'आगमन' का विशेषांक अब बाजार में है.
- गीतकार गोपालदास नीरज के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालता आगमन।
- सफलता सरोज का कौशल था कि अँधेरे को धरा पर रुकने नहीं दिया।
प्रस्तुत अंक महाकवि गीतकार गोपालदास नीरज के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालता है जिन्हें अभी हाल में कानपुर स्थिति डीएवी कॉलेज के सभागार में छात्रों ने सम्मानित किया था. सफलता सरोज ने इसी कालेज से पीएचडी की उपाधि ली थी. आगमन के विशेषांक की वह संपादिका हैं. इस अंक में खुद नीरज ने अपने जीवन के कई पोशीदः राज़ों पर से परदे उठाये हैं. 'सूंघने पर पुष्प भी कब अर्चना के काम आया....' 'आदमी हूँ, आदमी के काम आता हूँ.' शेर जंग गर्ग ने कहा, यह तार सप्तक के बाद का करिश्मा था कि गीत-काव्य के आसपास (1941 में) नीरज कवि का उदय हुआ. जिसने, कुंअर बेचैन के शब्दों में न घमंड का सहारा लिया न किसी तरह के गुमान का ताप, वह तो भारतीय संस्कृति की पावन सुगंध को सुवासित करता हुआ समाज को आंदोलित करता रहा. उन्हीं के शब्दों में नीरज के काव्य लेखन की एक विस्तृत काल-अवधि है जिसमें उनका फक्कड़पन, फकीरी उनके स्वाभाव की पहचान है. उर्दू के जाने-माने शायर मुनव्वर राना का कहना था कि नीरज ग़ज़ब का शायर है, जिसकी विलक्षण स्मरण-शक्ति उसकी शायरी को भरपूर ऊर्जा देती है. .नीरज 'कभी अपनी महरूमियों पर इतना रोया कि सावन शर्मिंदा हो गया. कभी अपनी उदासी पर इतना हंसा कि कैदखानों की दीवारें हिल गईं. उनके अनुसार, वह जिस घास पर पाँव रखता है, वह दूब मरती नहीं, रंग-बिरंगे फूलों से खिल उठती है. उसके अपने अंतःकरण में वास्तविक आनंद के ऐसे गुलाब खिलते हैं जो मुश्किलों में भी उसकी शाइरी को अपनी महकास से सरशार कर जाते हैं.
विश्वास नहीं होता कि मैं यानि 'रंजन ज़ैदी', आज नीरज जी के साहित्यिक व्यक्तित्व की महत्ता पर अपने विचार रख रहा है. उस शायर के बारे में जो अपने गीत की लय से एक लकीर खींचने की सलाहियत रखता है.
- यह सच है कि जिन लोगों ने अपने समय में संवेद संकलन के लिए जी-तोड़ मेहनत की, उन लोगों के पास गीत थे ही नहीं। उनकी रचना-प्रक्रिया या रचना-शक्ति बहुत कमज़ोर थी। चाहे वह ठाकुर प्रसाद सिंह हों या शंभूनाथ सिंह या चाहे राजेंद्र प्रसाद सिंह, या रवींद्र भ्रमर।
नीरज के सम्बन्ध में वरिष्ठ साहित्यकार मैत्रेयी पुष्पा स्वीकारती हैं कि अनकहे-अनचाहे रिश्ते भी संवाद कर सकते हैं. उन्होंने नीरज की कविता को बीहड़ गाँव में नंगी खाट पर बैठकर 16 वर्ष की उम्र में पढ़ी थी, पढ़ी तो पढ़ती चली गई. उम्र ने तब जो पगडण्डी दिखाई, उसपर नीरज अदब के राहबर बन गए, गीत काजल हो गए.'प्यार अगर थमता न पथ में/ऊँगली इस बीमार उम्र की / हर पीड़ा वेश्या बन जाती.... ' डॉ. अशोक चक्रधर ने कहा, 'नीरज सखा-भाव की साख हैं. प्रोफ़ेसर विजय बहादुर को स्वीकारना पड़ा कि नीरज एक सच्चा कवि था.'एक गाँव चल रहा अलग-अलग और दूसरा इसी के साथ है....'
