उर्दू शायर शकूर अनवर की शायरी / रंजन ज़ैदी https://alpst-poltics.blogspot.com/2023/03/blog-post.html

शकूर अनवर, जिसके शब्द-नाद में राजस्थान के लोक-गीतों की मस्ती, उसकी सांसों में उर्दू की महक, विचारों में दार्शनिक-चिंतन और गीतों में मस्तिए-रिन्दाना की दिलकशी ऐसे फूटकर मन-मस्तिष्क पर जादू बनकर फुहारों की शक्ल में ऐसे बरसने लगती है मानो राजमहल पर चारों ओर से बर्फ़ के तोदे फूल बनकर गिर रहे हों जैसे चमेली उसे नहलाने लगी हो और उर्दू उन फूलों को चुन-चुनकर अपनी चुनरी में इकठ्ठा करने लगी हो, वह भीग गई हो और पार्श्व में अनेक राग तड़पने लगे हों.... बचाव आबरू उर्दू की लुट न जाये कहीं ग़ज़ल के जिस्म को लोगों ने बे-लिबास किया यह शेर शकूर अनवर का है. व्यक्तिगत रूप से मैं उन्हें नहीं जानता लेकिन उनका काव्य-संकलन 'शेर-दर-शेर आईना'. उन्होंने बीकानेर से मुझे यह संकलन बड़ी मुहब्बत के साथ डाक से भेजा था. दरअस्ल उनका यह तोहफ़ा मेरे लिए उनकी एक महत्वपूर्ण रचनात्मक अभिव्यक्ति का आईना जैसा ही है जिसमें मैं खुद को भी झांक कर देखते रहने का अभ्यास करने लगा हूँ. शकूर अनवर पेशे से उर्दू के अध्यापक रहे हैं. उनका मानना है कि ग़ज़ल मात्र, इश्क़-आशिक़ी, मुहब्बत के अतिरिक्त और भी बहुत कुछ है. शायरी का समाज और देश की सियासत, उसकी समस्याओं और सामाजिक सन्दर्भों में जीवन के मर्म और उसके विभिन्न रहस्यों से व्यक्ति को जोड़ती है, उनका अर्थ समझाती है और मुहब्बत की इबादत को इहलोक से परलोक को जोड़कर मानस-मन की तंत्रिकाओं को आल्हादित करती है, उर्दू ने अपने माध्यम से ऐसे अर्थों को जहाँ एक ओर नई ऊर्जा प्रदान की वहीं अपनी कोमलता, कल्पनाशीलता और अपने भीतर छुपे संगीत की गेयता को भी प्रदर्शित करती है. यानि, 'कितने चेहरे दिखाए ग़ज़लों ने, शेर-दर-शेर आईना' निकला. कुछ अशआर देखें..... इश्क़ की सल्तनत मिले उसको उसके सर पर हुमा का साया हो
. आज रिवायती शायरी में कहने को बहुत कुछ नहीं होता है. 193 पृष्ठों पर बिखरी ग़ज़लों में मुझे बहुत कम ऐसे शेर नज़र आये जिनकी मैं प्रशंसा कर सकता था फिर भी कुछ बहुत अच्छे अशआर भी पाठकों को पसंद आएंगे जिन्हें पढ़कर मैंने ऊपर अपने भाव व्यक्त किये हैं.---------------------------------------------------------------------------------------- इस मंच से उठने वाली हर आवाज़ देश और समाज के बदलते राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समीकरणों को दिशा प्रदान करती है. समाज व राष्ट्र को अप्रदूषित, भयमुक्त, स्वच्छ और सशक्त लोकतंत्र का नया स्वर प्रदान करें।/ Admin

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