पत्रकार शाहिद सिद्दीकी चर्चा में हैं

पत्रकार शाहिद  सिद्दीकी चर्चा में हैं। समाजवादी पार्टी मानती ही नहीं कि  वह  कभी पार्टी में थे। टीवी  चैनलों की राजनीतिक बहसों में शाहिद समाजवादी पार्टी की ओर  से ही वकालत करते रहे हैं.
      समाजवादी पार्टी की ओर  से कभी इसपर एतराज़ नहीं जताया गया कि  यह  आदमी  (शाहिद  सिद्दीकी) कौन है जैसा कि एक पत्रकार के पूछने पर श्री मुलायम सिंह यादव के मंत्री भाई शिशुपाल यादव ने मजाक उड़ाते हुए कहा, 'कौन सहीद, मोये न पतो।.. हम तो किसी को जानते नहीं।'           
      यही है देश का दुर्भाग्य। यही हैं वे कारण जिनकी वजह से पढा लिखा इन्टलैक्चुअल वर्ग राजनीति से दूरी बनाये रखना अधिक पसंद करता है।          
      चुनाव के समय यह  समस्या आती  है कि बुद्धिजीवी वर्ग किसे वोट दे, शिशुपाल जैसे लोगों को जिन्हें यह तक  नहीं पता होता है कि  शाहिद  सिद्दीकी कौन है और नई  दुनिया उर्दू का पुराना और प्रतिष्ठित साप्ताहिक अख़बार भी है जिसका संपादक मीडिया में  समाजवादी पार्टी  के नेता के रूप में वकालत करता रहता है और वह उन्हीं की पार्टी के कद्दावर नेता श्री मोहम्मद  आज़म खान का मित्र भी है.   
      मैं मुलायम सिंह यादव और  समाजवादी पार्टी के थिंक-टैंक कहे जाने वाले नेता प्रोफ़ेसर डॉ.राम गोपाल यादव का बहुत सम्मान करता हूँ, पार्टी  की ओर से आने वाले फूहण बयान पार्टी के चिंतन को हल्का बना देती है.           
      सिकंदर से राजा पुरु ने पूछा, तेरे साथ कैसा व्यवहार किया जाय ?  पुरु ने कहा, जैसा एक राजा दूसरे से करता है. थिंक-टैंकरों को इसकी व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है. .  
      अब सवाल यह आता है कि शाहिद सिद्दीकी ने गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी का इंटरविव लेने से पहले समाजवादी पार्टी से अनुमति क्यों नहीं ली? पार्टी-नजरिये से देखें तो यह पार्टी प्रोटोकोल  के दायरे  में आता है. शाहिद के नजरिये से देखें तो शाहिद  सिद्दीकी (अगर वह समाजवादी पार्टी में थे) तो भी उनका यह कदम गलत था. इससे निश्चय ही पार्टी का अनुशासन भंग हुआ है. नरेन्द्र मोदी ही क्या, कोई भी नेता साक्षात्कार के समय अपनी पार्टी-लाइन और अपने  डिफ़ेंस प़र ही बता करेगा.  
      २०१४ से पहले ही चुनाव हो सकते हैं और नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व विश्व हिन्दू परिषद, तथा  अतिवादी हिदू संगठनों की असंख्य इकाइयाँ  आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधान मंत्री की कुर्सी प़र बिठाना चाहती हैं किन्तु भारतीय जानता पार्टी अभी भी संशय के घेरे में है. बीजेपी का सञ्चालन अब  अडवाणी तथा उनके समर्थकों की लाबी के हाथ में नहीं रहा है. राष्ट्रीय चुनाव का गडित भी ऐसा नहीं है कि नरेन्द्र मोदी को देश की आम राय से ७ रेसकोर्स में प्रधान मंत्री के रूप में प्रधान मंत्री के रूप में रहने की अनुमति मिल जाए.           
      व्यक्तिगत  रूप से नरेन्द्र मोदी की विचारधारा और राजनीतिक कार्यशैली से मैं भले ही सहमत न हूँ, लोकतान्त्रिक व्यवस्था में हर एक को अपनी बात रखने की आज़ादी दी जानी चाहिए. एक उर्दू अख़बार के पत्रकार के सामने नरेन्द्र मोदी ने यदि अपनी बात रखी है तो उसे सुना जाना ज़रूरी है.   
