संवेदनशील पहलुओं पर निगाह डालते रहना चाहिए..../ रंजन ज़ैदी

 मुख्य-मंत्री अरविन्द केजरीवाल 
पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के द्वारा की गई आत्म-हत्या पर दिल्ली हाईकोर्ट का आने वाला फैसला जो भी हो, दिल्ली के मुख्य-मंत्री अरविन्द केजरीवाल को इस विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. याद रहे, इस घटना के बाद अरविन्द केजरीवाल ने पीड़ित परिवार को दिल्ली सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये का मुआविज़ा देने की घोषणा की थी जिस पर हरियाणा बीजेपी सरकार ने अपने स्वभाव के अनुसार 'लाशों पर की जा रही सियासत' का आरोप लगाया था. इस सम्बन्ध में हरियाणा बीजेपी सरकार को याद नहीं रहा कि खट्टर सरकार ने भी प्रभावित परिवार को 10  लाख रूपये और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा पहले ही कर चुकी है और देश के दूसरे राज्यों में भी आर्थिक तंगी के कारण किसान और बेरोज़गार युवा आये-दिन आत्महत्याएं करते रहते हैं. 
   
  सवाल यह है कि क्या समस्याओं से जूझने की बजाये व्यक्ति को आत्महत्या कर लेना चाहिए? क्या आत्महत्या इच्छाओं, अकांक्षाओं के पूरे न होने, टूटती उम्मीदों, बिखरते सपनो और जीवन के संघर्षों से मुंह मोड़ लेने का एक हताशा भरा विकल्प मात्र है? यदि यही कार्य जब सैनिक करेगा तो देश की सीमाओं की सुरक्षा का उत्तरदायित्व किस पर होगा? बीजेपी के बारे में तो कुछ कहना ही बेकार है, लेकिन अरविन्द केजरीवाल के लिए सुझाव देना ज़रूरी है कि कोई घोषणा करने से पहले कमसे कम अपने योग्य (यदि पास में हों तो) सलाहकारों से मशविरा कर लिया करें तो बुरा नहीं है. खुद को भी ऐसे संवेदनशील पहलुओं पर निगाह डालते रहना चाहिए....-रंजन ज़ैदी
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