सत्यमेव जयते! आशियाना ग्रीन वेफैयर रेजिडेंट्स एसोसिएशन की बड़ीजीत

     
 इंदिरापुरम (ग़ज़िआबाद   ब्यूरो) : उपलब्ध  समाचारों के अनुसार  मेरठ स्थित फर्म्स , सोसाइटीज़  एवं चिट्स फंड के क्षेत्रीय कार्यालय में एक ऐतिहासिक निर्णय के साथ भ्रटाचार पर कहीं तक लगाम लगा दी गई है. इस निर्णय से उन सभी रेसीडेंशल सोसाइटीज़ को लाभ पहुंचेगा जिन्हें अब तक असोसिएशन के कथित पदाधिकारी सेवा के नाम पर अपनी कमाई का बड़ा जरिया बनाने लगे थे. कोर्ट के निर्णय से शायद अब इस तरह के भ्रष्ट लोगो पर लगाम लगाई जा सकेगी। 
       खबर के अनुसार डिप्टी रजिस्ट्रार  द्वारा इंदिरापुरम  स्थित  हाईटेक सोसाइटी आशियाना ग्रीन  की वेफैयर रेजिडेंट्स एसोसिएशन  से सम्बंधित गहरे विवाद का न्याय-संगत  निबटारा करते हुए  सम्बंधित दोषियों पर अनेक आरोप सत्यापित कर दिए.
     आरोप लगते हुए कोर्ट ने कहा कि सम्बंधित आरडब्लयुए अपने बाइलॉज को दरकिनार कर सोसाइटी रजिस्ट्रेशन ऐक्ट 1860  का निरंतर उल्लंघन करती रही थी. उन्होंने कहा िक़ इससे उचित उद्देश्यों के अनुरूप पंजीकृत नियमावली के अनुसार सोसाइटी
शासित नहीं होती थीअतः पुरानी  पंजीकृत नियमावली को तत्काल प्रभाव से निरस्त  किया जाता है
      अपने निर्णय में उन्होंने कहा कि नई  पंजीकृत नियमावली  के बनाये जाने हेतु सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन ऐक्ट 1860 की धारा 24 (5) में  निर्देश दिए जाते हैं. कि अब डिप्टी रजिस्ट्रार के आदेशानुसार-आरडब्ल्यूए की कार्यरत प्रबंध समिति का वैधानिक अस्तित्व बाक़ी नहीं रहेगा.निर्णय के अनुसार  प्रबंध-समिति अगली पंजीकृत नियमावली के अनुसार सदस्य बनाने चुनाव होने तक 'केयरटेकर' की भांति मात्र दैनिक क्रिया-कलापों का संचालन करेगी।
      नए निर्देश के अनुसार 'आदेश के प्राप्त होने के एक सप्ताह के अंदर' संस्था के तथाकथित अध्यक्ष/सचिव द्वारा जीबीएम बुलाई जाएगी। जीबीएमसदस्यों वाली एक समिति का गठन करेगी जो समिति-नियमावली
का पुनर्लेखन और निरीक्षण कर प्रत्येक रेज़िडेंट की सम्मति साहमति लेगी. समिति  नियमावली के अंतिम प्रारूप का पुनरीक्षण कर समस्त पक्षकार की संयुक्त संस्तुति के साथ कार्यालय पंजीकरण के लिए भेजा अजयेगा. कार्यालय पंजीकरण की संस्तुति और पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर आरडब्ल्यूए की औपचारिक सदस्यता  शुल्क वसूली वैध होगी
      सूचना के अनुसार आशियाना ग्रीन्स में काफी समय से रेजिडेंट्स के बीच आरडब्ल्यूए के उच्च पदाधकारियों के बीच बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय अनियमितताएं संज्ञान में लाई जा रही थीं
      रेजिडेंट्स का आरोप था कि अवैध रूप से सिंकिंग फंड तक से पैसा निकाल कर अनावश्यक मदों में खर्च किया जा रहा था.
      डीज़ल और दूसरे मदों में धड़ल्ले से  चोरियां हो रही थीं.
