अन्ना हजारे का आन्दोलन....२/ रंजन जैदी
लोकपाल बिल को लेकर अन्ना हजारे का आन्दोलन...दिल्ली में हो रहा है. महाराष्ट्र में वहां के किसान आन्दोलन कर रहे हैं. पुलिस फायरिंग में मौतें भी हुई हैं लेकिन अन्ना को इससे गरज नहीं है. किसान आन्दोलन कर रहे हैं.
वह एक निजी चैनल के माध्यम से अपने आन्दोलन के प्रमोशन के लिए लिटिल चैम्प कार्यक्रम में भाग लेने स्टूडियो पहुंचे और बच्चों को नैतिकता का पाठ पढाते रहे . केजरीवाल सभी को निमंत्रण देते रहे कि वे अनशन के समय अवश्य आकर गाने गाएँ. यह वह समय था जब महाराष्ट्र के किसानों के पीड़ित परिवारों को अन्ना की सांत्वना की ज़रुरत थी.
मुझे लगता है कि अन्ना का यह एक नैतिक भ्रष्टाचार था जिसपर उन्होंने विचार ही नहीं किया. ऐसी स्थिति में गाँधी जी कभी भी घंटों स्टूडियो में समय बर्बाद नहीं करते.
चैनल को अपने व्यवसायिक हित देखने होते हैं. वे बिगड़े हालात में अपनी टीआरपी और रेटिंग देखेंगे. अब मीडिया संवेदनहीन हो चुका है और वह जान चुका है कि टीआरपी कैसे बढ़ सकती है.
अन्ना नहीं बता पाते कि वह भ्रष्टाचार को कैसे रोकेंगे?
नेताओं के घरों से कैसे करोड़ों रूपयों का काला धन निकालेंगे जो विदेशी बैंकों में जमा धन से भी हजारों गुना अधिक है?
कैसे भ्रष्ट नेताओं पर लगाम लगायेंगे जो आज बहुत सी सुविधाएँ मांग रहे हैं? जो समाज की नाकारा जेनरेशन का प्रतिनिधित्व करते है और सत्ता में आने पर उस IFS, IAS. IPS. जैसे प्रशासनिक अधिकारियों के गलों में अनुशासन के पट्टे डाल देते हैं जो खुद को गलाकर डिग्रियां हासिल कर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं.
नेताओं के लिए कोई परीक्षा या प्रशिक्षण नहीं है. उसे तो ठीक से बोलना भी नहीं आता है लेकिन मूलतः वही प्रशासक बन जाता है.
भ्रष्टाचार यहीं से शुरू होता है. भीड़ जुटाने की लिए दलालों का सहारा लेना, छोट-बड़े व्यापारियों से चुनाओं में खर्च करने के लिए चंदा लेना, सत्ता में आने पर उन्हें सुविधाएँ उपलब्ध कराना, अपराधियों को शरण देकर पुलिस प्रशासन पर दबाव डालना अन्ना कैसे रोक पाएंगे?
भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं और उसके तने इतने मोटे और कद्दावर हैं कि उन्हें काटना आसान नहीं होगा. जब अमेरिका में राष्ट्रपति केनेडी के लिए लासवेगास में अंतर्राष्ट्रीय तस्कर सिर दर्द बन गए तो उन्होंने उनके सफाए का अभियान शुरू कर दिया. लेकिन फिर एक दिन केनेडी ही मार दिए गए. लासवेगास में केसिनोवा की बादशाहत फिर कायम हो गई.
अन्ना को अपने आपसे सवाल करना चाहिए कि वे कौन से कारण हैं कि इस देश का बुद्धिजीवी राजनीति और राजनीतिक दलों से भागने की कोशिश करता है, क्यों?
समस्या गंभीर है, लेकिन है. अन्ना को नए सिरे से आत्ममंथन की ज़रूरत है.
لوک پال بل کے حوالے سے انا ہزارے کا تحریک... دہلی میں ہو رہا ہے. مہاراشٹر میں وہاں کے کسان تحریک کر رہے ہیں. پولیس فائرنگ میں اموات بھی ہوئی ہیں لیکن انا کو اس سے غرض نہیں ہے.
