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| शाह ईरान : इन्कलाबे-ईरान से पूर्व |
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| शाहे-ईरान रज़ाशाह पहलवी अपने बच्चों के साथ |
अमेरिका, ईरान के तेल के कुंवों को भी उन खुफिया पाइप लाइनों से जोड़ना चाहता है जिन्हें खाड़ी युद्ध के दौरान नाटो देशों द्वारा प्राप्त संरक्षण और इस्राइली वैज्ञानिकों की मदद से बेहद आधुनिक तकनीकी का प्रयोग कर बिछाया गया था. तेल चोरी करते रहने में माहिर क्वैत और क़तर की श्रृंखला में जबसे इस्राईल की पाइप लाइनें भी आ जुड़ीं, तभी से स्थिति में बदलाव आने शुरू हो गए. ईरान के पास पहले से ही अमेरिकी तकनीकी रही है जिसे कालांतर में इस्तेमाल करते रहना फायदे का सौदा नहीं रहा है. संयोग यह है कि खाड़ी देशों के तेल उगाही का स्रोत का केंद्र एक ही है और ज़मीन के गर्भ में कौन कहाँ तक पहुँच रहा है, अंतर्राष्ट्रीय कानून भी प्राप्त सबूतों पर किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने में संकोच से काम लेता है. ईरान के तेल पर प्रतिबन्ध लगाकर अमेरिका उसके तेल पर अपना एकाधिकार बनाना चाहता है. इस्राईल के नज़रिए से देखा जाये तो उसकी दिलचस्पी इरान के तेल में कतई नहीं है. ईरान, मुस्लिम देशों में मात्र एक ऐसा देश है जिसने इराक से ८ वर्षों तक युद्ध किया और अब उसकी दृष्टि में वह एटामिक पावर वाला देश बनने जा रहा है जबकि सूत्र बताते हैं कि ईरान को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है. इस्राईल नहीं चाहता कि अब उसके इर्द-गिर्द मुस्लिम देशों में उसे चुनौती देने की स्थिति में कोई अन्य शक्तिशाली देश बाकी रहे. इस नज़रिए से भी ईरान पर नाटो के हमले ज़रूरी हो जाते हैं. अफगानिस्तान, ऐराक, मिस्र, लीबिया और तीउनेशिया जैसे मुस्लिम देशों का राजनीतिक पतन इस बात का प्रमाण भी है.अब ये देश शायद ही कभी अपने पैरों पर खड़े हो पायें. ईरान से तो अमेरिका को अपने कुछ पुराने हिसाब भी चुकाने हैं क्यूंकि उन हिसाबों का रिश्ता उसके आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है. सर्व प्रथम : अमेरिका के राजनीतिक प्यादे यानि शाह ईरान को इन्कलाबे-ईरान के दौरान देश छोड़कर वहां से भागना पड़ा था. यही नहीं बल्कि उस समय के हताश और निराश पुनः चुनाव लड़ रहे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के समक्ष अमेरिकी दूतावास को ईरानी छात्र अपहरणकर्ताओं से अमेरिकी बंधकों को मुक्त कराने की चुनौती अहम् थी. इसका उनके चुनाव पर असर पड़ रहा था. इसलिए उन्होंने अपने दूत माइक फर्लिन को तेहरान के लिए रवाना किया कि वह जिमी कार्टर द्वारा कुरान पर किये गए हस्ताक्षर को लेकर अल्लामा खमैनी के पास जाएँ और उनसे कहें कि जिमी कार्टर इस्लाम के दुश्मन नहीं हैं और वह ईरान की सलामती के समर्थक हैं. लेकिन माइक फर्लिन को तेहरान एयरपोर्ट पर उतरते ही गिरफ्तार कर लिया गया. पता चला कि माइक फर्लिन जाली पासपोर्ट पर तेहरान पहुंचा था और वह नहीं चाहता था कि ख़ुफ़िया मिशन कभी दस्तावेजी सबूत बने. इस खबर से जिमी कार्टर ने आवेश में आकर सी.आई इ. के वरिष्ठ अधिकारीयों के साथ आपातकालीन बैठक की जिसमें वरिष्ठ सेना अधिकारी भी मौजूद थे. जिमी कार्टर ने आदेश दिया कि उन्हें अमेरिका में ही हर हालत में अपने सामने सशरीर अल्लामा खमैनी चाहिए. राष्ट्रपति का आदेश पाकर तुरंत अत्यंत आधुनिक हथियारों से लैस तीन हेलीकाप्टर तेहरान के लिए रवाना हो गए. उन दिनों इमाम अल्लामा खुमैनी तेहरान के हुसैनिया जमारान में रहते थे. ख़ुफ़िया सूचना मिलते ही जहाँ एक ओर सुरक्षा बढ़ा दी गई वहीं अधिकरियों ने इमाम खमैनी की रिहाईशगाह के इर्ग-गिर्द रह रही आबादी को हटाने की अल्लामा इमाम से अनुमति मांगी जिसे इमाम खामिनी ने ख़ारिज कर दी. उन्होंने कहा कि रिहाइशी इलाके को ख़ाली करने से पहले मकान मालिकों की रज़ामंदी ज़रूरी है. उन्होंने अधिकरियों से कहा कि उनकी निजी सुरक्षा की चिंता न की जाये अब्रह के लश्कर से अबाबील के ज़रिये खाना-इ-काबा की हिफाज़त करने वाला खुदा हम सबकी हिफाज़त कर रहा है. ........और सचमुच गुप्तचरों की ओर से खबर आई कि तीन अमेरिकी जंगी हेलीकाप्टर अपने सशस्त्र जाँबाज़ों सहित तबस के रेगिस्तान में परस्पर टकराकर तबाह हो गए है. ...... (जारी-३) Mob: 09350934635
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