सानिया मिर्ज़ा प्रकरण
सानिया मिर्ज़ा अब अपनी रियल लाइफ की बड़ी चुनौती के संजाल में फँस गयी हैं. खेल में चुनौतियों को चैलेज किया जाता है निजी जीवन में कुछ चुनौतियाँ संजाल में जकड़ लेती हैं. सानिया इस देश की बेटी है. उसे लेकर कुछ स्वार्थी लोग अपनी रोटियां सेंकने लगे हैं. आगे और भी बहुत कुछ होगा क्योंकि यह मामला पाकिस्तान से जुड़ा है. इसमें कांग्रेस के राजीव शुक्ल की बात को गंभीरता से लेना चाहिए. मूलत यह सानिया के अपने निजी जीवन का मामला है..पाकिस्तान का अतिवादी मुल्लावाद सानिया के सामने कालांतर में मुसीबतें खड़ी कर सकता है. अभी से सानिया की भावी ससुराल में पाबंदियों की हदीसें शुरू हो गयी हैं. पाकिस्तानी बहू बनते ही वह कहीं भी रहे, उसे तालिबानी अपने घेरे में लेने की कोशिश करेंगे. उसकी जान को भी खतरा हो सकता है. दूसरी बात यह है कि पाकिस्तान कभी नहीं चाहेगा कि सानिया भारत का प्रतिनिधित्व करे. इस सम्बन्ध में भारत का रुख एकदम साफ़ है. यह सानिया का निजी मामला है. यह बात और है कि इसपर अभी बहुत सी राजनीति होनि बाकी है .अभी इसके बहाने से इस देश के मुसलमानों को अतिवादियों की निन्दाएं सहनी पड़ेंगीं . उन्हें फिर से गद्दार कहा जायेगा. शिवसेना ने शुरूआत कर ही दी है. अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पेंटर मकबूल फ़िदा हुसैन को भारत छोड़ना पड़ा है.शाहरुख़ खान प्रकरण से सारी दुनिया परिचित हो चुकी है. भारतीय लड़कियों की शादियाँ एनाराई लड़कों से होती ही रहती हैं, किन्तु पाकिस्तान से हमारे सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं.हालाँकि इसके बावजूद प्रति वर्ष इंडो-पाक के दरमियान ६०-७० शादियाँ संपन्न हो जाती हैं.जिनका हमें पता भी नहीं चलता.सानिया को शादी से पहले सब सोचना चाहिए था.क्योंकि उसके साथ भारतीय संवेदनाएं जुडी हुई हैं, वह भारत का गौरव है.सानिया ने इसका ख्याल नहीं रखा. इश्क में ऐसा हो जाता है. इश्क का न तो कोई मज़हब होता है, न उसकी कोई सरहद ही होती है.सरहदों का कोई मज़हब होता भी नहीं है.हीर ने चनाब को पार कर लिया.अब शादी होगी. यदि शादी होती है तो सानिया को अनेक चुनौतियों का सामना करना होगा.शादी को रोकने के अनेक नाटक भी होंगे. कानूनी अडचनें भी आयेंगीं. इस सम्बन्ध में सानिया के माता-पिता और घर के बुजुर्गों को पुनः नये हालात और बनते बिगड़ते समीकरणों क़ी समझदारी से समीक्षा कर निर्णय लेना होगा.
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