وہ ایک نجی چینل کے ذریعے سے اپنے تحریک کے پروموشن کے لئے لٹل چےمپ پروگرام میں حصہ لینے اسٹوڈیو پہنچے اور بچوں کو اخلاقیات کا سبق پڈھاتے رہے. كےجريوال تمام کو دعوت دیتے رہے کہ وہ انشن وقت ضرور آ کر نغمے گاے. یہ وہ وقت تھا جب مہاراشٹر کے کسانوں کے متاثرین کے خاندانوں کو انا کی تسلی کی ضرورت تھی.
مجھے لگتا ہے کہ انا کا یہ ایک اخلاقی بدعنوانی تھا جس پر انہوں نے غور ہی نہیں کیا. ایسی حالت میں گاندھی جی کبھی بھی گھنٹوں سٹوڈیو میں وقت ضائع نہیں کرتے.
چینل کو اپنے تجارتی مفادات دیکھنے ہوتے ہیں. وہ بگڑے حالات میں اپنی ٹيارپي اور درجہ بندی دیکھیں گے. اب میڈیا سوےدنهين ہو چکا ہے اور وہ جان چکا ہے کہ ٹيارپي کیسے بڑھ سکتی ہے.
انا نہیں بتا پاتے کہ وہ بدعنوانی کو کیسے روكےگے؟
لیڈروں کے گھروں سے کیسے کروڑوں روپیوں کا سیاہ رقم نکالیں جو غیر ملکی بینکوں میں جمع رقم سے بھی ہزاروں گنا زیادہ ہے؟
کیسے بدعنوان لیڈروں پر لگام لگائیں گے جو آج بہت سی خصوصیات مانگ رہے ہیں؟ جو سماج کی ناكارا جےنرےشن کی نمائندگی کرتے ہیں اور اقتدار میں آنے پر اس IFS ، IAS. IPS. جیسے انتظامی افسران کے گلو میں ڈسپلن کے لیز ڈال دیتے ہیں جو خود کو گلاكر ڈگريا حاصل کر تربیت حاصل کرتے ہیں.
لیڈروں کے لئے کوئی امتحان یا تربیت نہیں ہے. اسے تو ٹھیک سے بولنا بھی نہیں آتا ہے لیکن بنیادی طور پر وہی منتظم بن جاتا ہے.
بدعنوانی یہیں سے شروع ہوتا ہے. بھیڑ جمع کرنے کی لئے دلالوں کا سہارا لینا ، چھوٹ -- بڑے تاجروں سے چناو میں خرچ کرنے کے لئے چندہ لینا ، اقتدار میں آنے پر انہیں خصوصیات مہیا کرانا ، مجرموں کو پناہ دے کر پولیس انتظامیہ پر دباؤ ڈالنا انا کیسے روک سکیں گے؟
بدعنوانی کی جڑیں بہت گہری ہیں اور اس کے تنے اتنے موٹے اور كدداور ہیں کہ انہیں کاٹنا آسان نہیں ہوگا. جب امریکہ میں صدر کینیڈی کے لئے لاسوےگاس میں بین الاقوامی اسمگلر سر درد بن گئے تو انہوں نے ان کے سپھاے کی مہم شروع کر دیا. لیکن پھر ایک دن کینیڈی ہی مار دیئے گئے. لاسوےگاس میں كےسنووا کی بادشاہت پھر قائم ہو گئی.
انا کو اپنے آپ سے سوال کرنا چاہئے کہ وہ کون سے وجوہات ہیں کہ اس ملک کا دانشور سیاست اور سیاسی جماعتوں سے بھاگنے کی کوشش کرتا ہے ، کیوں؟
مسئلہ سنگین ہے ، لیکن ہے. انا کو نئے سرے سے اتممتھن کی ضرورت ہے.
राजनीति, मानव-समाज को उसी के बनाये हुए संविधान के तहत अनुशासित रखने, उसे व्यवस्थित कर अगली पीढ़ियों को बेहतर संस्कार, भ्रातृत्व-प्रेम, सौहार्द, इतिहास, संस्कृति, प्रगतिशील विचारधारा और संवैधानिक अधिकार देने तथा परस्पर जीने के अधिकारों की सुरक्षा करने की सुसंस्कृत और परिस्थितिकीय चिंतन-धारा है. और...alpsankhyaktimes-II.blogspot.com इस चिंतन की सम्पूर्ण अभिव्यक्ति. आपका इस मंच प़र स्वागत है..

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