सिलसिला, यादों का-2/ रंजन ज़ैदी
जब तक
बहुगुणा जी देहरादून में रहे, तब तक मेधावी छात्र के रूप में उनका नाम सबकी ज़ुबान
पर चढ़ा रहा.
यहाँ से इलाहबाद के गवर्मेन्ट
कालेज में गए तो वहाँ भी उनकी प्रतिभा सर चढ़कर बोली। कुछ ही समय में वह कालेज
के अँगरेज़ प्रिंसिपल की आँख का तारा बन गए।
बात १९३७
.की है.
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की
अंतरिम सरकार थी. देही-इलाक़ों में सामाजिक विकास की योजनाओं से सम्बंधित कई
कार्यक्रम चलाये जा रहे थे. प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत चलाये जा रहे कार्यक्रमों में
बहुगुणा जी की छात्र-मंडली ने भी दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी थी।
उन्होंने सोचा कि बाकायदा
स्टूडेंट-फेडरेशन की स्थापना कर इस कार्य को बड़े पैमाने पर किया जा सकता है. इससे
गावों में रह रहे गरीब युवकों और वृद्ध लोगों की बेहतर तरीके से मदद भी की जा
सकती है.
लेकिन समस्या यह थी कि फेडरेशन को
अँगरेज़ प्रिंसिपल से मान्यता कैसे दिलाई जाये? वह इसका विरोधी था. बहुगुणा जी कुछ
सोचकर झिझकते हुए पार्लियामेंट की एक योजना का प्रस्ताव लेकर प्रिंसिपल के पास गए
और उसे कन्विंस करने के नज़रिये से बताया कि इंग्लैण्ड की 'पार्लियामेंट'
डेमोक्रेसी की माँ कही जाती है. उसी तर्ज़ पर वह भी अपने कालेज में बहुत ही छोटे
पैमाने पर योजना को कार्यान्वित करना चाहते हैं।
अपने देश की संसद की प्रशंसा सुन
प्रिंसिपल गदगद हो गया. उसने कालेज की स्टुडेंट पार्लियामेंट के गठन की स्वीकृति
देकर उन सदस्यों के नाम तलब किये जिन्हें पार्लियामेंट का चुनाव लड़ना था. छात्र
बहुगुणा की यह पहली कूटनीतिक जीत थी.
उन्होंने अपने फैडरेशन के सदस्यों
में जो नाम तहरीर किये उनमें सर शाह सुलेमान के सुपुत्र भी थे जिन्हे मुस्लिम लीग
की ओर से संसद में प्रतिपक्ष का नेता बनाया जाना था.
पार्लियामेंट के स्पीकर के लिए
विजय वीर वांचू को मनोनीत किया गया. वांचू, पंडित जवाहर लाल नेहरू के छोटे भाई
केम्ब्रिज स्कूल रिटर्न मोहन लाल नेहरू के निवासे थे. बहुगुणा जी को
प्रधानमंत्री चुना गया.
छात्र-संसद के गठन के बाद उदघाटन के लिए पंडित नेहरू का नाम चुना गया लेकिन वह समयाभाव के कारण इस अवसर पर शामिल नहीं हो पाये। हा! उन्होंने अपनी जगह अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित के पति रंजीत पंडित को भेज दिया। यहीं से बहुगुणा जी देश की राजनीतिक हलचलों के केंद्र आनंद भवन के संपर्क में आये.
यहीं पर बहुगुणा जी लाल बहादुर शास्त्री, डॉ. ज़ेड अहमद, डॉ.अशरफ़, डॉ. राम मनोहर लोहिया, जे बी कृपलानी के संपर्क में आये जिनकी प्रेरणा से अभिभूत हो वह कांग्रेस
सेवा दल के सदस्य बनकर कंधे पर खद्दर
के थान लादे द्वार-द्वार खद्दर ख़ादी का कपड़ा बेचने लगे……।संपर्क : info @samagravichar.in, alpsankhyaktimes94gzb.com, +91 9350 934 635 
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