अब ईरान की बारी है : ( 4 ) / रंजन जैदी
ज़ुल्म और ज़ालिम की उम्र अधिक नहीं हुआ करती है. दुनिया ने देखा कि शाहे-ईरान की कैंसर रोग से पीड़ित होकर सन १९८८ में काहिरा में मृत्यु हो गई और शाहपुर बख्तियार की पैरिस में ही हत्या कर दी गई. अमेरिका ने शाहे-ईरान के अकूत खजाने को बड़ी होशियारी से ज़ब्त कर लिया और कालांतर में ईरान की इंकलाबी हुकूमत को आगाह किया कि या तो वह शीघ्र अपने न्युक्लीयी कार्यक्रम को बंद करे या इसके नतीजे भुगतने के लिए तैयार हो जाये. वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने कहा था कि लीबिया पर की गई कार्यवाई उसकी तेल संपदा पर कब्जा करने की अमेरिकी सहित कुछ देशों की एक शुरुआत भर है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थन प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय सेनाओं के हस्तक्षेप की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि वह इस कार्रवाई को लीबिया की तेल संपदा पर कब्जे के अमेरिकी प्रयास के रूप में देखते रहे है।उन्होंने कहा था कि यह बेहद खेदजनक है क्योंकि जहां युद्ध में अनेक मासूम लोगों की जानें गईं, वहीं कई और युद्ध दुनिया पर लद जायेंगे जिसमें हजारों-लाखों लोगों की जानें चली जायेंगीं. यह युद्धों का फोबिया है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को साम्राज्यवादी देश के नाम से संबोधित करने वाले शावेज ने कहा था कि साम्राज्यवाद लोगों की जान की कितनी परवाह करता है, यह अफगानिस्तान और गाजा में किये जाते रहने वाले हमलों को देखकर अनुमान लगाया जा सकता है, जिनमें अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं. कारण यह है कि ऐसे देश केवल लीबिया का तेल चाहते थे. इसमें संयुक्त राष्ट्र की भूमिका सवालों के घेरों से घिर चुकी है जिसने अपने मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि क्या लीबिया में सचमुच गृहयुद्ध हो रहा था? ह्यूगो शावेज ने कहा कि उन्होंने देखा है कि विद्रोही तोपें चला रहे थे और नाटो व अमेरिका की सेनाएं उनका समर्थन कर रही थीं. यह एक देश के आंतरिक मामलों में सीधा-सीधा हस्तक्षेप था. रूस और चीन जैसे देश भी किसी भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं थे लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस का कहना था कि अरब लीग ने इस तरह के उपायों का आग्रह किया था. अमरीका ने लीबिया पर आर्थिक पाबंदियों को और कड़ा करते हुए लीबिया की 16 सरकारी कंपनियों की परिसंपत्तियों को सील कर दिया था. जबकि जर्मनी का कहना है कि आज भी लीबिया को लेकर अमेरिका से अनेक सवाल किये जाने बाकी हैं जिन्हें अंततः देर-सवेर उसे जवाब देना होगा. बड़ी संख्या में लीबिया के नागरिक जो देश को छोड़कर मिस्र या अन्य देशों में चले गए थे, उनमें असंख्य नागरिकों की वापसी अभी भी नहीं हुई है. अब भी आम लोग, औरतों और बच्चों का इलाके छोड़ना जारी है. अमेरिका की एजेंसी की दलील है कि ऐसे वही लोग हैं जो काम की तलाश में अपने इलाक़े छोड़ते रहते हैं. अब ईरान पर हमले की तैयारी हो रही है. अभी हाल में केलिफोर्निया के ऐरो वयरेंमेंट नमक टेक्नोलोगी कंपनी की मदद से नाटो के ख़ुफ़िया तंत्र ने ड्रोन विमानों की जगह १६.५ से.मी.के अत्यंत आधुनिक जासूसी यन्त्र NAV यानी नैनो ऐरो व्हीकल (जो ह्युमिंग बर्ड जैसा दिखता है और जो १९ ग्राम वज़नी AA बैटरी के सेल के बराबर है) अमेरिकी डिफेन्स अडवांस रिसर्च प्रोजेक्शन एजेंसी के लिए इंजीनियर मेट केनान ने अपने अन्य इंजीनियर साथियों के साथ तैयार किया है और जिसे जासूसी के लिए ईरान के आकाश पर सफलता पूर्वक छोड़ा गया. वैज्ञानिकों और नाटो के अधिकारियों ने इसे एक सफल परीक्षण बताया. १८ कि.मी. कि गति से ह्युमिंग बर्ड ने ईरान के आकाश में अपना सफल परीक्षण कर महत्वपूर्ण गुप्त सूचनाएँ लिए अपने ठिकाने लौट आया और किसी को कानों-कान संदेह तक नहीं हुआ कि यह कोई पक्षी नहीं बल्कि जासूसी का अत्यंत आधुनिक यन्त्र ह्युमिंग बर्ड था. इसपर ४० लाख डालर का खर्च आया है. इस खबर को अनेक अंतर्राष्ट्रीय समाचारपत्रों ने भी प्रमुखता से जगह दी है. यह परिंदा बिना किसी में संदेह को जन्म दिए किसी भी देश के सामरिक व अत्यंत संवेदनशील जगहों तक पहुँचने में सक्षम है और बड़ी ही आसानी से अपने नन्हें आधुनिक वीडियो कैमरों से फ़िल्में उतार सकता है. भविष्य में इस अत्यंत आधुनिक यन्त्र का इस्तेमाल भूकंप, प्राकृतिक आपदा और गुप्त आणविक ठिकानों का पता लगाने में भी किया जायेगा. यदि ईरान पर अमेरिका ने आक्रमण किया तो इस ह्युमिंग बर्ड का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जायेगा.
Mob: 9350934635; alpsankhyaktimes94gzb.com

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