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| 'शिया -प्वाइंट'के अध्यक्ष ज़हीर जैदी |
उत्तर प्रदेश इन दिनों चुनाव के मौसम से शराबोर है. हर छोटे-बड़े नेता की ज़िन्दगी के इस मौसम में तेज़ आंधियां
, बवंडर और तूफ़ान आये हुए हैं. इन नेताओं की आँखों में हसीन सपनों की फसलें भी लहलहा रही हैं. मौसम की तेज़ सियासी बारिश और पाला उनकी फसलों को बर्बाद भी कर सकता है, इस डर ने नेताओं की नींदें भी हराम कर दी हैं. अन्ना या उनकी टीम कितना ही डर दिखाए, सियासत की इंडस्ट्री के विस्तार और लाभ में आंकड़े कम नहीं आंके जा रहे हैं. पुलिस अपनी नौकरी को दांव पर लगाये हुए है लेकिन खुश है. कारोबार सही चल रहा है. पार्टियाँ एक-दूसरे का ब्लैक-मनी बरामद करवा रही हैं, माया की माया अपरम्पार. सब व्यस्त रहें, मुद्दों से दूर. १५ लाख पुलिस से बरामद कराओ, 5 करोड़ चुनाव में खर्च करो. इन्वेस्टमेंट में ऐसा होता है. ये एक्स्ट्रा सियासी एक्सपेंडिचर है. लाभ के लिए खर्च भी ज़रूरी है. चुनाव के मौसम की तेज़ तूफानी बारिश में बरसाती नाले नालियां, सड़कें-गलियां और रुकावटों की गंदगियों को साफ कराया जाता है, चुनाव-आयोग ये काम सहूलियत से कर ही रहा है. चुनाव-चिन्ह अजाने में जीवित हो उठे हैं. जो नहीं भी हैं, उन्हें जीवित किया जा रहा है. इलाकाई सियासी मौसम में ऐसा होना स्वाभाविक है. इलाकाई नेता भी मेंढक की तरह टर्राने लगते हैं. गली-मुहल्लों में न जाने कहाँ से एकाएक बेदारी सी आ जाती है. हक़ की लड़ाई में जीत की हिस्सेदारी का ख्याल एकाएक उभर आता है. मिसाल के तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लगभग २० से अधिक सीटों पर शिया मुस्लिम समुदाय के १.५ % वोट नेताओं की तकदीर का फैसला कर सकते हैं. ऐसे ही जाट-बेल्ट के १.३ % वोट भी इलाके की २० सीटों पर अपना दबाव बना सकते हैं. अजीत सिंह अब कांग्रेस से मिलकर अपने दबदबे में और एनर्जी बूस्ट करेंगे. देशभर में उत्तर प्रदेश के शिया वोटर बिखरे हुए हैं, (मात्र दिल्ली में ही उत्तर प्रदेश का ५०% शिया उच्च-पदों, सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों और निजी कारोबारों से सम्बद्ध है). और यह समुदाय उत्तर प्रदेश की सियासी हैसियत का मिज़ाज तय कर सकता है लेकिन
'शिया -प्वाइंट' और शाहे-मर्दां, दिल्ली की
अंजुमने-हैदरी मैनेजिंग कमेटी के अपने आतंरिक मतभेद इतने अधिक हैं कि वे उन्हीं से उबर नहीं पाते हैं और लाभ मोइद खां तथा उस जैसे अन्य लोग उठा ले जाते हैं क्यूंकि मुईद खां को कांग्रेस के
सलमान खुर्शीद और
अहमद पटेल का संरक्षण प्राप्त है. शियों की अपनी अन्य अनेक सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याएं हैं जिनपर नवगठित
'शिया प्वाइंट ऑफ़ इंडिया' यानि
SPI ने अपनी प्रमुख बैठक में प्रकाश डाला है.
SPI अभी तक शिक्षित युवाओं का एक सशक्त सामाजिक संगठन है जो जातिवाद
से मुक्त भारत को भ्रष्ट-मुक्त, सशक्त, समृद्ध आर्थिक राष्ट्र के रूप में देखना चाहता है, गत वर्षों में उसने अपने मूक आन्दोलन के अंतर्गत नया जनाधार तैयार किया है जो निश्चय ही उत्तर प्रदेश के चुनाव पर भी अपना असर डालेगा, यदि उसके आकलन पर भरोसा किया जाये तो कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में इस बार के सियासी समीकरण और नतीजे न केवल आश्चर्यजनक दिखाई देंगे बल्कि चौंकाने वाले भी होंगे. 09415111271 alpsankhyaktimes94gzb.com
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