अंतर्राष्ट्रीय Page /नाईंन इलेवन के हादसे के बाद-4 /रंजन ज़ैदी
ब्लैक वाटर जैसे संगठन का निजी कारोबार बिल क्लिंटन के समय में ही फलने-फूलने लगा था, बुश-प्रबंधन ने डिक्चेनी का ब्रेन पाकर इसे अरबो-खरबों डालर के ठीके दे दिए थे जिससे आज अमेरिका की आतंरिक और वाह्य सुरक्षा के बंकरों पर ब्लैक वाटर का कब्ज़ा हो चुका है.
यहाँ मिलिट्री प्राईवेटाइज़ेशन के बढ़ते रुझान और पैदा होते खतरों पर जब निगाह जाती है तो दुनिया
शायद अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को माफ़ न कर पाए क्योंकि सेना में प्राईवेटाइज़ेशन की शुरुआत बिल क्लिंटन के शासनकाल में हुई थी. हिलेरी क्लिंटन तब सरकार में मंत्री थीं (अब वह राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं.) उनके पति बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं. चूंकि अमेरिका में प्राइवेटाइज़ेशन की शुरुआत का जुनून बिल क्लिंटन के ज़माने में ही हो गया था इसलिए डिक्चेनी ने अवसर का लाभ उठाते हुए राष्ट्रपति बुश के युद्धोन्माद के रंग को गाढ़ा बना दिया और धड़ल्ले के साथ पहली बार 'ब्लैक वाटर' जैसे निजी सैनिक संगठन को इराक की ज़मीन पर उतार दिया हालाँकि इसके 25 हज़ार सशस्त्र सैनिक अफगानिस्तान में प्रयोग की दृष्टि से पहले ही उतारे जा चुके थे और पेंटागन के साथ उनकी कारकर्दिगी ने जो नतीजे बरामद कराये थे, उससे अमेरिका के दोनों राजनीतिक दल इस एजेंडे पर एकमत थे.
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस संगठन के सैनिकों को दिन के चोर, और रात के
आतंकवादी कहते थे. उन्होंने कई बार चाहा कि अफगानिस्तान से इंगित दहशतगर्द कंपनियों को हमेशा के लिए निकाल बाहर किया जाये लेकिन इसमें उन्हें मुंहकी खानी पड़ी. 2010 में भी उन्होंने उक्त आयातित निजी अमेरिकी कारोबारी कंपनियों पर पाबन्दी लगाने और उनके वीजे समाप्त कर देने की बात उठाई थी मगर उन्हें अमेरिकी सीनेट ने चुप करा दिया था. उन्हीं दिनों अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिक कमांडर डेविड पीटर यास को निर्देशित किया गया कि वह राष्ट्रपति करज़ई पर अंकुश लगाये. अमेरिकी कमांडर ने अपनी मुलाकात के दौरान करज़ई से साफ कह दिया कि अफगानिस्तान से निजी सुरक्षा कम्पनियाँ अमेरिकी मिशन को छोड़कर वापस नहीं जायेंगीं. हालाँकि कमांडर ने अमेरिकी गुप्त मिशन का खुलासा नहीं किया था और न ही करज़ई ने उससे आगे कुछ पूछने का साहस किया था. अलबत्ता उसने करज़ई को अरबों डालर की मदद का भरोसा ज़रूर दिया था जिसे आगे चलकर अमेरिकी सीनेट और सुरक्षा परिषद् ने तुरंत मंज़ूरी भी दे दी थी. हामिद करज़ई शायद 28 जून 2009 को इराक से युद्ध के अंतिम पृष्ठ को बंद कर जब पाल ब्रेमर अमेरिका के लिए रवाना हो रहे थे तो उन्होंने साफ शब्दों में जो कहा था, उसे भूल गए थे. तब पाल ब्रेमर ने कहा था कि चूंकि ब्लैक वाटर ऑर्डर-१७ के अधीन है, इसलिए यह इराक में कहीं भी कार्यवाई करने के लिए स्वतंत्र है.
