'आम आदमी पार्टी ' का चिंतन एक नए युग का नया नजरिया है

'आम आदमी पार्टी ' का चिंतन एक नए युग का नया नजरिया है/             Dr. Ranjan Zaidi

8 दिसंबर 2013 पर 05:52 अपराह्न
फिरदौस, मतलब जन्नत। 'खान' लगने का मतलब कि किसी कबीले की जन्नत। 
मैं देख रहा हूँ कि तुम उस जन्नत को अर्से से तलाश रही हो. कभी अपने 'कांग्रेसी शहज़ादे' का कलमा पढ़ते हुए तो कभी अपने हक़ीक़ी मजाज़ी खुदा की जुदाई का रबाब बजाते हुए. ये सब सिन्फ़े-शायरी में अच्छा लगता है, हकीकत में नहीं। 
मैं ये बातें इसलिए कह रहा हूँ कि तुम ज़हीन हो, सोचती हो, अच्छा लिखती हो. लेकिन जो तुमने फेसबुक पर टिप्पण किया वो तुम्हारी ज़िहानत पर सवाल खड़ा कर देता है. क्योंकि तुमने 'आम आदमी पार्टी'  को नहीं समझा। खुदारा मज़हबी संगलाखों की कैद से निकलो. 
मैंने ट्विटर पर लिखा था कि 'आम आदमी पार्टी' राजनीतिक व सामाजिक वैचारिक परिवर्तन का आंदोलन है, जो २०१४ के चुनाव को भी प्रभावित करेगा। 
शाज़िया इल्मी की फाइट मुस्लिम कैंडिडेट के रूप में नहीं थी, इसे प्रयोग के रूप में देखा जाना चाहिए। 
धर्म बंद कमरे की चीज़ है, जो बाहर निकलकर गिरोह बनाता है. गिरोह की कमज़ोरी डर है। कांग्रेस डराती है कि बीजेपी के पास मत जाओ, उसकी सैकड़ों सेनाएं तुम्हारा नामो-निशान मिटा देंगी और गुजरात में मोदी ने इस डर को पैदाकर हुकूमत अपने हाथ में ले ली. 
मुज़फ्फरनगर में यही डर पैदा कर पुनः राजनीतिक प्रयोग किया गया. 
'आम आदमी पार्टी ' का चिंतन एक नए युग का नया नजरिया है जिसमें धर्म बंद कमरे की  चीज़ है लेकिन उसे पनपने के लिए गिरोह के हाथों में नहीं सौंपा गया है जो फुटपाथ या सरकारी ज़मीनों पर क़ब्ज़े कर टेम्पिल-इंडस्ट्री खड़ी करे. 
३ लाख में केजरीवाल चुनाव लड़ सकते हैं, शायद कल कोई कुमार विश्वास जैसा जुझारू युवक आगे जाकर एक रुपये के चंदे पर चुनाव लड़ सके. वह किसी भी क़ौम का योग्य और ईमानदार नेता हो सकता है. 
इसीलिए इस देश की नई पौध एक नया इंक़लाब चाहती है और उस इंक़लाब की दस्तक मुल्क की दारुल-सल्तनत के अवाम ने चुनाव के दरवाज़े पर दे दी है. 
मुसलमानों को क़बीलाई सोच और उसके निज़ाम से बाहर निकलकर मुल्क के अवाम के साथ आगे-आगे आना होगा नहीं तो फासिस्ट गिरोह मुसलमानों की लेबर-जेनेरेशन को दंगों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर शरणार्थी कैम्पों में रहने पर मजबूर कर देंगे, जहाँ क्रिमिनेल्स जन्म लेंगे और फासिस्ट सरकारें उनका आयेदिन एनकाउंटर करती रहेंगीं। www.http://samagravichar.in, alpsankhyaktimes94gzb.com

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