'आप विकल्प लाइए, नतीजा हमसे लीजिये।'/ डॉ. रंजन ज़ैदी

                                                                                     'आप विकल्प लाइए, नतीजा हमसे लीजिये।'/ डॉ. रंजन ज़ैदी       
   बसे राजनितिक हल्क़ों में खबर आम हुई कि आम आदमी
पार्टी देश भर में अपने कैंडिडेट उतारेगी, तबसे बड़ी पार्टियों के नेताओं की नींदें उचाट हो गई है. आम आदमी सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हो गया है.
       दिल्ली के तख़्त और उसके ताज ने सोना और नगीने उतारकर फ़ेंक दिए तो दौलत की मंडी हक्का-बक्का रह गई. विपक्षी पार्टियों के अमीर-उमरा,  नेता उस कमज़ोर पहलवान की तरह खीजकर ललकारने लगे कि अबकी पटक कर दिखाओ तो हम जानें।
      समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री ने ललकारकर कहा किउत्तर परदेश’ में मत आना, नहीं तो हम फिर से टोपी पहन लेंगे।
      भारतेन्दु नाट्य अकादमीलखनऊ विश्व विश्वविद्यालय के युआ छात्र और अमीनाबाद के आम आदमी ने सवाल किया, "क्या सचमुच आम आदमी पार्टी २०१४ के चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है?"
      एक युवती ने पूरे जोश के साथ कहा, ‘हम सब नयी आज़ादी के आंदोलन के लिए तैयार हैं.’ नखास हो या मंसूर नगर, इंदिरा कालोनी हो या आसिफुद्दौला का इमाम बाड़ा, सादत गंज हो या काज़मैन का एरिया, शिया-सुन्नी समुदाय से ताल्लुक़ रखने वाले युवाओं, युवतियों और बड़े बुज़ुर्ग कद्दावर लोगों ने कहा कि मोदी लखनऊ से चुनाव लड़ने वाले हैं, शिया समुदाय बीजेपी को वोट देता है, सुन्नी दूसरों को, लेकिन ये स्थिति कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश को दर्शाती है क्योंकि उनके पास विकल्प नहीं है. 'आप विकल्प लाइए, नतीजा हमसे लीजिये।
     
समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री 
भीड़ से एक शर्त भी आई कि अगर मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए 'कमाल फ़ारूक़ी' जैसे अवसरवादी नेता को यहाँ लाये तो वोट मोदी को जायेगा, बेवक़ूफ़ बनाने वाले किसी नेता को नहीं
   काफी हॉउस में चर्चा थी किआप’ की शैली में अब यूपी के चीफ मिनिस्टर अखिलेश वोटरों से सीधा संपर्क करने वाले हैं, यही काम पार्टी के वालिंटियर्स करेंगे।
      मीडिया के लोग मज़ाक़ उड़ाते नज़र आये कि सीएम पहले अपनी जेड प्लस की सिक्योरिटी से तो मुक्त हो? अरविन्द केजरीवाल ने तो करके दिखा दिया, जेड  प्लस सिक्योरिटी  हटाकर भी और आमजन से ससम्पर्क करके भी.
  दिल्ली वापसी के दौरान रस्ते भर हम यही सोचते रहे कि जिस क्रांति ने देश के दरवाज़े पर इंक़लाब का नारा लगाते हुए नई आज़ादी की दस्तक देने की तैयारी करली हो, उसे किसी आलाकमान के राजगुरु से दर्शिनिकता की सनद लेने की ज़रुरत नहीं है. क्योंकि नारे ही इंक़लाब की बुनियाद बनते हैं, राजशाही के मंदिरों के मठाधीश इंक़लाब नहीं,  विध्वंस को जन्म देते हैं. विश्वास नहीं तो आओ, पाटलिपुत्र के इतिहास में ही झांककर देख लिया जाये।   
www.samagravichar.in, info@samagravichar.in, alpsankhyaktimes94gzb.com,http://ranjanzaidi@yahoo.co.in, +91 9350 934 635 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पुस्तक : इतिहास के झरोखे से ( 3 ) /डॉ. रंजन ज़ैदी

महाभारत युद्ध नहीं, एक युग था./ रंजन ज़ैदी

ज़मीं खा गयी आसमान कैसे-कैसे/रंजन ज़ैदी