सीरिया में संकट राष्ट्र संघ की नाकामी

बान की मून  ने सीएनएन से बात करते हुए कहा है कि सीरिया में संकट का समाप्त न होना
और इस देश में हिंसक घटनाओं का जारी रहना, राष्ट्र संघ की बहुत बड़ी नाकामी है जिसमें महिलाएं और बच्चे आतंकवादी हिंसा और झड़पों की भेंट चढ़ रहे हैं, यह बहुत ही खेदजनक विषय है।
      बान की मून का यह बयान एेसी स्थिति में सामने आया है जब आतंकवादी गुटों द्वारा पिछले चार वर्ष से हलब के जारी परिवेष्टन पर पश्चिमी हल्क़े और संयुक्त राष्ट्र संघ, सीरिया में आतंकवादियों के अपराधों के बारे में मौन रहे हैं ।
      गत 22 नवंबर को तेहरान में स्लोवेनिया के राष्ट्रपति बारूत पाखोर ने वरिष्ठ नेताओं से भेंट के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई सहित अन्य नेताओं के समक्ष क्षेत्र की दर्दनाक घटनाओं और कुछ शक्तियों की ओर से राष्ट्रों पर थोपे गये युद्ध और अस्थिरता की ओर संकेत किया था. 
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दुनिया भर के तानाशाह इस्राईल की जासूसी कंपनी से लेते हैं सेवा
      स्राईल की एक संचार सेवा कंपनी दुनिया भर के तानाशाहों को जासूसी की सेवा दे रही है।क़ुद्स नेट के अनुसार, इस इस्राइली कंपनी का नाम सेलेब्राइट है। संचार क्षेत्र में सक्रिय यह कंपनी मोबाइल फ़ोन सहित निजी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को हैक करने वाले गैजेट बनाती है और दुनिया में 115 तानाशाही व्यवस्थाओं को उनके विरोधियों की निजी जानकारी हासिल करने में मदद करती है।
      लियोन बेन पेरेट्ज़ ने (जो सेलेब्राइट कंपनी के कार्यकारिणी अधिकारी हैं,) इस बारे में कहा, जब भी कोई नया मोबाइल फ़ोन बाज़ार में आता है, कंपनी के 250 कर्मचारी उस फ़ोन में कमी का पता लगाने की कोशिश करते हैं, ताकि उसके कोड को हैक कर सकें। बेन पेरेट्ज़ ने कहा कि सेलेब्राइट कंपनी उन संदेशों को फिर से हासिल कर सकती है जो कई साल पहले भेजे गए और मोबाइल फ़ोन की मेमरी से मिट गए हैं।
         
इस रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी फ़ेडरल पुलिस की जांच इकाई भी सेलब्राइट की सेवा लेती है।
दुनिया में 115 से ज़्यादा देश की जासूसी सेवाओं के साथ सेलब्राइट कंपनी के सहयोग से दुनिया भर में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ गयी है। (MAQ/N)
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उन्होँने भेंट के दौरान अपनी ओर से महत्वपूर्ण जानकारी दी कि आइसिस को जड़ से समाप्त करने के लिए अमरीकियों के पास कोई विशेष कार्यक्रम नहीं है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी जिस दृष्टिकोण से पश्चिम को देखते और अपने हितों, नीतियों लक्ष्यों के परिप्रेक्ष्य में आकलन करते हैं, या राष्ट्रों देशों के विभिन्न परिवर्तनों के संबंध में उनकी स्वाधीनता संप्रभुता को महत्व देते हैं, उसपर भरोसा किया जाना संभव नहीं है. कारण कि एक तरफ अमेरिका सीरिया संकट के समाधान पर बल देता है तो दूसरी ओर व्यवहारिक रूप में वह इस देश में संकट को अधिक जटिल करने और आइसिस जैसे विभिन्न आतंकवादी गुटों को बनाये रखने के लिए भूमि भूमिका तैयार करता रहता है। यही खेल वह भारत में भी खेलता है जिससे भारत वर्षों से पाकिस्तानी आतंकवाद का शिकार है. एक ओर वह भारत से दोस्ती करता है तो दूसरी ओर पाकिस्तान को क़र्ज़ के साथ खतरनाक हथियारों से लैस कर देता है जिसके कारण भारत को अपनी सुरक्षा खतरे में नज़र आने लगती है.
     
जहाँ तक सीरिया का सवाल है, सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार के अनुसार, हलब के बारे में पश्चिम की बौखलाहट, सीरिया में सेना की हालिया प्रगति और आतंकियों की दयनीय होती स्थिति, और सीरिया में अपने अंतिम मोर्चे के हाथ से निकल जाने की अमरीका और ब्रिटेन फ़्रांस जैसे घटकों की भावना का परिणाम है। (alpst-POLITICS)
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