दिल्ली में राष्ट्रपति शासन से बचा जा सकता है/डॉ.रंजन ज़ैदी
दिल्ली में राष्ट्रपति शासन से बचा जा सकता है/
डॉ.रंजन ज़ैदी
दिल्ली की जनता ने 'आम आदमी पार्टी' पर भरोसा किया है. बीजेपी सरकार बनाने में सक्षम नहीं है. कांग्रेस को जनता ने नकार दिया है. ऐसे में राष्ट्रपति शासन के सिवा दूसरा विकल्प नहीं है.
यदि ऐसा होता है तो राष्ट्रपति शासन २०१४ के उत्तरार्द्ध या उसके आसपास ही
चुनाव करा पायेगा।
इस बीच नौकरशाही को जहाँ जमकर भ्रष्टाचार करने का अवसर मिलेगा
वहीं दिल्ली के विकास के रास्तों पर बैरियर लग जायेंगे और जन-समस्याएं बढ़ जाएँगी।
बीजेपी इसका लाभ उठाएगी क्योंकि वह अब दिल्ली में शांत से नहीं बैठेगी।
इन स्थितियों में ‘आम आदमी पार्टी’ की चुनौतियाँ निरंतर बढ़ती जाएंगीं।
ऐसे में विकल्प का सहारा लिया जा सकता है-
१. यदि 'आम आदमी पार्टी' के मैनिफोस्टो को कांग्रेस अपना लिखित समर्थन दे.
२. कांग्रेस का समर्थन इस शर्त पर स्वीकार किया जाये कि वह पांच वर्ष तक अपना समर्थन वापस नहीं लेगी और नई सरकार के कामकाज के रास्ते में
रोड़े नहीं अटगाएगी।
३. ‘आप' मंत्रिमंडल में कांग्रेस का कोई भी एमएलए मंत्री नहीं बनेगा।
४. नई सरकार को अपनी शर्तों पर अपने अधिकार क्षेत्र के कानून बदलने और नए कानून लाने तथा जनहित मेँ लिए जाने वाले फैसलों को लागू करने का
अधिकार होगा जिसका कांग्रेस न तो विरोध करेगी और न ही राजनीतिक
दबाव बनाएगी।
५. हर वर्ष कांग्रेस का एमएलए अपनी वार्षिक आय की रिपोर्ट सरकार के समक्ष पेश करेगा ताकि पता चले कि वह सरकार की लाभकारी योजनाओं से (अवैध रूप से) आर्थिक लाभार्जन नहीं कर रहा है.
'आम आदमी पार्टी' इन अनुशंसाओं (पार्टी की स्वीकृत शर्तों) पर सोच-विचारकर ही नयी कवायद कर सकती है. उसे याद रखना चाहिए कि
२०१४ के चुनाव में लहर मोदी की नहीं, 'आप' की होगी।
यदि इन शर्तों को कांग्रेस ठुकराती है तो उसे कालांतर में और भी नुक़सान
होंगे क्योंकि उसके पास सरकार बनाने का कानूनी जनाधार
नहीं है. (प्रस्तुति : www.http://samagravichar.com )

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