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'अमादुस्सादात' में पानीपत के अंतिम युद्ध का महत्वपूर्ण वर्णन /Ranjan Zaidi

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विशेष                                                             पानीपत   का अंतिम युद्ध साधारण नहीं था                                                                                                                 रंजन ज़ैदी        इ तिहास की परतें खोलें तो कुछ राज़ स्वतःही  सामने आ जायेंगे. उत्तर प्रदेश का एक शहर है रायबरेली. कभी, उसके  तत्कालीन फ़ारसी के विद्वान सैयद ग़ुलाम अली नक़वी (वल्द सैयद हकीम मुहम्मद अकमल खां ) जो शाहआलम (बादशाह दिल्ली)  के निजी हकीम और वलीअहदे-सल्तनत अकबर सानी की सल्तनत में मुख़्तार-ए-कारी थे, ...

@हिंदी के मुस्लिम साहित्यकार /नासिरा शर्मा : हिन्दी साहित्य का तनावर दरख़्त /अब्दुल ग़फ़्फ़ार

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@हिंदी के मुस्लिम साहित्यकार  https://alpst-poltics.blogspot.com/2022/05/blog-post.html -- आलेख - अब्दुल ग़फ़्फ़ार    < gaffar607@gmail.com > आलेख - हिन्दी साहित्य का तनावर दरख़्त : अब्दुल ग़फ़्फ़ार जिसकी जड़ें हिन्दुस्तानी संस्कृति में काफ़ी दूर तक फैली हुई हैं             हि न्दी साहित्य का दायरा वसीअ करने वाली हिन्दी की सुविख्यात साहित्यकार मोहतरमा नासिरा शर्मा जी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित होने वाली पहली मुसलमान महिला लेखिका हैं। कहानी, अफ़साने, नाटक, उपन्यास, रिपोर्ताज़, बाल साहित्य, कविताएं, नज़्में, संपादन, अनुवाद, निबंध, आलेख, कथा-पटकथा-संवाद जैसी विभिन्न विधाओं पर क़लम चलाने वाली नासिरा शर्माजी विनम्रता की प्रतिमूर्ति बनी एक फलदार दरख़्त की मानिंद झुकी नज़र आती हैं। इस उम्र में भी वो  साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने की निरंतर कोशिशें करती रहती हैं। अपने जीवनकाल में ही किवदंती बन चुकी नासिरा शर्मा जी हम जैसे नए लेखकों के लिए पथप्रदर्शक का काम कर रही हैं।  ...

जन्म-दिवस पर विशेष: 'सुलगते है तेरी यादों के बन' / डॉ.रंजन ज़ैदी

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डॉ.रंजन ज़ैदी https://alpst-poltics.blogspot.com/2022/03/blogpost_14.html    सै यद मासूम रज़ा आब्दी वल्द सैयद बशीर हसन आब्दी, साकिन गंगोली ज़िला ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश। राही का जन्म सितम्बर, 1927 को उनके नानीहाल बघुंही, में हुआ था।  बघुंही, पारा और नुनेहरा नामक क़स्बों के पास बसा हुआ पूर्वी उत्तर प्रदेश ज़िला ग़ाज़ीपुर का एक छोटा सा गांव है। उनका दादीहाल गंगोली में है, यानी ग़ाज़ीपुर से लगभग 12-14 मील दूर।              कहते हैं कि उस गांव का नाम वहां के एक राजा गंग के नाम पर रखा गया था। मासूम रज़ा की दादी राजा मुनीर हसन की बहन थीं। ढेकमा - बिजौली में उनका निकाह एक दुहाजू व्यक्ति के साथ हुआ लेकिन वह कभी अपनी ससुराल में नहीं रहीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने पति के साथ मायके में ही गुज़ार दिया। उनके पति अपने जीवन के आखिरी दिनों में मानसिक रोंग से पीड़ित हो गये थे और एक दिन एक गढ़े में गिरते ही उनकी मृत्यु हो गई थी।      ...