रीमा कागती कुछ और ध्यान दे देती तो..---/रंजन ज़ैदी
फिल्म तलाश, दर्शकों को बांधे रखने वाली एक सुन्दर फिल्म है। हालाँकि इस तरह की कहानियों पर पहले भी अनेक फ़िल्में आई हैं लेकिन जिस रूप में तलाश को प्रस्तुत किया गया है, वह बेहद खूबसूरत है। रीमा कागती द्वारा निर्देशित फिल्म तलाश मूलतः आमिर खां, करीना कपूर और नवाजिश सिद्दीकी के बेमिसाल अभिनय की कलात्मक प्रस्तुति कही जा सकती है। नवाजिश की कलात्मक अभिव्यक्ति और उसकी प्रतिभा का और भी खुलकर इस्तेमाल किया जा सकता था, लेकिन रीमा कागती के हाथ बंधे महसूस होते हैं। करीना कपूर के अभिनय में जो चुम्बकीय आकर्षण और अदाकारी की परिपक्वता है, वह उसे बहुत ऊंचाइयों पर पहुंचा देती है। अभी उसे और ऊँचाइयाँ छूनी हैं, ऐसी संभावनाओं के बीज उसने तलाश में बिखेर दिए हैं। आमिर खान एक मल्टी-डाईमेंशनल आर्टिस्ट है जिसकी तुलना दूसरे खान कलाकारों से नहीं की जा सकती। आमिर धीरे-धीरे अभिनय का एक स्कूल बनता जा रहा है जैसे कभी दिलीप कुमार, राजकपूर और देवानंद हुआ करते थे। शाहरुख़ बाक्स आफिस का सेंसेक्स है, जिस दिन सेंसेक्स गिरेंगा, वह भी गिर जायेगा। उद्द्योग-जगत के लोग यह बात जानते हैं। आमिर को उस स्थिति में नहीं खड़ा किया जा सकता। वह लम्बी रेस का घोडा है। तलाश में सुरजन सिंह शेखावत के रूप में कहीं नहीं लगा कि सुरजन सिंह शेखावत की जगह आमिर खान है, लगा कि यह तो पोलिस इन्स्पेक्टर सुरजन सिंह शेखावत ही है। रानी मुखर्जी अपने अभिनय से दूर होती नज़र आ रही हैं। उनके पात्र में अभिनय की भरपूर गुंजाईश थी लेकिन वह दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पायीं। इससे बेहतर तो टीवी सीरियल की कोई भी महिला कलाकार अभिनय कर अपना प्रभाव छोड़ जाती। सह-कलाकारों ने भी अपनी भूमिका में जान बनाये रखी। उन्होंने भी अपने-अपने रोल में कम महत्वपूर्ण अभिनय नहीं किया है। लिप्स-पब्लिसिटी तलाश को अभी और आगे ले जायेगी। यदि तलाश की रफ़्तार के संतुलन पर रीमा कागती कुछ और ध्यान दे देती तो इसे ****स्टार तक मिल सकते थे। alpsankhyaktimes94gzb.com


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