मैंने कहता हूँ, वह कबीर है. वह हर ज़माने के साहित्य की रफ़्तार है, क्योंकि हर ध्वनि की
एक रफ़्तार होती है। हर रफ़तार की एक परख। पारखी हिलते
हुए हाथ की गति और ध्वनि को पहचान लेता है। इसी में लय की भी पहचान छुपी होती है। कोई
मुझसे पूछे कि रेखांकन में लय? क्या है लय?
- मेरा जवाब होगा कि रेखांकन लय की एक धारा है जिसकी एक लकीर में गांधी जी जन्म ले लेते हैं और वही लकीर गीत के बोल को काट देती है। मेरी मान्यता यह है कि लय का अपना अलग अस्तित्व होता है। लय का इस्तेमाल जो जितना करेगा, वह उतना ही बड़ा कलाकार या फ़नकार बन जायेगा।
यह सफलता सरोज का कौशल था कि अँधेरे को धरा पर रुकने नहीं दिया। डॉ. महाश्वेता चौधरी, अशोक अंजुम, विभु श्री, डॉ. अरुणा दीक्षित, डॉ. हरिदत्त व्यास, आनंद विक्रम त्रिपाठी, डॉ. अल्पना सुहासिनी, डॉ. सी. बसंता, डॉ. धनञ्जय सिंह, प्रमोद कुमार पाण्डेय, नरेश सिहाग, डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी, रवि कुमार गौण, इंद्राप्रसाद अकेला, डॉ. प्रेम कुमार (नीरज से बातचीत), के अतिरिक्त डॉ. सफलता सरोज के मनोद्गार अत्यंत महत्वपूर्ण है.
जीत हमेशा प्रेम की होती है. प्रेम जब दिशाहीन या स्वार्थ-लोलुपता से ग्रस्त हो जाता है, इंसान की आत्मा मर जाती है.
इसीलिए नीरज प्यार करते रहने का हौसला बढ़ाते रहे. 'प्रेम बिन मनुष्य दुश्चरित्र है. डॉ. सफलता सरोज रहस्योद्घाटन करती हैं कि नीरज डॉ चाँद कुमारी की प्रेमिका नहीं थीं. उनके पति डॉ. किशन और स्वयं चाँद कुमारी नीरज को बहुत पसंद करते थे.
इसीलिए नीरज प्यार करते रहने का हौसला बढ़ाते रहे. 'प्रेम बिन मनुष्य दुश्चरित्र है. डॉ. सफलता सरोज रहस्योद्घाटन करती हैं कि नीरज डॉ चाँद कुमारी की प्रेमिका नहीं थीं. उनके पति डॉ. किशन और स्वयं चाँद कुमारी नीरज को बहुत पसंद करते थे.
कुल मिलाकर प्रस्तुत अंक निश्चय ही संग्रहणीय है जिसका श्रेय डॉ. सफलता सरोज को दिया ही जाना चाहिए. अंक के मूल संपादक पवन जैन बधाई के पात्र हैं जिन्होंने पूरे सहस के साथ इस अंक को पाठकों तक पहुंचाने में मदद की.
नई जंग यह 'ब्लाग-मंच' आपका है। इस मंच से उठने वाली हर आवाज़ देश और समाज के बदलते राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समीकरणों को दिशा प्रदान करती है. यह 'नई जंग' एक नये युग को नया इतिहास दे सकती है. आइये! सब कंधे से कंधा मिलाकर प्रगतिशील और जागरूक भारत और उसके विकासशील समाज व राष्ट्र को अप्रदूषित, भयमुक्त, स्वच्छ और सशक्त लोकतंत्र का नया स्वर प्रदान करे। आपकी रचनाएं आमंत्रित हैं। https://zaidi.ranjan20@gmail.com -लेखक

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