अन्ना हजारे का अभियान..../रंजन जैदी
अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम में बीते हुए समय के दौरान दुनिया के कुछ खास मुल्कों में काफी उथल-पुथल रही.
بین الاقوامی سیاسی واقعات میں گزرے ہوئے وقت کے دوران دنیا کے کچھ خاص ملکوں میں کافی اتھل -- پتھل رہی.
1. کیا ان کا لوک پال بل ملک کی قوت ارادی کے بغیر اسے چرتروان بنا دے گا ، گمراہ نہیں ہوگا؟
यह जानते हुए भी कि अमेरिका सख्त आर्थिक बोहरान से गुज़र रहा है और अभी उसे आगे भी गुज़रना होगा,, नाटो की सेना का कुछ मुल्कों में हस्तक्षेप अभी भी जारी है. भारत के अंदरूनी मामलों में अपने बयान का दखल देकर यह जता दिया है कि उसकी चौधराहट में फर्क नहीं आया है. इस बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि अन्ना हजारे का आन्दोलन भ्रष्टाचार-विरोध की बैसाखी पर विपक्ष की लंगड़ी राजनीति के शतरंज की एक ऐसी चाल है जो मंदिर-मस्जिद विवाद के बाद अब चली गयी है और प्रतिपक्ष को लगता है कि इस बार ताज-तख़्त दूर नहीं है.
ऐसा हो भी सकता है. योग-गुरू स्वामी रामदेव के आन्दोलन के माध्यम से देश ने कुछ समय पहले देखा भी था. यदि समझदार लोगों ने स्थिति को काबू में न कर लिया होता तो परिणाम भयानक होते जिसकी कल्पना करना आसान नहीं है. एक बार फिर चुनौतियाँ सामने हैं.
मुझे कतई विश्वास नहीं है कि अन्ना हजारे देश की उन राजनीतिक पार्टियों के साथ है जो हर हाल में सत्ता पर काबिज़ होने के दांव पर दांव चल रही हैं. भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की उनकी ईमानदाराना कवायद पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए. उनके अपने समूचे जीवन में बहुत सी ईमानदाराना कवायदें जुडी हुई हैं. उन्होंने बहुत से विकास के काम किये हैं. उन्हें लेकर यह भी संदेह या लालच को लेकर नहीं सोचा जा सकता कि इस उम्र में वह संसद या विधान सभा में जाना चाहते हैं. हाँ, वह भ्रष्टाचार को लेकर क्षुब्ध हैं , इसमें कोई दो राय नहीं है.
भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी महाराष्ट्र में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं और तत्कालीन सरकारों व उनके निकायों से सम्बद्ध अधिकारियों से लड़ाइयाँ चलती रही हैं. लेकिन लोकपाल विधेयक के मामले ने उन्हें उनके जीवन का सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय-स्तर का नेता बना दिया जो अब सरहदें लांघकर विदेशों में भी अपनी जगह बना चुका है.
उनकी साख का प्रतिपक्ष अब लाभ उठाना चाहता है क्योंकि विपक्ष के पास इतना बड़ा अब कोई नेता नहीं है जो देश को एक जगह इकठ्ठा कर सके, प्रतिपक्ष को अपनी इस कमजोरी का पता है. उसके क्षेत्रीय सामंत दिल्ली की राजगद्दी पर निगाह गडाए बैठे हैं.एम्एनेस के एक भावी सामंत ने तो गुजरात के एक सामंत को चक्रवर्ती सम्राट बनने की सनद भी दे दी है. बदले में उसने उन्हें कौन-कौन से भावी षड़यंत्र दिए हैं, इसका खुलासा तो आने वाले दिनों में ही होगा. फ़िलहाल अन्ना हजारे और केजरीवाल को कुछ बातें समझनी ज़रूरी हैं-
१. क्या उनका लोकपाल बिल देश की इच्छाशक्ति के बगैर उसे चरित्रवान बना देगा, भ्रमित नहीं होगा?
2. क्या देश से भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें यह बिल उखाड़ फेकने में सक्षम है?
3. क्या राजनीतिक पार्टियाँ भविष्य में भ्रष्ट नहीं रहेंगीं, अन्ना के पास इसका कोई फार्मूला है?
(जारी/-२)
بین الاقوامی سیاسی واقعات میں گزرے ہوئے وقت کے دوران دنیا کے کچھ خاص ملکوں میں کافی اتھل -- پتھل رہی.
یہ جانتے ہوئے بھی کہ امریکہ سخت اقتصادی بوهران سے گزر رہا ہے اور ابھی اسے آگے بھی گزرنا ہوگا ، ، نیٹو کی فوج کا کچھ ملکوں میں مداخلت ابھی بھی جاری ہے. بھارت کے اندرونی معاملات میں اپنے بیان کا دخل دے کر یہ جتا دیا ہے کہ اس کی چودھراهٹ میں فرق نہیں آیا ہے. اس بیان کو سنجیدگی سے لیا جانا چاہیے کیونکہ انا ہزارے کا تحریک بدعنوانی -- مخالفت کی بےساكھي پر اپوزیشن کی لنگڑی سیاست کے شطرنج کی ایک ایسی چال ہے جو مندر -- مسجد تنازعہ کے بعد اب چلی گئی ہے اور حزب کو لگتا ہے کہ اس بار تاج -- تخت دور نہیں ہے.
