One life is not enough//.K. Natwar Singh
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| Natwar K Singh. |
Did Sonia Gandhi cheat the nation ?
Inside story by a close Congress leader
One Life Is Not Enough is a tell all autobiography by Natwar K
Singh. A close confidante of the Nehru Gandhi family, Natwar Singh
writes about why Sonia Gandhi left the PMs post in 2004 despite winning
the elections on her own. It wasn’t because of “an inner voice” as
claimed by Sonia Gandhi but because of pressure from Rahul Gandhi. More
inside stories and sensational cover ups. One Life Is Not Enough by Natwar K Singh.
July 31, 2014/ Rs.423 कुंवर नटवर सिंह की सद्यः प्रकाशित अंग्रेजी पुस्तक One Life Is Not Enough पढ़ी जिसमें लेखक द्वारा रहस्योद्घाटन किया गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने 2004 की यूपीए (प्रथम) सरकार के गठन के समय प्रधान मंत्री पद लेने से इसलिए अस्वीकार कर दिया था क्योंकि तब उनके पुत्र राहुल गांधी ने इसका विरोध किया था. वह नहीं चाहते थे कि दादी श्रीमती इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की तरह उनकी माँ की भी हत्या कर दी जाये।
कुंवर नटवर सिंह की पुस्तक के अनुसार वह फैसला सोनिया गांधी की आत्मा की आवाज़ न होकर नितांत उनके पुत्र राहुल गांधी के अचेतन में पैठे उस भय और आतंक का दबाव का नतीजा था जिसने उस अदृश्य गुत्थी के मनोविज्ञान का खुलासा कर दिया है जिसके तहत राहुल गांधी राजनीति में आकर भी राजनेता नहीं बन पाये हैं.
One Life Is Not Enough के अध्यन से इस बात का भी अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसे मनोरोगी नेता के हाथ में समय आने पर राजसत्ता सौंपना कितना घातक सिद्ध हो सकता है. देखा जाये इसमें राहुल गांधी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए . गुजरात और मुज़फ्फर नगर के दंगों के दौरान जिन बच्चों ने हिंसा के वीभत्स दृश्य देखे हैं, या जो अफगानिस्तान, इराक़, लीबिया जैसे अनेक देशों में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज बुश के किराये के सैनिकों के नृशंस-कृत्य और अब हमास पर इसराइल के बमों का आतंक देखा है, वे किन मानसिक स्थितियों से गुज़रे और गुज़रते होंगे, इसकी मात्र कल्पना ही की जा सकती है. राहुल और प्रियंका का सत्ता से दूर रहते रहना इन्हीं भयावह स्थितियों का नतीजा माना जा सकता है.
यदि यहाँ नटवर सिंह के खुलासे को ईमानदारी से देखा जाये तो इसमें द्वेष या बदले की भावना नज़र नहीं आती है और न ही कवि, साहित्यकार और भूतपूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह के चरित्र व स्वाभाव से मेल खाती है. वह नेहरू खानदान के वफादार राज-रत्नों में से रहे हैं.
श्रीमती इंदिरागांधी और सोनिया गांधी के बेहद करीबी होने के कारण निश्चय ही उनके पास उस परिवार के बेहद अंदरूनी राज़ रहे होंगे जिनके बल पर वह अपने साथ हुई ज़्यादतियों का बदला ले सकते थे लेकिन पुस्तक में उन्होंने ऐसा कोई बड़ा खुलासा नहीं किया है जिससे नेहरू परिवार की इस नई पौध को किसी बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है ।
नटवर सिंह को शायद यह झूठ 2004 से ही बेचैन करता रहा होगा कि सोनिया गांधी ने अपनी आत्मा की आवाज़ सुनकर ही देश के प्रधानमंत्री पद को स्वीकार नहीं किया। राहुल गांधी के शब्द याद किये जाएँ तो पुस्तक का सन्देश स्पष्ट परिलक्षित हो जाता है कि जिस तरह-
'देश में उनकी दादी इंदिरा गांधी और उनके पिता राजीव गांधी की हत्या हुई है, उसी तरह उनकी भी हत्या हो जाएगी।' यहाँ एतराज़ यह है कि जब सच्चाई सामने आ चुकी थी तो कांग्रेसियों का 'सोनिया गांधी को त्याग की मूर्ति' बताते रहना कौन सी स्तरीय और आदर्शवादी राजनीति थी?
पुस्तक में कई और ऐसे राज़ों पर से परदे उठाये गए हैं जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है. इन राज़ों को राज़ में रहने देने के उद्देश्य से श्रीमती सोनिया गांधी, प्रियंका और राहुल सभी एक रात नटवर सिंह के निवास पर पहुंचे और अनुरोध किया कि वह ऐसा न करें लेकिन लेखकीय अस्मिता को ध्यान में रखते हुए पुस्तक के लेखक ने संपादन नहीं किया।
नेहरू-गांधी परिवार पर इससे पहले भी कई पुस्तकें लिखी गई हैं. १९७० की दहाई में ओ.पी. मथाई ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला था. इससे पहले यूपीए सरकार में तत्कालीन पूर्व प्रधान मंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के प्रेस सचिव संजय बारू ने भी एक पुस्तक लिखी जिसमें किये गए कई खुलासे वही है जिनका के. नटवर सिंह की पुस्तक में ज़िक्र किया गया है. पुस्तक की 50,000 प्रतियां समाप्त हो चुकी हैं और अब इसका दूसरा संस्करण आने के करीब है. --डॉ. रंजन ज़ैदी
zaidi.ranjan20@politics1.blogger.com

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