सुशांत सिंह राजपूत को इन्साफ....?/डॉ. ज़ैदी ज़ुहैर अहमद
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| सुशांत सिंह राजपूत: उदासियों के बीच |
परवीन बॉबी का सम्बन्ध भी महेश भट्ट से रहा था. वह कहानी मैं यहां दोहराना नहीं चाहता. ज़िक्र इसलिए है कि अभनेत्री रिया चटर्जी अपने कथित गॉड-फादर महेश भट्ट के बहुत क़रीब रही है.
सीबीआई की जांच से खुलासा हो सकता है. सवाल जो महत्वपूर्ण हैं, और जिन पर मैं पहले भी लिख चुका हूँ
, उनमें अवाम यह जानना चाहेंगे कि * सुशांत सिंह राजपूत की पहली टीवी अभिनेत्री लोखंडे से उसका ब्रेकअप किन कारणों से हुआ था?
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| क्या विवाद में सारा भी है? |
*अभिनेत्री सारा खान (जिसने सुशांत सिंह राजपूत पर (उसी के अनुसार) दो करोड़ रुपये क्यों खर्च किये थे, क्या वह उससे प्रेम करने लगी थी? क्या यही बात रिया को बुरी लगती रही थी?
* महेश भट्ट, रिया के बचाव में क्यों आये? उनसे पता किया जाना चाहिए कि किस तरह की खिचड़ी देग़ पर चढ़ रही थी?
* सुशांत के पूर्व स्टाफ़ से पूछ-तांछ होनी चाहिए कि रिया के साथ उसके और उसके भाई के दोस्तों का आना-जाना कब-कब होता रहा है?
* उसके भाई का फ्रैंड्स-सर्कल कैसा है? वह महीने में कितनी पार्टियों में शिरकत करता है? उसकी आय के स्रोत, बैंक के खाते, बैंकों में जमा-निकाली गयी धनराशि, धनराशि के विकल्प, खर्च के साधन. चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा, लैपटॉप, फोन के ब्योरे, पासपोर्ट से सम्बंधित जानकारियां।
*इसी तरह रिया के पिता, माता और नौकरों से भी कड़ी पूछतांछ की चाहिए.
* जब जब रिया रात को बंगलो में आई, उसका ड्राइवर कौन होता था? आने का समय? ड्रिंक की स्थिति और सुशांत के साथ का सामंजस्य कैसा महसूस होता था?
*डेडबॉडी की प्राथमिक-स्थिति क्या थी ? (जब कोई फँसी के रूप में आत्म-हत्या करता है तब ऑंखें और जीभ बाहर निकल आती हैं और बैक-नेक ऊपर सरक जाती है जिससे चेहरा आगे की ओर झुक जाता है. दम घुटने की छटपटाहट से पैर हवा में झूलने लगते हैं, दोनों मुट्ठियों में रस्सी या रस्सी जैसी वास्तु पर निशान आ जाते हैं. क्या पोस्टमार्टम में कुछ पता चला.?
* क्या कमरे से वह स्टूल, कुर्सी बरामद हुई जिस पर चढ़कर सुशांत ने फन्दा लगाया होगा. गले में फन्दा किस तरह से लगाया गया?
*नए स्टाफ की भूमिका संदिग्ध लग रही है. उससे कड़ी पूछतांछ ज़रूरी है.
सुशांत सिंह राजपूत के मांमले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला मील का पत्थर बनेगा. सीबीआई के सामने फिर से एक नई और बड़ी ज़िम्मेदारी का सामना है जिसमें उसे साबित करना होगा कि लोकतंत्र में विश्वसनीय न्याय-व्यवस्था सर्वोपरि है. इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र की पुलिस की हताशा समझी जा सकती है लेकिन सब जानते हैं कि वहां की पुलिस काफी दबंग है और श्रेष्ठ भी. सीबीआई को शायद निराशा न हो. उसके सहयोग से सुशांत सिंह राजपूत को इन्साफ मिलना तय है. (जारी... -/3 )
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