ایسا ہو بھی سکتا ہے. یوگ -- استاد مالک رام دیو کے تحریک کے ذریعے ملک نے کچھ عرصہ پہلے دیکھا بھی تھا. اگر سمجھدار لوگوں نے صورتحال کو قابو میں نہ کر لیا ہوتا تو نتائج بھیانک ہوتے جس کا تصور کرنا آسان نہیں ہے. ایک بار پھر چیلنج سامنے ہیں.
مجھے قطعی یقین نہیں ہے کہ انا ہزارے ملک کی ان سیاسی پارٹیوں کے ساتھ ہے جو ہر حال میں اقتدار پر كابذ ہونے کے داؤ پر داؤ چل رہی ہیں. بدعنوانی پر نکیل کسنے کی ان يماندارانا قواعد پر شک نہیں کیا جانا چاہئے. ان کے اپنے سارے زندگی میں بہت سی يماندارانا كوايدے ربط والے ہیں. انہوں نے بہت سے ترقی کے کام کئے ہیں. انہیں لے کر یہ بھی شک یا لالچ کو لے کر نہیں سوچا جا سکتا کہ اس عمر میں وہ پارلیمنٹ یا اسمبلی میں جانا چاہتے ہیں. ہاں ، وہ بدعنوانی کے حوالے سے كشبدھ ہیں ، اس میں کوئی دو رائے نہیں ہے.
بدعنوانی کے خلاف ان کی مہاراشٹر میں مختلف سیاسی پارٹیوں کے رہنماؤں اور اس وقت کے حکومتوں اور ان کے منصبوں سے متعلقہ حکام سے لڑايا چلتی رہی ہیں. لیکن لوک پال بل کے معاملے نے انہیں ان کی زندگی کا سب سے بہترین اور انتہائی اہم قومی -- سطح کا لیڈر بنا دیا جو اب سرهدے لاگھكر بیرون ملک میں بھی اپنی جگہ بنا چکا ہے.
ان کی ساکھ کا حزب اب فائدہ اٹھانا چاہتا ہے کیونکہ اپوزیشن کے پاس اتنا بڑا اب کوئی لیڈر نہیں ہے جو ملک کو ایک جگہ اکٹھا کر سکے ، حزب کو اپنی اس کمزوری کا پتہ ہے. اس کے علاقائی سامنت دہلی کی راجگددي پر نگاہ گڈاے بیٹھے ہیں. اےمےنےس کے ایک مستقبل سامنت نے تو گجرات کے ایک سامنت کو چکرورتی بادشاہ بننے کی سند بھی دے دی ہے. بدلے میں اس نے انہیں کون -- کون سے مستقبل سازش دیئے ہیں ، اس کا انکشاف تو آنے والے دنوں میں ہی ہوگا. فی الحال انا ہزارے اور كےجريوال کو کچھ باتیں سمجھنی ضروری ہیں --
1. کیا ان کا لوک پال بل ملک کی قوت ارادی کے بغیر اسے چرتروان بنا دے گا ، گمراہ نہیں ہوگا؟
2. کیا ملک سے بدعنوانی کی گہری جڑیں یہ بل اکھاڑ پھےكنے کے قابل ہے؟
3. کیا سیاسی جماعتیں مستقبل میں بدعنوان نہیں رهےگي ، انا کے پاس اس کا کوئی فارمولہ ہے؟
(جاری / -2)
समाज को उसी के बनाये हुए संविधान के तहत अनुशासित रखने, उसे व्यवस्थित कर अगली पीढ़ियों को बेहतर संस्कार, भ्रातृत्व-प्रेम, सौहार्द, इतिहास, संस्कृति, प्रगतिशील विचारधारा और संवैधानिक अधिकार देने तथा परस्पर जीने के अधिकारों की सुरक्षा करने की सुसंस्कृत और परिस्थितिकीय चिंतन-धारा है. और alpsankhyaktimes-II.blogspot.com चिंतन की सम्पूर्ण अभिव्यक्ति का राजनीतिक मंच. मंच के इस पृष्ठ पर आपका स्वागत है.

बिल्कुल सही सवाल उठाया है आपने...मुझे पता नहीं क्यों लगता है कि अन्ना की मांगे जायज हैं, पर तरीका गलत। अभी तक उनका सामना महाराष्ट्र की सरकार और नगर पालिका जैसी संस्थाओं से होता रहा है। अन्ना को राज ठाकरे से ही निपटने में पसीने छूट जाते थे, ये दिल्ली है और यहां ठाकरे के पिता जी हैं....। अन्ना ने तमाम गल्तियां की हैं...
जवाब देंहटाएंप्लीज देखे http://aadhasachonline.blogspot.com/2011/08/blog-post_11.html#comments