वो शहर, जो कल थे हरे-भरे : ( 4 ) /डॉ. रंजन ज़ैदी
पाकिस्तान के शहर 'मरदान' से १५ किमी की दूरी पर 'खैबर पख्तूनख्वा' क्षेत्र में एक छोटा सा शहर है 'तख़्त भाई'. यह शहर पहली शताब्दी के एक किले में आबाद रहा होगा। पुरातत्वेत्ताओं का मानना है कि इस किले का निर्माण शायद पहली और सातवीं सदी ईस्वी के बीच हुआ था। खुदाई के दौरान पहली बार इसका पता १८६४ में चला. १९२० तक आते-आते खुदाई के दौरान समूचे किले के चिन्ह स्पष्ट नज़र आने लगे थे.
किले को स्पष्ट रूप से चार हिस्सों में देखा जा सकता था.
एक- स्तूपों का कोर्ट।
दूसरा : निजी कमरों वाले अनेक चेंबर जिनमें मंत्रणा-हॉल और विशेष-भोजनालय भी निर्मित किये गए थे. तीसरे भाग में वृहद् मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए हैं जिसके बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि इसका निर्माण शायद बहुत बाद में किया गया होगा।
चौथे भाग में घने अँधेरे के बीच अनेक कमरों का निर्माण किया गया था जिनमें शायद विशेष पूजा-पाठ व योग-साधना करने वाले भक्तगणों को ठहराया जाता रहा होगा। उसके बाद के क्षेत्र में शहर बसाया गया था। किले के अवशेषों को देखकर ज्ञात होता है कि बौद्ध मतावलम्बियों के इस कथित किलेनुमा 'तख़्त भाई' शहर को तत्कालीन बर्बर आक्रमणकारियों से तनिक भी क्षति नहीं पहुंचाई गयी है. इस रहस्य के कारणों का खुलासा अभी नहीं हो पाया है. न ही पुरातत्वविदों को वहाँ तत्कालीन बर्बर हमलावरों के किन्हीं हमलों
के निशान प्राप्त हुए हैं .
के निशान प्राप्त हुए हैं .
जबसे सिंध प्रान्त स्थित 'भंभोर' शहर में खुदाई के दौरान प्राचीन काल के सिक्के, मानव-पिंजर और अन्य वस्तुएं प्राप्त हुई हैं, उससे प्रागैतिहासिक काल में दिलचस्पी रखने वाले शोधार्थियों और सैलानियों की रुचि में काफी बढ़ोतरी होती देखि गई है. लेकिन पाकिस्तान की आतंरिक और वहाँ की पेचीदा अस्थिर राजनीति तथा बढ़ते आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के कारण विदेशी सैलानियों का 'भंभोर' तक पहुंचना आसान नहीं रहा है.
निश्चय ही ऐसी स्थितियाँ वहाँ के स्थानीय व विदेशी सैलानियों
की चिंता को बढ़ाने के लिए काफी हैं. (समाप्त) http://ranjanzaidi@yahoo.co.in/ +91 9350 934
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