चार्वाक नास्तिक था, उसे भी ऋषि मान लिया गया--हेमवती नंदन बहुगुणा

हेमवती नंदन बहुगुणा
हेमवती नंदन बहुगुणा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और जनसंघ (वर्तमान की बीजेपी) को लेकर स्पष्ट विचार रखते थे. 
उन्ही के शब्दों में,'जब तक इस देश में ये संस्थाएं हैं, साम्प्रदायिकता को मिटाना आसान नहीं है.' उनका मानना था कि जितनी जल्दी हो, इन जमातों से छुटकारा पा लेना चाहिए। ये जमातें हिंदुस्तानियत के विरुद्ध काम कर रही हैं. 
साम्प्रदायिक दंगों  पर विचार व्यक्त करते हुए बहुगुणा जी कहते, 'शेर के डर से जंगल के कमज़ोर जानवर एक घेरा बना कर खड़े हो जाते हैं. मगर ऐसा करने से क्या वे अपनी सुरक्षा कर पाते हैं? देश को इसी खतरे से सुरक्षित रखना होगा। 
अकबर बादशाह ने जोधाबाई से शादी की लेकिन उसे मुस्लमान नहीं बनाया। कुम्भ के मेले में अकबर जोधा बाई के साथ बैठकर नहाता था, इससे वह हिन्दू नहीं हो गया. 
ऐसा ही परस्पर सम्मान जातियों, समुदायों और संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब लाता है. 
शिवा जी और औरंगज़ेब परस्पर एकदूसरे के राजनीतिक विरोधी थे लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग दे दिया गया. शिवा जी का तोपखाना मुसलमानों के हाथ में था. औरंज़ेब ने जज़िया कर लगाया तो शिवा जी ने गैर-मराठियों में चौथ लगाई। वह दो राजाओं की लड़ाई थी, हिन्द व इस्लमिज़म कि लड़ाई नहीं थी. 
औरंगज़ेब ने मंदिरों को बड़ी-बड़ी जागीरें और रकमें दीं. लोग इन बातों को इग्नोर कर जाते हैं. 
रफ़ी अहमद किदवई एक फक्कड़ सिफत इंसान थे, दरवेश थे. दोस्तों के लिए उनमें दरियादिली थी लेकिन वह विद्वान व्यक्ति थे.     
उनके अनुसार हिन्दू धर्म में संकीर्णता के लिए कोई जगह नहीं है. ये धर्म नए विचारों को आत्मसात करलेता है. वह कोई एक धर्म नहीं, असंख्य और विभिन्न विचारों, संस्कृतियों व परम्पराओं का अंतहीन सागर है। 
उनके अनुसार इस देश का पहला नास्तिक व्यक्ति चार्वाक था. लोगों ने उसे गलियां नहीं दीं. उसकी मृत्यु के बाद उसे भी ऋषि मान लिया गया.                                                                                             (समाप्त) 

 
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