तुम्हारे राम का हो ज़िक्र मेरी मस्जिद में....

नई दिल्ली-राष्ट्रीय स्वयंसेवी संस्था शिया पॉइंट की आज संपन्न कोर कमिटी  की बैठक में एक मत से यह तय पाया गया कि बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्मभूमि विवाद के निपटारे के लिये मुसलिम तंजीमों को उच्चतम न्यायालय की शरण में जाना चाहिए. बैठक में शिया पॉइंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज़हीर जैदी ने कहा कि आज की परिस्थितियों के मद्देनज़र इस देश के मुसलमान इस विवाद को निपटाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि मुसलमानों की नयी पीढ़ी को इस मुद्दे में कोई दिलचस्पी नहीं है. वे देश के विकास में अपनी साझेदारी चाहते हैं. उन्होंने विश्वास  जताते हुए कहा कि यदि उच्चतम न्यायालय अपने फैसले में विवादित भूमि मुसलमानों को दे भी देती है तो भी मुसलमान यही चाहेंगे कि विवादित भूमि राम जन्म भूमि न्यास को हिबा कर दी जाए जिससे यह प्रकरण  सदैव के लिये समाप्त किया जा सके. ज़हीर जैदी ने कहा कि यही विकल्प एक नए सेकुलर हिंदुस्तान को नयी तस्वीर दे सकेगा. उन्होंने कहा कि इस देश का बहुसंख्यक वर्ग धार्मिक तो हो सकता है, साम्प्रदायिक नहीं. उन्होंने कहा कि गेहूं में घुन, चावल में कंकण और सरसों के दानों में राई का होना एक आम बात है. श्री जैदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जाना इसलिए ज़रूरी है ताकि भविष्य में आस्था के नाम प़र इस देश के फुटपाथ तक भू माफियाओं के कब्ज़े में न चले जाएँ. ज्ञातव्य हो कि इलाहबाद हाईकोर्ट के वर्तमान फैसले को आस्था से जोड़ा गया है. श्री जैदी ने कहा कि यदि यह एक नज़ीर बन गयी तो कालांतर में धार्मिक उन्माद और अतिवाद  उग्र रूप धारण कर लेगा और देश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा उससे जुड़े लगभग एक सौ अतिवादी संगठन देश के लोकतान्त्रिक ढांचे को तहस-नहस कर देंगे. उन्होंने अपने भाषण में कहा कि यह आवाज़ मात्र मेरी ही  नहीं है, ऐसी ही राय इस देश के प्रबुद्ध मुस्लिम पत्रकार और बुद्धिजीवी भी दे रहे हैं जिनमे हम वरिष्ठ पत्रकार एम. जे. अकबर, सईद नकवी, रंजन जैदी, सईद अंसारी और गैर मुस्लिम जगदीश्वर चतुर्वेदी जैसे अनेक लोग प्रमुख हैं. उन्होंने रंजन जैदी की एक नज़्म की कुछ पंक्तियों का उद्धरण देते हुए कहा कि- तुम्हारे राम का हो ज़िक्र मेरी मस्जिद में, मेरे खुदा की सदा आ बसे शिवालों में / न तुमको खौफ हो मस्जिद में आने-जाने प़र, न हमको खौफ कि मंदिर है बुतपरस्तों का/ यही है प्यार तो आओ इसे शहद कर लें.         (प्रेस-विज्ञप्ति : शिया प्वाइंट के केन्द्रीय मुख्यालय, कालका जी से जारी)             

टिप्पणियाँ

  1. secular banne ke lye dhakoslon ke zaroorat hoti hai secular rehne ke lye nahin. koi bhi insan apne mazhab par sakhti se qayam reh kar bhi secular ho sakta hai.

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  2. YE HAMARI KHAMOSHI KAMZORI NAHI BE'SABAB
    HAME SHOLON KO LAFZON ME PIRONE KA HUNAR AATA HAI,

    janab ye masjid mandir ki baat hoti to bhi apki baat gale utarne wali nahi akhir ye sare bade naam jinka apne ziqr kiya ye kyun nahi dekh pa rahe hain ki ab alpsankhyakon ko ye yakeen dilaya ja raha hai ki wo doyam darje ke nagrik hain aur wahi ban kar rahe......,

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