      रेजिडेंट्स से अकारण उनकी निजी गाड़ियां खड़ी करने पर  उनसे अवैध  हरजाना वसूला जा रहा था. कुछ रेजिडेंट्स एक कार के अतिरिक्त 4 कारें, जीपें  सेटिंग के साथ खड़ी करते थे, जिनके ड्राइवरों को कैम्पस में आने, चिल्ड्रन पार्क की छतरी में बैठने तक की आज़ादी दे दी गई थी, इससे उन बड़े प्रशासनिक अधिकारीयों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया था जो आईएएस, आईआरएस, पुलिस प्रशासनक पदों पर परवार सहित रहते हैं. एक बड़े मंत्री का परिवार भी कैम्पस में रहता है लेकिन संस्था के पदमुक्त सचिव पंकज राय और असोसिएशन के अनधिकृत अध्यक्ष डीके शर्मा (पासपोर्ट अधिकारी गोवा) के आतंक और भ्रष्टाचार के कारण आशियाना के बच्चे और महिलाएं पूर्ण रूप से असुरक्षित हो गई थीं.   
      बीजेपी के  नेता (वर्तमान गृहमंत्री के कथित स्वागत सत्कार के लिए) संस्था के पदमुक्त सचिव पंकज राय तथा असोसिएशन के अनधिकृत अध्यक्ष डीके शर्मा (पासपोर्ट अधिकारी गोवा) द्वारा ग़ैर कानूनी ढंग से ARWA के खाते से पैसा खर्च किया जा रहा था
   कुछ रेजिडेंट्स एक कार के अतिरिक्त 4-4 कारें, जीपें  व्यक्तिगत संबंधों प्रभाव के कारण खड़ी करते थे, उनसे स्थानीय रेजिडेंट्स परेशान होते जा रहे थेउनके ड्राइवरों को (पुलिस वेरिफिकेशन के बिना) अवैध रूप से कैम्पस में आने की आज़ादी दे दी गई थी जिससे  अज्ञात आगंतुकों और असामाजिक तत्वों का कैम्पस के अंदर आना जाना आसान हो गया था
पंकज राय
   इन परिस्थितियों में केवल आशियाना की महिलाओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी, बल्कि उनका बच्चों के साथ उजड़ गए चिल्ड्रन पार्क तक में बैठना बंद हो गया था और अनिधिकृत रूप से ड्राइवरों ने पार्क के सिरे में बनी विश्राम छतरी तक पर कब्ज़ा कर लिया था.

         असामाजिक तत्वों के आने के कारण   घरों की सुरक्षा तक खतरे में पड़ने लगी थी. तांबे और पीतल के कुंडे चोरी होने लगे और  बहरूपियों के रूप में चोर उचक्के आसानी से अंदर आकर वारदात कर जाया करते थे. जैसे नई  क़ीमती साइकिलों की चोरी। एबीपी न्यूज़ के एक प्रोड्यूसर के पुत्र को जिस दिन नई साईकिल दी गई, उसी रात उसकी चोरी हो गईपदमुक्त सचिव पंकज राय  से शिकायत करने पर भी उन्होंने  कोई औचत्यपूर्ण ज़िम्मेदारी  जवाबदेही  नहीं ली. उस समय उनका व्यवहार भी ग़ैर ज़िम्मेदाराना कहा जा सकता है
    इनके अतिरिक्त अनेक दुष्कर्मों से तंग आकर आशियाना के रेजिडेंट्स ने अंततः अपने योग्य अधिवक्ता रेज़िडेंट (पु.) सुजीत सिंह और महिलाओं का प्रधिनित्व कर रही गृहणी श्रीमती अंजू त्यागी के नेतृत्व में एकजुट हुई महिलाओं ने न्यायलय की शरण ली जिसमें सत्य एवं न्याय की विजय हुई. अभी वित्तीय अनियमितताओं का लेखा-जोखा अदालत के संज्ञान में विचाराधीन है. सत्यमेव जयते.  
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