      मोदी की विचारधारा किसी से भी छुपी नहीं है, क्योंकि उनका बचपन शाखाओं के साये  में बीता है और एक प्रचारक के रूप मे तथा राजनीति में आने के बाद भी  वह निरंतर पाकिस्तान की आंड  में भारतीय मुसलमानों के विरुद्ध विष-वमन करते रहे हैं. हो सकता है अभी सत्य सामने न आये, किन्तु समय निर्मम होता है, एक समय आयेगा जब उनके शासनकाल की समीक्षा भी सामने आयेगी और उनका दोष-निर्दोष नीर छीर विवेक सबके सामने होगा. इसमें इस तरह के संकेत तलाशना कि यह मुलायम सिंह का राजनीतिक दांव रहा है, कपोल कल्पना से अधिक कुछ नहीं है.    शाहिद सिद्दीकी अख़बार के मलिक हैं, सम्बब्धित  अख़बार का नफा-नुकसान भी  उन्हीं को देखना होता है. ज़ाहिर है कि इस साक्षात्कार से अख़बार की सर्कुलेशन बढ़ेगी और विज्ञापन का राष्ट्रीय आधार भी मज़बूत होगा. व्यापारिक घराने इस तरह के चोचले करते ही रहते हैं. ऐसे ही चोचले करते हुए राजदीप सरदेसाई, राजेश शुक्ला जैसे अनेक पत्रकार बड़े उद्योगपति  बन गए और मंत्री भी. चैनल २४ के मालिक (अनुराधा प्रसाद पत्नी, राजेश शुक्ला) हैं.          
     शाहिद सिद्दीकी की अपनी कोई विशेष आइडियालोजी  कभी नहीं रही है. वह एक मस्त-मौला शख्स रहा है. मोदी का साक्षात्कार मात्र व्यवसायिक संयोग हो सकता है, पार्टी की शायद रणनीति नहीं.          
      एक संपादक के रूप में जब मुझे भारत सरकार की विशिष्ट मासिक  पत्रिका समाज कल्याण  (हिंदी) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय , भारत सरकार  का गुजरात विशेषांक  निकालना पड़ा तो मैंने गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी से सन्देश मंगाया और उन्होंने सन्देश भेजा. मैंने उसे प्रकाशित किया.  इस पर CSWB की तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती रजनी पाटील ने एतराज़ जताया क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी से थीं.  मैंने उन्हें समझाया कि नरेन्द्र मोदी गुजरात  के मुख्य मंत्री हैं और गुजरात हमारे संघ यूनियन का एक स्टेट है, संविधान की नज़र से भी ये सन्देश गलत नहीं है.            
      वह एक भली महिला हैं, स्थिति को समझ गयीं और मामला ख़त्म हो गया. समाजवादी पार्टी के ज़िम्मेदार नेताओं को कम और संतुलित बोलने की भी राजनीति आनी चाहिए. क्योंकि  अधिक बोलने से पार्टी का आधार मज़बूत नहीं हुआ करता. राजनीति में कोई चीज़ स्थाई भी नहीं हुआ करती है.                                                                                                                     --डॉ रंजन ज़ैदी  (INDIAN SHIA POINT News Network(ISP) +91 9350934635

टिप्पणियाँ

  1. shahid siddiqi ke modi se lye interview ka kya matlab aur faida is per bahus kee bari gunjaish mojood hai lekin is mamle per jo rajneeti ho rahee hai zahir hai woh naa to muslamano kee hamdardi main ho rahee hai aur naa unke kisi faiade ke lye.lekin musalmano kee aadat bun chukee hai ke woh isee tarah kee fuzool batoon per khush hone main hee apna mafad samjhte hain , syasee dal bhee is baat ka pura faida uthakar musalmano ko khush karte rehte hain.darasal ub secularism aur firqaparastee main itna kum farq reh gaya hai ke tameez hee nahin ho pata ke bjp kitnee firqaparast hai aur congress kitnee secular?akhir modi ke interview per congress ke reaction ka kya matlab hai,jis ke andar gujrat ke under constitutional qadam tuk uthane kee himmat na hai aur na kabhi rahee,sivaye garhyalee aansoo bahane ke.lekin musalman aaj bhee samajh nahin paa raha hai aur congress ka hashiabardar bana hua hai.

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