पत्र, योगी आदित्यनाथ के नाम/--रंजन ज़ैदी
Letter to MP Yogi Adityanath) उदहारण बहुत हैं लेकिन…?
मान्यवर!
मेरी तुमसे कोई निजी दुश्मनी नहीं है. तुम क्यों भगवा-वस्त्र धारण कर चुके हो, मैं उस रहस्य में नहीं जाना चाहता। मैं वैसे भी साधु-संतों का बहुत सम्मान करता आया हूँ और अनेक बड़े संतों के साथ मेरे अंतरंग संबंध भी हैं. कोई भी साधु-संत व्यक्तिगत रूप से देश में घृणा की राजनीति पसंद नहीं करता है. हाँ, अपने धर्म की रक्षा, प्रशासनिक वर्चस्व, आर्थिक मज़बूती और आज़ादी उनको भी पसंद है. वे साधु-संत मुसलमानों के कोलोनियन-कल्चर के साथ भेदभाव नहीं करना चाहते. वे साधु-संत यह भी जानते हैं कि देश की सारी समस्याएं कभी भी एकसाथ ख़त्म नहीं हो सकतीं, मुस्लिम समुदाय साथ रहे या न रहे.
बंधुवर!
तुम्हारा कहना है कि हिंसा व यौन-अपराध वहीं अधिक पनपते हैं जहाँ मुस्लिम कालोनियां अधिक होती हैं, गावों, बस्तियों और शहरों में जहां हिन्दू-मुसलमानों की जनसँख्या में संतुलन नहीं है. कश्मीर पर मैं फ़िलहाल कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन क्या यह आरोप औचित्यपूर्ण है? क्या मुसलमान वास्तव में नफरत के योग्य है?
यदि ऐसा है तो हिन्दू लड़कियां मुस्लिम लड़कों से प्रेम-विवाह क्यों करती हैं? क्यों मात्र एक प्रतिशत हिन्दू लड़के मुस्लिम लड़कियों से विवाह करते हैं, बाद में उसे भी छोड़ देते हैं? जबकि मुस्लिम युवक 90 प्रतिशत हिन्दू लड़कियों से विवाहकर सुखी जीवन बिताते हैं, कोई तलाक़ नहीं होता है, नाम भी नहीं बदले जाते, धर्म की आज़ादी बरक़रार रहती है. दहेज़ व घरेलू-हिंसा की कोई भी वारदात सामने नहीं आती है जबकि हिन्दू परिवारों में ऐसा नहीं है.
बताओ योगी आदित्यनाथ, मेरा सवाल है कि महाभारत के युद्ध से पूर्व 'द्रोपदी को जुंएँ में कौन हारा था?'
बताओ, महाभारत के युद्ध से पूर्व द्रोपदी-चीर हरण किसने किया था?
बताओ, महाभारत के युद्ध के समय इस देश में कितने मुस्लिम थे?
भरत को राज सिंहासन पर बिठाने और राम को बनवास पर भेजने की चाल किस पंचाम्बु की मुस्लिम महिला ने चली थी?
राजगुरू द्रोणाचार्य का अपने शिष्य एकलव्य का अंगूंठा ले लेना किस मुस्लिम छल की ओर संकेत करता है?
पृथिवी राज चौहान को युद्ध में पराजित करने का षड़यंत्र किस जयचंद ने रचा था? राजा जयचंद तो उसका श्वसुर था?
बाबर को हिंदुस्तान पर हमला करने के किये किस राणा सांगा ने काबुल और लाहौर में निमंत्रण पत्र भेजा था?
क्या राणा सांगा मुस्लमान था?
अहमद शाह अब्दाली और नादिर शाह को दिल्ली पर हमला करने के लिए किन राजाओं ने निमंत्रण-पत्र भेजे थे?
इब्राहीम गार्दी किस पेशवा की सेना का तोपची था जिसने नमक की कब्र में गलकर मरना बेहतर समझा, बनिस्बत पेशवाओं के विरुद्ध गद्दारी करने के ?
अंग्रेज़ों की वफ़ादारी हो, या मुल्क के साथ की गई ग़द्दारियां, मीर जाफ़र के साथ जयचंद जैसे हिन्दुओं के भी नाम दस्तावेज़ों में क़ैद हैं, खुद 'आदित्य नाथ' मुझे कानूनी चैलेंज करो तो मैं बताऊँ कि तुम्हारा बीता पर्वतीय-कल क्या और कैसा था?
बंधुवर,
वोटों का ध्रुवीकरण मत करो. इस तरह यह नफरत बढ़ती ही जाएगी। देश शायद विकास की डगर पर चलने का मन बना रहा है, तो इसे विकास करने दो.
देश की समस्याएं कम नहीं हैं. गुजरात और देश के दूसरे भागों में लगाये गए ज़ख्म अभी ताज़ा हैं. इन्हें भरने का अवसर दो. मैं आशावादी हूँ, जानता हूँ, ज़ख्म भर जायेंगे। माँ भी अपने मुर्दा बच्चे को बहुत समय तक सीने से लगाकर नहीं रख सकती।
ईश्वर ने तुम्हें अवसर दिया है. एकबार मुसलमानों को सीने से लगाकर देखो, उनकी गरीबी, बेबसी, बदहाली और उनके पिछड़ेपन को देखो, वे भी गरीब और पिछड़े वर्गों से अलग नहीं हैं. वे आज हताश, निराश, और अनिश्चय के माहौल में जी रहे हैं. खुदारा! इनका इस्तेमाल मत करो. यह मौत से नहीं डरते, निगाहों के गिरा देने से डरते हैं. मौत तो एक दिन आएगी ही, उसका आना बरहक़ है. ऐसा इस्लाम में है. वह ईमान नहीं बदल सकता। इस्लाम का इस्ट्रक्चर ही ऐसा है. यहूदियों में भी ऐसा ही है. लव-जिहाद बेवकूफी है. चुनाव क़रीब हैं. इस आंदोलन से तुम्हारे अपने वोट छिटक जाएंगे।
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"जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था, परसों किसी और का हो जायेगा।.परिवर्तन संसार का नियम है. इस विषय में कोई भी वस्तु सत्य नहीं, हर वस्तु परिवतनशील है.।_(भगवत गीता): प्रस्तोता : हसन इमाम ज़ैदी, दुबई।
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"जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था, परसों किसी और का हो जायेगा।.परिवर्तन संसार का नियम है. इस विषय में कोई भी वस्तु सत्य नहीं, हर वस्तु परिवतनशील है.।_(भगवत गीता): प्रस्तोता : हसन इमाम ज़ैदी, दुबई।

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