नाईंन इलेवन के हादसे के बाद --रंजन ज़ैदी


          ईरान के बड़े नेता सैयद कमाल खराजी कहते हैं कि इंग्लैंड के पूर्व प्रधान मंत्री टोनी ब्लेयर की सरकारी माफ़ी ब्रिटिश साम्राज्य के इतिहास का एक शर्मनाक पहलू है. 
          सर जॉन चिल्कोट के द्वारा प्रस्तुत की गई जांच-रिपोर्ट के हवाले से अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि ब्लेयर की माफ़ी ने यह साबित कर दिया है कि दूसरे देशों पर अकारण आक्रमण करने के परिणाम कितने खतरनाक नतीजे सामने लाते हैं.

          अत्यंत क्रोध और हताश मुद्रा में संयुक्त राष्ट्र के पूर्व जनरल सिक्रेटरी कोफ़ी अन्नान भी स्वीकारते हैं कि इराक़ पर थोपी गई जंग नितांत ग़ैर-कानूनी थी.

          लार्ड प्रेस्टो अपनी जाँच रिपोर्ट में लिखते हैं कि मार्च 2003 में हमले से पूर्व ब्लेयर अत्यन्त उत्साहित होकर अमेरिका के तत्कालीन प्रेजिडेंट जार्ज विलियम बुश को सन्देश भेजता है कि 'चाहे कुछ भी हो, हम आपके साथ है.' 
          निश्चय ही यह एक विनाशकारी निर्णय था. झूठ के मुर्दा टीले पर खड़े होकर ब्लेयर और जार्ज बुश ने जिस तरह से इराक़ और वहां बसी कौमों को तहस-नहस कर उनकी अगली पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया है, इतिहास उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा.
क्या बुश पर युद्ध अपराध का मुकदद्मा चलाया जायेगा?
          आइये देखते हैं कि छोटे बुश यानि अमेरिका के तत्कालीन प्रेजिडेंट जार्ज विलियम बुश को इराक़ के प्रेजिडेंट सद्दाम हुसैन से इतनी घृणा क्यों थी, जिसने सद्दाम हुसैन को फांसी पर चढ़ाकर ही दम लिया और एक-एक कर आज़ाद मुस्लिम देशों की कमर ऐसे तोड़ी कि वे वर्षों तक इस्राईल के सामने खड़े होने का साहस नहीं जुटा पाएंगे.                                                                             
          नाईंन इलेवन के हादसे के बाद वह अमेरिका में निजी सिक्योरिटी व्यवसाय में सबसे बड़ा सिक्योरिटी-कांट्रेक्टर बनकर उभरा था. उस समय उसके पास एक अरब डालर से भी अधिक के कान्ट्रेक्ट थे. इराक-वार में सैनिकों के अतिरिक्त निजी सिक्योरिटी एजेंसी के एक लाख गार्ड्स महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे थे. 
          एक खबर के अनुसार नाटो के सैनिकों से भी पहले इसी एजेंसी के लगभग 25 हज़ार गार्ड्स लीबिया के बेन्गाज़ी में उतारे
जा चुके थे. नाटो-आपरेशन के बाद तेल के भंडारों और कुओं का अधिकरण करते ही इनकी तादाद एक लाख तक पहुँचने की संभावना थी. ज्ञातव्य हो कि इराक युद्ध में इस एजेंसी के एक लाख सुरक्षा-गार्डों ने नाटो सेना के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 
          अफगानिस्तान में युद्ध से पूर्व एजेंसी के सुरक्षा-सैनिकों ने हजारों अफगान लड़ाकों की हत्या कर नाटो के लिए वातावरण तैयार कर दिया था. इस एजेंसी का नाम था 'ब्लैक वाटर फ़ोर्स' जिसका मुख्यालय अमेरिका स्थित नार्थ केरोलीना के क्षेत्र म्यूक में स्थित है. उसका मालिक 38 वर्षीय एरिक प्रिंस दुनिया भर में दहशत का पर्याय बन चुका है और जिससे इराक का हर नागरिक नफरत से उबल पड़ता है. 
'ब्लैक वाटर' फ़ोर्स अमेरिकी सेना का एक निजी विंग है जिसके सैनिकों को ब्लैक वाटर फ़ोर्स नामक एजेंसी से किराये पर लिया जाता है. इराक-वार में इस एजेंसी को अमेरिकी सरकार से लगभग 23 मिलियन डालर का ठीका मिला था. यह ठीका अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा सन 2003 में उसे इराक स्थित अमेरिकी राजदूत पाल्ब्रेमर की सुरक्षा के लिए दिया गया था क्योंकि तब अमेरिका की बुश सरकार की ओर से पाल्ब्रेमर को इराक की तत्कालीन अंतरिम सरकार (मई 2003 से जून 2004 तक ) के प्रमुख के रूप में बगदाद भेजा गया था. किन्तु 

          कब्ज़ा कर लेने के बाद अमेरिका की निजी सेना ('ब्लैक वाटर फ़ोर्स') के सैनिकों ने सरेआम लूट, अपहरण, बलात्कार और बगदाद स्कवैर में कत्लेआम का ऐसा नंगा नाच दिखाया कि मानवता तक काँप-काँप उठी थी. 
          इन स्थितियों में तत्कालीन अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री नूरी अलमालिकी को ब्लैक वाटर फ़ोर्स की कारगुजारियों के विरुद्ध अमेरिकी सरकार से शिकायत करनी पड़ी तो जवाब में बुश सरकार की विदेश मंत्री 'कोंडोलीज़ा राईस' ने आवेश में आकर प्रधानमंत्री नूरी अलमालिकी से माफ़ी मांगने को कहा. यह बेहद दुर्भावनापूर्ण घटना थी. 
इससे ब्लैक वाटर फ़ोर्स के हौसले और भी काफी बुलंद हो गए. इराक में उसके द्वारा की जाने वाली वारदातों पर उसका नारा बेहद भयानक था, 'यहाँ आज जो होगा, वह आज ही समाप्त हो जायेगा/कल कोई याद भी नहीं रखेगा.          [जारी/-2…..]
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