. मानो, वही मेरी नियति थी. स्वर्गीय राजेंद्र अवस्थी जी तो गॉड-फ़ादर जैसे थे, लेकिन ग़ज़ब के दोस्त भी थे. परिवार के एक सदस्य की तरह मैं उनके घर जाता था.      ...

सुशांत सिंह राजपूत को इन्साफ....?/डॉ. ज़ैदी ज़ुहैर अहमद

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 सुशांत सिंह राजपूत: उदासियों के बीच  सु शांत सिंह राजपूत के केस पर अब सीबीआई जांच कर रही है .  न तो हमें उसे निर्देशित करना चाहिए न ही   उस पर किसी भी तरह का दबाव डालना चाहिए . लेकिन हमें निरंतर घट रही घटनाओं पर तेज़ नज़र ज़रूर रखना चाहिए क्योंकि घटना का शिकार होने वाला बॉलीवुड का   एक प्रतिभाशाली अभिनेता था . वह   परवीन बॉबी   नहीं था जैसा कि बॉलीवुड के निदेशक   मुकेश भट्ट   ( महेश भट्ट के भाई )  ने एक टीवी बाइट में कहा था .        परवीन बॉबी   का सम्बन्ध भी   महेश भट्ट   से रहा था . वह कहानी मैं यहां दोहराना नहीं चाहता . ज़िक्र इसलिए है कि अभनेत्री   रिया चटर्जी   अपने   कथित गॉड - फादर   महेश भट्ट   के बहुत क़रीब रही है .        सीबीआई की जांच से खुलासा हो सकता है . सवाल जो महत्वपूर्ण हैं , और जिन पर मैं पहले भी लिख चुका हूँ क्या विवा...

मनुष्य को अहंकार से बचना चाहिए/ रंजन ज़ैदी

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      ह म नहीं जानते कि रात का बारीक पर्दा चाँद और सूरज को कैसे ढांप लेता है. विज्ञान कहता है कि धरती घूमती है. हम नहीं जानते कि धरती, सूरज, चाँद और सितारे ब्रह्माण्ड में एक विशेष फासले पर कैसे लटके हुए घूमते रहते हैं.        विज्ञान बताता है कि यह गुरुत्वाकर्षण है.  इसके आगे न बूझे जाने वाले  अनेकानेक सवाल  हैं, जिनके उत्तर क़ुरआन देता है, इससे पहले वेद, बाईबिल, इंजील और तौरेत भी जवाब देते रहे हैं.  क़ुरआन और आगे के रहस्योद्घाटन कर पुष्टि करता है लेकिन हम में बहुत अहंकार है कि सत्य को सत्य नहीं कह सकते. मूर्खता के साथ आडम्बरों में उलझे रहते हैं. जो इस मर्म को समझते हैं वे सितारों  की   चालों को पकड़ लेते हैं. क़ुरआन ने ऐसे विद्वानों को 'सितारापरस्त' कहा है. यही सितारापरस्त ज्योतिषी या ज्योतिषचार्य कहे जाते हैं.          सत्य अपने विभिन्न रूपों में करोणों वर्षों से गर्दिश कर रहा है. मूर्ख यही बात नहीं समझ पाते कि समय किसी को भी एक सीमित मुद्दत के बाद जीवित रहने की अनुमति नही...