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नई जंग यह 'ब्लाग-मंच' आपका है। इस मंच से उठने वाली हर आवाज़ देश और समाज के बदलते राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समीकरणों को दिशा प्रदान करती है. यह 'नई जंग' एक नये युग को नया इतिहास दे सकती है. आइये! सब कंधे से कंधा मिलाकर प्रगतिशील और जागरूक भारत और उसके विकासशील समाज व राष्ट्र को अप्रदूषित, भयमुक्त, स्वच्छ और सशक्त लोकतंत्र का नया स्वर प्रदान करें। आपकी रचनाएं आमंत्रित हैं। Contact ID: https://ranjanzaidi786@yahoo.com/-लेखक
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शायद अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को माफ़ न कर पाए क्योंकि सेना में प्राईवेटाइज़ेशन की शुरुआत बिल क्लिंटन के शासनकाल में हुई थी. हिलेरी क्लिंटन तब सरकार में मंत्री थीं (अब वह राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं.) उनके पति बिल क्लिंटन अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं. चूंकि अमेरिका में प्राइवेटाइज़ेशन की शुरुआत का जुनून बिल क्लिंटन के ज़माने में ही हो गया था इसलिए डिक्चेनी ने अवसर का लाभ उठाते हुए राष्ट्रपति बुश के युद्धोन्माद के रंग को गाढ़ा बना दिया और धड़ल्ले के साथ पहली बार 'ब्लैक वाटर' जैसे निजी सैनिक संगठन को इराक की ज़मीन पर उतार दिया हालाँकि इसके 25 हज़ार सशस्त्र सैनिक अफगानिस्तान में प्रयोग की दृष्टि से पहले ही उतारे जा चुके थे और पेंटागन के साथ उनकी कारकर्दिगी ने जो नतीजे बरामद कराये थे, उससे अमेरिका के दोनों राजनीतिक दल इस एजेंडे पर एकमत थे.
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई इस संगठन के सैनिकों को दिन के चोर, और रात के
आतंकवादी कहते थे. उन्होंने कई बार चाहा कि अफगानिस्तान से इंगित दहशतगर्द कंपनियों को हमेशा के लिए निकाल बाहर किया जाये लेकिन इसमें उन्हें मुंहकी खानी पड़ी. 2010 में भी उन्होंने उक्त आयातित निजी अमेरिकी कारोबारी कंपनियों पर पाबन्दी लगाने और उनके वीजे समाप्त कर देने की बात उठाई थी मगर उन्हें अमेरिकी सीनेट ने चुप करा दिया था. उन्हीं दिनों अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिक कमांडर डेविड पीटर यास को निर्देशित किया गया कि वह राष्ट्रपति करज़ई पर अंकुश लगाये. अमेरिकी कमांडर ने अपनी मुलाकात के दौरान करज़ई से साफ कह दिया कि अफगानिस्तान से निजी सुरक्षा कम्पनियाँ अमेरिकी मिशन को छोड़कर वापस नहीं जायेंगीं. हालाँकि कमांडर ने अमेरिकी गुप्त मिशन का खुलासा नहीं किया था और न ही करज़ई ने उससे आगे कुछ पूछने का साहस किया था. अलबत्ता उसने करज़ई को अरबों डालर की मदद का भरोसा ज़रूर दिया था जिसे आगे चलकर अमेरिकी सीनेट और सुरक्षा परिषद् ने तुरंत मंज़ूरी भी दे दी थी. हामिद करज़ई शायद 28 जून 2009 को इराक से युद्ध के अंतिम पृष्ठ को बंद कर जब पाल ब्रेमर अमेरिका के लिए रवाना हो रहे थे तो उन्होंने साफ शब्दों में जो कहा था, उसे भूल गए थे. तब पाल ब्रेमर ने कहा था कि चूंकि ब्लैक वाटर ऑर्डर-१७ के अधीन है, इसलिए यह इराक में कहीं भी कार्यवाई करने के लिए स्वतंत्र है.
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